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रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी, EU का बड़ा एक्शन; भारत सहित इन देशों की 50 कंपनियों पर सीधा असर

यूरोपीय संघ (EU) ने रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों का प्रस्ताव पेश किया है, जिसकी जद में भारत की कुछ कंपनियां भी आ सकती हैं. प्रस्तावित कदमों का सबसे बड़ा असर रूस के साथ कारोबार करने वाले भारतीय निर्यातकों और उद्योगों पर पड़ सकता है. ऐसे में भारत के लिए अपने आर्थिक हितों और वैश्विक साझेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

EU Sanctions on Russia : यूरोपीय संघ (EU) ने रूस के खिलाफ 21वें सैंक्शन पैकेज का प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें भारत, चीन, UAE, तुर्की समेत कई देशों की करीब 50 कंपनियों पर नए निर्यात नियंत्रण लगाने की तैयारी की गई है. हालांकि अभी इन प्रतिबंधों को EU सदस्य देशों की मंजूरी मिलना बाकी है, लेकिन प्रस्ताव सामने आते ही भारत में इसके संभावित आर्थिक प्रभावों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. यदि ये प्रतिबंध लागू होते हैं तो रूस के साथ कारोबार करने वाली कुछ भारतीय कंपनियों और निर्यातकों को अतिरिक्त जांच और नियमों का सामना करना पड़ सकता है, जिसका असर इनके कारोबार पर पड़ने वाला है.

भारत पर क्या होगा असर?

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत और रूस के बीच व्यापार में बढ़ोतरी हुई है. खासकर एनर्जी, मशीनरी और औद्योगिक उत्पादों के क्षेत्र में दोनों देशों के कारोबारी संबंध मजबूत हुए हैं. EU के नए प्रस्ताव के तहत यदि भारत की कुछ कंपनियों को प्रतिबंधित कंपनियों की लिस्ट में शामिल किया जाता है, तो उनके लिए यूरोपीय तकनीक, उपकरण और कुछ संवेदनशील उत्पादों तक पहुंच मुश्किल हो सकती है. इससे संबंधित कंपनियों के निर्यात और वैश्विक कारोबार पर असर पड़ने की आशंका है.

व्यापक स्तर पर भारत की अर्थव्यवस्था पर तत्काल बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है, लेकिन रूस के साथ व्यापार करने वाली चुनिंदा कंपनियों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

रूस पर दबाव बढ़ाने की EU की रणनीति

यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कैलस के अनुसार, नया प्रतिबंध रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. इसके तहत बैंकों, हथियार निर्माताओं, तेल कारोबारियों, रिफाइनरियों और क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स पर भी कार्रवाई का प्रस्ताव है. इसके अलावा रूस के तथाकथित शैडो फ्लीट से जुड़े जहाजों, बंदरगाहों और हवाई अड्डों को भी निशाना बनाया गया है.

EU का दावा है कि इन कदमों से रूस की सैन्य और आर्थिक क्षमता पर दबाव बढ़ेगा तथा मौजूदा प्रतिबंधों को दरकिनार करने के रास्ते सीमित होंगे.

भारत के लिए संतुलन की चुनौती

भारत ने अब तक रूस-यूक्रेन संघर्ष पर संतुलित रुख बनाए रखा है. एक ओर रूस भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक और ऊर्जा साझेदार है, वहीं दूसरी ओर EU और पश्चिमी देश भारत के प्रमुख व्यापारिक भागीदार हैं. ऐसे में यदि नए प्रतिबंध लागू होते हैं तो भारत को अपने आर्थिक और कूटनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.

फिलहाल यह प्रस्ताव EU सदस्य देशों के विचाराधीन है. अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही साफ होगा कि भारत की कौन-कौन सी कंपनियां इसकी जद में आएंगी और इसका वास्तविक प्रभाव कितना व्यापक होगा.

रूस पर EU के नए प्रतिबंध

रूस के तेल कारोबार पर सख्ती

  • रूसी तेल की बिक्री से होने वाली कमाई कम करने की कोशिश.
  • रूस को LNG गैस टैंकर बेचने या ट्रांसफर करने पर नए प्रतिबंध.
  • रूस के प्रतिबंधों से बचने वाले 30 और जहाजों पर कार्रवाई.
  • जो जहाज इन प्रतिबंधित जहाजों की मदद करेंगे, उन पर भी प्रतिबंध लग सकता है.
  • रूस के 2 बंदरगाह और 4 हवाई अड्डे भी प्रतिबंधों के दायरे में आएंगे.

बैंकों और वित्तीय सिस्टम पर बड़ा प्रहार

  • करीब 90 रूसी बैंकों की संपत्तियां फ्रीज की जाएंगी.
  • 30 से ज्यादा बैंकों पर अतिरिक्त लेन-देन प्रतिबंध लगाए जाएंगे.
  • 11 क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर भी कार्रवाई होगी.

हथियार और ड्रोन बनाने वाली कंपनियां निशाने पर

  • ड्रोन बनाने से जुड़ी 30 से ज्यादा कंपनियों पर प्रतिबंध.
  • 50 कंपनियों पर नए एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाए जाएंगे.
  • रूस को सैन्य सामान और तकनीक पहुंचाने वाले नेटवर्क पर सख्ती होगी.

युद्ध में काम आने वाले सामानों पर रोक

  • कुछ खास धातुओं, Alloys और तकनीकी सामग्री के निर्यात पर रोक.
  • कार के कुछ पुर्जों, कीमती धातुओं के अयस्क और कुछ रसायनों के आयात पर भी प्रतिबंध.

रूस की कमाई के रास्ते बंद करने की कोशिश

  • तेल व्यापारियों, रिफाइनरियों, हथियार निर्माताओं और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वालों पर कार्रवाई.
  • रूस के लिए युद्ध का खर्च जुटाना और मुश्किल बनाया जाएगा.

नई ब्लैकलिस्ट

  • 170 से ज्यादा लोगों और संस्थाओं को प्रतिबंध सूची में डालने का प्रस्ताव.
  • अगले हफ्ते 81 और नामों पर भी प्रतिबंध लगाए जाएंगे.

कुल मिलाकर, EU रूस की तेल से होने वाली कमाई, बैंकिंग सिस्टम, हथियार और ड्रोन उत्पादन तथा प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क को निशाना बनाकर उसकी युद्ध क्षमता को कमजोर करना चाहता है.