चाबहार पोर्ट पर कंट्रोल बरकरार रखेगा भारत! अमेरिका से चल रही बातचीत; खत्म होने वाली है प्रतिबंधों पर मिली छूट की डेडलाइन

भारत और ईरान ने 2024 में बंदरगाह पर भारतीय ऑपरेशन्स के लिए 10 साल का समझौता किया, जिससे वर्षों से चल रहे अस्थायी इंतजाम खत्म हो गए. चाबहार को अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक भारत की पहुंच का एक अहम हिस्सा माना जाता है.

चाबहार पोर्ट Image Credit: Alireza Asghari / 500px/Getty Images

भारत और ईरान ने 2024 में चाबहार पोर्ट पर भारतीय ऑपरेशन्स के लिए 10 साल का समझौता किया था. लेकिन पिछले साल सितंबर में अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगा दिए थे, पर भारत को पोर्ट के ऑपरेशन के लिए छूट मिली थी. अब यह डेडलाइन खत्म होने के करीब है. इसको लेकर विदेश मंत्रालय की तरफ से बयान जारी किया गया है.

भारत ने शुक्रवार को कहा कि वह अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान के चाबहार पोर्ट पर उसकी योजनाएं समय-सीमा वाली पाबंदियों में छूट के तहत जारी रहें. डेडलाइन इस साल 26 अप्रैल को खत्म होने वाली है.

अमेरिकी पक्ष से चल रही बातचीत

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘जैसा कि आप जानते हैं 28 अक्टूबर 2025 को अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने एक लेटर जारी किया था. उस लेटर में हमें बिना शर्त प्रतिबंधों में छूट के बारे में बताया गया था. जैसा कि आपको पता है हमें जो प्रतिबंधों में छूट मिली है वह 26 अप्रैल 2026 तक वैलिड है. हम इस फ्रेमवर्क के तहत काम करने के लिए अमेरिकी पक्ष से बातचीत कर रहे हैं.’

भारत के लिए अहम क्यों है चाबहार पोर्ट

इस छूट से भारत चाबहार पोर्ट पर अपनी डेवलपमेंट भूमिका बनाए रख पाएगा. इसे भारत, पाकिस्तान को बाईपास करके अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक पहुंच के लिए बहुत जरूरी मानता है. इस पोर्ट को एक प्रमुख क्षेत्रीय व्यापार और ट्रांजिट हब के तौर पर भी पेश किया गया है.

इससे पहले अमेरिका ने पिछली छूट डेडलाइन के खत्म होने के बाद चाबहार ऑपरेशंस के लिए भारत को छह महीने की छूट दी थी, जिससे भारत की कनेक्टिविटी योजनाओं को अस्थायी राहत मिली थी.

10 साल का समझौता

भारत और ईरान ने 2024 में बंदरगाह पर भारतीय ऑपरेशन्स के लिए 10 साल का समझौता किया, जिससे वर्षों से चल रहे अस्थायी इंतजाम खत्म हो गए. इस डील को बड़े प्रतिबंधों के बावजूद चाबहार में भारत की मौजूदगी को लंबे समय तक सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा गया.

चाबहार को अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक भारत की पहुंच का एक अहम हिस्सा माना जाता है और हाल के वर्षों में इसका इस्तेमाल मानवीय सहायता, जिसमें अनाज और मेडिकल सप्लाई शामिल हैं, भेजने के लिए किया गया है.

यह पोर्ट क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स में बड़ी भूमिका निभा सकता है. इसे इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से जोड़ने की योजना है, जिससे सेंट्रल एशिया, रूस और उससे आगे के लिए व्यापार मार्ग खुलेंगे.

वैकल्पिक ट्रेड गेटवे

इसके अलावा, उज्बेकिस्तान जैसे देशों ने चाबहार को एक वैकल्पिक ट्रेड गेटवे के तौर पर इस्तेमाल करने में दिलचस्पी दिखाई है, खासकर इसलिए क्योंकि लैंडलॉक्ड इकॉनमी चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव वाले मौजूदा रास्तों पर निर्भरता कम करना चाहती हैं. रूस ने भी सेंट्रल एशिया के रास्ते चाबहार के जरिए भारत के साथ अपने कुछ ट्रेड को रूट करने की संभावना तलाशी है, जिससे इस पोर्ट का रणनीतिक महत्व और बढ़ गया है.

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