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7.7% GDP Growth के बावजूद खतरा! ईरान तनाव और कमजोर मानसून से अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल

भारत की अर्थव्यवस्था ने FY26 में 7.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज कर अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया है. मजबूत उपभोक्ता मांग, निवेश और उत्पादन गतिविधियों ने GDP को सहारा दिया, लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि FY27 में तस्वीर चुनौतीपूर्ण हो सकती है.

GDP वृद्धि दर Image Credit: Money9live

भारतीय अर्थव्यवस्था ने तमाम वैश्विक चुनौतियों को धता बताते हुए एक बार फिर अपनी ताकत दिखाई है. वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ रेट उम्मीद से बेहतर रही है. हालांकि, अर्थशास्त्रियों ने आगाह किया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के कारण चालू वित्त वर्ष में इस रफ्तार पर ब्रेक लग सकता है.

चौथी तिमाही में 7.8% की जोरदार ग्रोथ

नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-मार्च तिमाही (Q4 FY26) में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.8 फीसदी रही, जो इससे पिछली तिमाही में 8 फीसदी थी. इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत पूरे वित्त वर्ष 2025-26 (Full Year) में देश की आर्थिक विकास दर 7.7 फीसदी दर्ज की गई है. यह आंकड़ा सरकार के 7.6 फीसदी के दूसरे अग्रिम अनुमान से भी ज्यादा है. मजबूत घरेलू मांग और मैन्युफैक्चरिंग-कंस्ट्रक्शन सेक्टर में तेजी से इस ग्रोथ को सपोर्ट मिला है.

वित्त वर्ष 2027 में सुस्त पड़ सकती है रफ्तार

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारतीय इकोनॉमी ने बीते वित्त वर्ष में तो मजबूत प्रदर्शन किया, लेकिन नए वित्त वर्ष (FY27) में चुनौतियां बड़ी हैं.

  • ग्रोथ का अनुमान घटा: रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) ने FY27 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.6 फीसदी और एचडीएफसी (HDFC) बैंक ने 6.5 फीसदी रखा है.
  • बढ़ेगी लागत: कच्चे तेल की कीमतें औसतन 95 डॉलर प्रति बैरल रहने की आशंका है. इसके साथ ही अल-नीनो के कारण सामान्य से कम मानसून का अनुमान और ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी के मुताबिक, कच्चे तेल और कमोडिटी की बढ़ती कीमतों और कमजोर एक्सपोर्ट के चलते नए वित्त वर्ष में ग्रोथ थोड़ी कमजोर रह सकती है. हालांकि, बढ़ती महंगाई के चलते नॉमिनल जीडीपी 11.5 से 12 फीसदी के बीच रह सकती है.

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सरकार के कदमों से मिलेगी राहत

डेलॉयट इंडिया की रुमकी मजूमदार ने कहा कि मार्च में मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखकर आम जनता और कंपनियों को बड़ी राहत दी. सरकार का कैपेक्स (पूंजीगत व्यय) प्रोग्राम और विदेशी निवेश बढ़ाने के प्रयास प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देंगे, जिससे मंदी के झटकों को झेलने में मदद मिलेगी.

डीबीएस (DBS) बैंक के मुताबिक, भारतीय कॉर्पोरेट्स ने फिलहाल अपनी इन्वेंट्री का इस्तेमाल कर इनपुट कॉस्ट के दबाव को संभाला है, लेकिन सीमेंट और फर्टिलाइजर जैसे सेक्टर्स पर इसका असर दिखना शुरू हो गया है. आगे चलकर अगर महंगाई और बढ़ती है, तो नीति निर्माता ब्याज दरों में बढ़ोतरी का कदम भी उठा सकते हैं.