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दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था संकट में! 39 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज में डूबा अमेरिका, रिकॉर्ड पर बॉन्ड यील्ड

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका बढ़ते कर्ज और रिकॉर्ड बॉन्ड यील्ड के दबाव में है. अमेरिकी सरकार का कुल कर्ज 39 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच चुका है, जबकि ब्याज भुगतान तेजी से बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात नहीं बदले तो आने वाले वर्षों में अमेरिका गंभीर राजकोषीय संकट का सामना कर सकता है.

अमेरिका कर्ज संकट Image Credit: Money9 Live

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी अमेरिका इस समय वित्तीय संकट की कगार पर खड़ा है. अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड ने अमेरिकी सरकार की मुश्किलें बेहद बढ़ा दी हैं. हालात इतने गंभीर हैं कि सरकार के लिए कर्ज लेने की लागत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने वाली है, जो आने वाले समय में उसके कुल राजस्व का एक बहुत बड़ा हिस्सा डकार जाएगी. फॉर्च्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज $39 ट्रिलियन (करीब 39 लाख करोड़ डॉलर) के करीब पहुंच चुका है और इसका सालाना ब्याज ही लगभग $1 ट्रिलियन होने जा रहा है. कांग्रेशनल बजट ऑफिस (CBO) के अनुसार, यह ब्याज खर्च अब मेडिकेयर (स्वास्थ्य योजना) पर होने वाले खर्च से भी ज्यादा हो चुका है.

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची बॉन्ड यील्ड

मई 2026 के अंत में अमेरिकी वित्तीय बाजार से जो आंकड़े सामने आए, वे बेहद डराने वाले हैं:

  • 30-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड: इसकी यील्ड बढ़कर 5.2% तक पहुंच गई, जो पिछले 19 सालों का सबसे उच्चतम स्तर है.
  • 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड: बेंचमार्क माने जाने वाले इस बॉन्ड की यील्ड 4.7% दर्ज की गई, जो साल 2007 के बाद सबसे ज्यादा है.

CBO ने अनुमान लगाया था कि 2036 तक 30-वर्षीय बॉन्ड की औसत यील्ड 4.65% और 10-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड 4.15% रहेगी. लेकिन मौजूदा दरें इस अनुमान से लगभग 0.50% (50 बेसिस पॉइंट्स) ऊपर चल रही हैं. दिखने में यह अंतर छोटा लग सकता है, लेकिन जब बात ट्रिलियन डॉलर्स के कर्ज की हो, तो यह मामूली अंतर भी अर्थव्यवस्था को तबाह करने के लिए काफी है.

CRFB का बड़ा दावा

गैर-पक्षपाती संस्था CRFB के ताजा विश्लेषण ने अमेरिकी सरकार की नींद उड़ा दी है. अगर बॉन्ड यील्ड इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रही, तो साल 2036 तक अमेरिकी अर्थव्यवस्था में ये बड़े बदलाव दिखेंगे:

  • रेवेन्यू का नुकसान: सरकार को मिलने वाले कुल राजस्व का 30% हिस्सा सिर्फ कर्ज का ब्याज चुकाने में चला जाएगा (CBO का अनुमान 25% था).
  • $2.5 ट्रिलियन का सालाना ब्याज: ब्याज का सालाना खर्च ढाई गुना बढ़कर 2.5 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगा. यह बजट की दूसरी सबसे बड़ी कैटेगरी बन जाएगी.
  • आम परिवारों पर बोझ: प्रति अमेरिकी परिवार पर कर्ज के ब्याज का बोझ पिछले साल के $7,900 से बढ़कर 2036 तक लगभग $17,000 (करीब 14 लाख रुपये) सालाना हो जाएगा.

$10 ट्रिलियन का नया कर्ज

अगले 12 महीनों के भीतर अमेरिकी सरकार को लगभग $10 ट्रिलियन का भारी-भरकम कर्ज और उठाना पड़ेगा. इसमें से $7.5 ट्रिलियन का इस्तेमाल पुराने मेच्योर हो रहे कर्ज को चुकाने के लिए होगा, जबकि $2 ट्रिलियन का इस्तेमाल बजट घाटे को पूरा करने में किया जाएगा.

दरअसल, कोविड-19 महामारी के दौरान फेडरल रिजर्व की आसान नीतियों के कारण सरकार ने बेहद कम ब्याज दरों पर बॉन्ड जारी किए थे. जो ट्रेजरी बिल 2021-22 में महज 0.2% की यील्ड पर थे, वे अब सरकार को 3.7% पर पड़ रहे हैं. वर्तमान में बकाया ट्रेजरी नोट्स पर औसत ब्याज दर 3.23% है, लेकिन पुराना कर्ज जैसे ही मेच्योर होगा, सरकार को उसे बहुत ऊंची दरों पर रिप्लेस करना पड़ेगा.

क्या फेडरल रिजर्व बचा पाएगा आर्थिक मंदी से?

फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉरश (Kevin Warsh) ने केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट को छोटा करने यानी ट्रेजरी सिक्योरिटीज की होल्डिंग्स को कम करने का समर्थन किया है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इससे बाजार में अत्यधिक मांग को कम करने और महंगाई पर काबू पाने में मदद मिल सकती है.

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बजट विशेषज्ञों का साफ कहना है कि केवल मॉनेटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) से इस वित्तीय संकट को नहीं टाला जा सकता. असली समस्या सरकार का अनियंत्रित खर्च और राजकोषीय घाटा है. फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को तो प्रभावित कर सकता है, लेकिन व्हाइट हाउस और अमेरिकी कांग्रेस के खर्चों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि खर्चों में कटौती या टैक्स में बदलाव जैसे कड़े फैसले तुरंत नहीं लिए गए, तो अमेरिका जल्द ही एक बड़े “फिस्कल क्राइसिस” की चपेट में होगा.