गैस संकट के बीच Reliance-NLC का बड़ा दांव! जमीन के नीचे कोयले से बनेगी गैस, आयत पर घटेगी निर्भरता

NLC India Limited और Reliance Industries ने गुजरात में जमीन के नीचे लिग्नाइट से गैस बनाने की महत्वाकांक्षी योजना पर हाथ मिलाया है. यह प्रोजेक्ट सफल होने पर भारत की LNG आयात पर निर्भरता कम कर सकता है और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती दे सकता है.

महंगी LNG से छुटकारे की तैयारी! Image Credit: Money9 Live

ग्लोबल फ्यूल क्राइसिस और देश में गैस की किल्लत के बीच भारतीय ऊर्जा क्षेत्र से एक बड़ी खबर आ रही है. सरकारी क्षेत्र की नवरत्न कंपनी एनएलसी इंडिया लिमिटेड (NLCIL) और देश की सबसे मूल्यवान निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने एक बड़ा हाथ मिलाया है. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों कंपनियां मिलकर गुजरात में जमीन के नीचे ही लिग्नाइट (एक प्रकार का कोयला) से गैस बनाने यानी ‘अंडरग्राउंड लिग्नाइट गैसीफिकेशन’ प्रोजेक्ट पर काम करेंगी. अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भारत को महंगे आयातित लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) पर अपनी निर्भरता कम करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी.

गुजरात के दो ब्लॉकों पर टिकी नजरें

पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि इस प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए तैयारियां तेज हो चुकी हैं:

  • तकनीकी स्टडी शुरू: NLCIL और रिलायंस के बीच इस प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता (feasibility) और तकनीकी क्षमता को जांचने के लिए समझौता हो चुका है और शुरुआती स्टडी चल रही है.
  • गुजरात के ब्लॉक: इस प्रोजेक्ट के लिए गुजरात में स्थित NLCIL के दो लिग्नाइट ब्लॉकों को चुना गया है.

रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास गैसीफिकेशन टेक्नोलॉजी और गैस हैंडलिंग का पहले से बेहतरीन अनुभव है, इसलिए उनकी तकनीकी विशेषज्ञता का फायदा उठाने के लिए उन्हें इस प्रोजेक्ट में साथ लाया गया है.

जमीन के नीचे कैसे बनेगी गैस?

अंडरग्राउंड गैसीफिकेशन तकनीक के तहत जमीन के भीतर मौजूद लिग्नाइट को वहीं पर ‘सिंथेसिस गैस’ (Synthesis Gas या Syngas) में बदला जाता है. यह मुख्य रूप से हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड का मिश्रण होता है. इस गैस का इस्तेमाल उद्योगों में ईंधन के रूप में या फिर केमिकल और फर्टिलाइजर इंडस्ट्री में कच्चे माल के तौर पर किया जा सकता है.

NLCIL केवल गुजरात तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने लिग्नाइट संसाधनों के इस्तेमाल के लिए तेजी से विविधीकरण (Diversification) कर रही है. कंपनी तमिलनाडु के नेवेली में 4,394 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से एक ‘लिग्नाइट-टू-मेथोनॉल’ प्लांट लगाने की योजना पर काम कर रही है.

यह प्लांट अगले साल तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है, जो केंद्र सरकार के पर्यावरण अनुकूल और नेट-जीरो (Net-Zero) लक्ष्यों के बिल्कुल अनुरूप है.

सरकार का ₹37,500 करोड़ का बूस्टर डोज

यह पार्टनरशिप ऐसे समय पर हुई है जब केंद्र सरकार ने इसी महीने कोयला और लिग्नाइट गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम योजना को मंजूरी दी है.

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सरकार का लक्ष्य साल 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीफिकेशन का है. इस कदम से भारत को उन जरूरी चीजों के आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी, जो फिलहाल हम भारी मात्रा में बाहर से मंगाते हैं. जैसे- LNG (50% से ज्यादा आयात), यूरिया (20% आयात), अमोनिया (100% आयात), और मेथनॉल (80-90% आयात).

NLCIL, जो अब तक केवल लिग्नाइट माइनिंग और पावर जनरेशन तक सीमित थी, अब रिलायंस के साथ मिलकर देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बढ़ चुकी है.