पश्चिम एशिया में तनाव के बीच मार्च में भारत का व्यापार घाटा हुआ कम, गुड्स एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी

India Trade Deficit: इस सुधार का मुख्य कारण निर्यात में वृद्धि और आयात में कमी का मेल था. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च में माल निर्यात बढ़कर 38.92 अरब डॉलर हो गया. , पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण भविष्य की तस्वीर अभी भी धुंधली बनी हुई है. अमेरिका ने कहा कि उसकी सेना ने ईरान से जुड़े समुद्री व्यापार को रोक दिया है.

ट्रेड डेफिसिट में सुधार. Image Credit: General_4530/Moment/Getty Images

India Trade Deficit: मार्च में भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट तेजी से घटकर 20.98 अरब डॉलर रह गया, जो बाजार की उम्मीदों से काफी कम था. ऐसा ईरान से जुड़े बढ़ते तनाव के बाद हुआ, जिससे निर्यात और ऊर्जा आयात के लिए नए जोखिम पैदा हो गए थे. रॉयटर्स द्वारा किए गए अर्थशास्त्रियों के एक सर्वेक्षण में इस महीने के लिए 32.75 अरब डॉलर के घाटे का अनुमान लगाया गया था, जबकि फरवरी में यह 27.1 अरब डॉलर था.

एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी

इस सुधार का मुख्य कारण निर्यात में वृद्धि और आयात में कमी का मेल था. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च में माल निर्यात बढ़कर 38.92 अरब डॉलर हो गया, जो फरवरी में 36.61 अरब डॉलर था. वहीं आयात घटकर 59.9 अरब डॉलर रह गया, जो पहले 63.71 अरब डॉलर था.

पश्चिम एशिया में तनाव

हालांकि, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण भविष्य की तस्वीर अभी भी धुंधली बनी हुई है. अमेरिका ने कहा कि उसकी सेना ने ईरान से जुड़े समुद्री व्यापार को रोक दिया है, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि संघर्ष को समाप्त करने के लिए तेहरान के साथ बातचीत फिर से शुरू हो सकती है.

गुड्स एंड सर्विसेज एक्सपोर्ट

इसके अलावा, वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि 2025-26 में भारत के गुड्स एंड सर्विसेज के कुल निर्यात में साल-दर-साल आधार पर 4.22 फीसदी की वृद्धि होने का अनुमान है, जिससे यह लगभग 860 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा. सर्विसेज का निर्यात लगातार एक प्रमुख ड्राइवर बना रहा.

भारत की बढ़ती ताकत

वित्त वर्ष के दौरान इसकी वैल्यू 418.31 अरब डॉलर आंका गया, जो IT, व्यावसायिक सेवाओं और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाता है.

इस बीच, गुड्स एक्सपोर्ट में 1 फीसदी की मामूली वृद्धि देखी गई, जिससे यह 441.78 अरब डॉलर तक पहुंच गया. यह सेवाओं के क्षेत्र की तुलना में वस्तुओं के व्यापार में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि का संकेत देता है.

ग्लोबल पार्टनरशिप

हालांकि, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने, ट्रेड फाइनेंस तक पहुंच बेहतर बनाने और ग्लोबल पार्टनरशिप को गहरा करने पर लगातार जोर देने से, भारत आने वाले महीनों में अपनी एक्सपोर्ट की गति को बनाए रखने के लिए अच्छी स्थिति में दिख रहा है.

महामारी के बाद के दौर में देश सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक के तौर पर उभरा है, जिसने वैश्विक उतार-चढ़ाव का सामना करने के लिए अपने मजबूत घरेलू बुनियादी आधार का सहारा लिया है.

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