CCTV कैमरे से वैक्सीन तक , 56 नए प्रोडक्ट की IIP में एंट्री; जानें एक जून से क्या बदलेगा
केंद्र सरकार जून से इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन यानी IIP की नई सीरीज लागू करने जा रही है, जिसमें बेस ईयर को 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया जाएगा. नई सीरीज में CCTV कैमरे, वैक्सीन, एयरक्राफ्ट पार्ट्स और नॉन-वोवन टेक्सटाइल जैसे कई नए प्रोडक्ट्स शामिल किए गए हैं. वहीं केरोसिन और CFL जैसे पुराने प्रोडक्ट्स को बाहर किया गया है.
Industrial Production Data: भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को अधिक आधुनिक और वास्तविक स्वरूप में दिखाने के लिए केंद्र सरकार इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन यानी आईआईपी की नई सीरीज लागू करने जा रही है. सांख्यिकी मंत्रालय 1 जून से आईआईपी का नया संस्करण जारी करेगा, जिसमें बेस ईयर को 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया जाएगा. यह बदलाव देश की बदलती औद्योगिक संरचना, नई टेक्नोलॉजी और उभरते सेक्टर्स को बेहतर तरीके से आंकड़ों में शामिल करने के उद्देश्य से किया जा रहा है.
कई नए प्रोडक्ट शामिल
नई आईआईपी सीरीज में ऐसे कई प्रोडक्ट्स को जोड़ा गया है, जिनकी मांग और उत्पादन पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है. इनमें मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड, CCTV कैमरे, नॉन-वोवन टेक्सटाइल उत्पाद, एयरक्राफ्ट एवं स्पेसक्राफ्ट पार्ट्स, स्टेंट और वैक्सीन जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं. इन प्रोडक्ट को शामिल करने का उद्देश्य आधुनिक औद्योगिक उत्पादन को सही तरीके से मापना है.
वहीं दूसरी ओर कुछ पुराने और कम उपयोग वाले प्रोडक्ट को सूची से बाहर किया गया है. इनमें केरोसिन, फ्लोरोसेंट ट्यूब, CFL, सिलाई मशीन और साइकिल तथा रिक्शा टायर से जुड़े कुछ उत्पाद शामिल हैं.
नए सेक्टर्स को भी मिला स्थान
नई सीरीज में गैस सप्लाई, वाटर सप्लाई, सीवरेज और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे सेक्टर्स को पहली बार प्रमुख रूप से शामिल किया गया है. इससे देश की औद्योगिक गतिविधियों की तस्वीर पहले के मुकाबले ज्यादा व्यापक दिखाई देगी. सरकार ने बिजली क्षेत्र के लिए भी अलग ट्रैकिंग सिस्टम तैयार किया है, जिसके तहत रिन्यूएबल और नॉन-रिन्यूएबल एनर्जी के अलग-अलग इंडेक्स बनाए जाएंगे.
407 से बढ़कर 463 हुए आइटम ग्रुप
नई सीरीज में कुल आइटम ग्रुप्स की संख्या 407 से बढ़ाकर 463 कर दी गई है. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सबसे बड़ा विस्तार हुआ है, जहां आइटम ग्रुप्स 405 से बढ़कर 455 हो गए हैं. इससे प्रोडक्शन गतिविधियों की अधिक विस्तृत और सटीक निगरानी संभव होगी.
हालांकि यूज-बेस्ड कैटेगरी में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. प्राइमरी गुड्स, कैपिटल गुड्स, इंटरमीडिएट गुड्स, इंफ्रा एवं कंस्ट्रक्शन गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल जैसी कैटेगरी पहले की तरह जारी रहेंगी.
मेथडोलॉजी में भी सुधार
नई आईआईपी सीरीज में डेटा संग्रह और गणना पद्धति में भी बदलाव किए गए हैं. फैक्टरी बंद होने या डेटा उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में फैक्टरी सब्स्टीट्यूशन सिस्टम लागू किया जाएगा. इसके अलावा पुरानी और नई सीरीज को जोड़ने के लिए ज्योमेट्रिक मीन पद्धति अपनाई जाएगी, जिससे आंकड़ों में निरंतरता बनी रहे.
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