भारत में बेरोजगारी दर 5 महीने के उच्‍च स्‍तर पर, मार्च में अनएम्प्लॉयमेंट रेट बढ़कर 5.1 फीसदी पर पहुंचा

भारत में बेरोजगारी दर मार्च 2026 में बढ़कर 5.1 फीसदी पर पहुंच गई है, जो पिछले 5 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. PLFS डेटा के अनुसार, शहरी बेरोजगारी 6.8 फीसदी तक पहुंच गई, जबकि युवाओं और महिलाओं में स्थिति अधिक चिंताजनक बनी हुई है. साथ ही LFPR और WPR में भी गिरावट आई है, जो रोजगार बाजार की कमजोरी को दिखा रहा है. यह आंकड़े संकेत देते हैं कि देश में जॉब क्राइसिस अभी भी बना हुआ है.

बेरोजगारी दर Image Credit: tv9 bharatvarsh

India Unemployment Rate: भारत में रोजगार की स्थिति को लेकर ताजा आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के अनुसार, मार्च 2026 में देश की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.1 फीसदी पर पहुंच गई, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. फरवरी में यह दर 4.9 फीसदी थी. इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी का बढ़ना बताया जा रहा है. यह संकेत देता है कि देश में रोजगार सृजन की गति अभी भी दबाव में है.

शहरी बेरोजगारी में तेज बढ़ोतरी

मार्च के आंकड़ों के मुताबिक, शहरी बेरोजगारी दर बढ़कर 6.8 फीसदी हो गई, जो फरवरी में 6.6 फीसदी थी. वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी हल्की बढ़ोतरी देखी गई और यह दर 4.3 फीसदी तक पहुंच गई, जो पहले 4.2 फीसदी थी. यह डेटा उन लोगों को कवर करता है, जिनकी उम्र 15 वर्ष या उससे अधिक है और जो काम की तलाश में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं. लगातार बढ़ती शहरी बेरोजगारी यह दिखाती है कि इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर में जॉब ग्रोथ अपेक्षा के अनुसार नहीं हो रही है.

महिलाओं और युवाओं पर ज्यादा असर

रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं में बेरोजगारी की दर पुरुषों की तुलना में ज्यादा बनी हुई है. मार्च में महिलाओं की बेरोजगारी दर 5.3 फीसदी रही, जबकि पुरुषों की 5 फीसदी रही. वहीं, युवाओं (15-29 वर्ष) की स्थिति और ज्यादा चिंताजनक है. इस वर्ग में बेरोजगारी दर बढ़कर 15.2 फीसदी हो गई, जो फरवरी में 14.8 फीसदी थी. युवा महिलाओं में यह दर 17.7 फीसदी तक पहुंच गई, जबकि युवा पुरुषों में यह 14.3 फीसदी रही. यह संकेत देता है कि नए जॉब अवसर युवाओं के लिए पर्याप्त नहीं बन पा रहे हैं.

लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन में गिरावट

रोजगार की तलाश करने या काम करने वाले लोगों का अनुपात, जिसे लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) कहा जाता है, मार्च में घटकर 55.4 फीसदी रह गया. फरवरी में यह 55.9 फीसदी था. खास बात यह है कि महिलाओं की भागीदारी में ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है, जो 35.3 फीसदी से घटकर 34.4 फीसदी हो गई. पुरुषों में यह मामूली गिरकर 77.4 फीसदी रहा. शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में LFPR में गिरावट देखी गई, जो रोजगार बाजार की कमजोरी को दिखा रहा है.

वर्कर पॉपुलेशन रेशियो भी घटा

मार्च में वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR), यानी कुल आबादी में काम करने वाले लोगों का अनुपात, भी घटकर 52.6 फीसदी रह गया, जो फरवरी में 53.2 फीसदी था. पुरुषों और महिलाओं दोनों में यह गिरावट देखी गई. यह साफ संकेत है कि रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है.

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