अमेरिका ने भारत पर टेक्सटाइल और स्टील के ज्यादा प्रोडक्शन का लगाया आरोप, भारत ने नकारा
अमेरिका के 'सरप्लस क्षमता' वाले आरोपों को भारत ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. इसी बीच सरकार ने टेक्सटाइल PLI स्कीम के तीसरे दौर में 22 नई कंपनियों को मंजूरी दी है, जिससे ₹12,822 करोड़ से अधिक निवेश और हजारों नई नौकरियों का रास्ता खुलने की उम्मीद है.

भारत ने टेक्सटाइल और स्टील सेक्टर में ‘सरप्लस क्षमता’ (जरूरत से ज्यादा उत्पादन) होने के अमेरिकी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. एडिशनल ट्रेड सेक्रेटरी अमिताभ कुमार ने बुधवार को साफ कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की ‘धारा 301’ जांच में लगाए गए ये आरोप पूरी तरह गलत हैं. भारत में प्रति व्यक्ति खपत के मुकाबले कपड़ा और स्टील का उत्पादन अभी भी काफी कम है, इसलिए सरप्लस क्षमता का सवाल ही नहीं उठता.
आरोपों के बीच टेक्सटाइल सेक्टर को मिली बड़ी रफ्तार
एक तरफ भारत ने अमेरिकी आरोपों का जवाब दिया, वहीं दूसरी तरफ घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने कपड़ा क्षेत्र के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तीसरे दौर के तहत 22 और कंपनियों को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही इस राउंड में चुनी गई कंपनियों की कुल संख्या अब 96 हो गई है, जिससे देश में ₹12,822 करोड़ से ज्यादा का निवेश आएगा.
₹15,000 करोड़ का टर्नओवर
मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, इन नई 22 कंपनियों के आने से टेक्सटाइल सेक्टर में ₹2,339.14 करोड़ का अतिरिक्त निवेश होगा. इससे करीब ₹15,561.34 करोड़ का बंपर टर्नओवर होने की उम्मीद है और कपड़ा उद्योग में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे. इस फैसले से अकेले इस राउंड में ही 36,217 से ज्यादा नौकरियां पैदा होंगी.
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इन नई मंजूरियों के बाद, पीएलआई स्कीम के राउंड-3 के तहत कुल प्रतिबद्ध निवेश ₹12,822.67 करोड़ तक पहुंच गया है, जबकि इससे होने वाला अनुमानित टर्नओवर ₹58,294.18 करोड़ रहने का अनुमान है. सरकार का यह कदम दिखाता है कि भारत बाहरी आरोपों की परवाह किए बिना अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ाने पर तेजी से काम कर रहा है.