4 साल बाद खुला गेहूं निर्यात का रास्ता, कई देशों ने भारत से खरीदने में दिखाई दिलचस्पी
भारत ने करीब 4 साल बाद गेहूं निर्यात पर लगी पाबंदी हटाकर वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत वापसी दर्ज की है. मिस्र, इंडोनेशिया, म्यांमार और बांग्लादेश जैसे देशों ने भारतीय गेहूं खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है. सरकार जल्द ही DGFT के जरिए निर्यात कोटा तय करने वाली है, जिससे इंटरनेशनल ट्रेड को गति मिलेगी. हालांकि, बेमौसम बारिश से क्वालिटी पर असर जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं.
India Wheat Export: भारत ने करीब चार साल बाद गेहूं निर्यात पर लगी पाबंदी हटाकर वैश्विक बाजार में एक बड़ा संकेत दिया है. इस फैसले के बाद कई देशों, खासतौर पर मिस्र, इंडोनेशिया, म्यांमार और बांग्लादेश ने भारत से गेहूं आयात में दिलचस्पी दिखाई है. सरकार द्वारा निर्यात कोटा तय करने की प्रक्रिया जल्द पूरी होने की उम्मीद है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नई रफ्तार मिल सकती है. वैश्विक स्तर पर सप्लाई में जियोपॉलिटिकल टेंशन से आई रुकावटों के बीच भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर बनकर उभरा है, जो किसानों और व्यापार दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.
निर्यात कोटा जल्द होगा तय
फरवरी 2026 में सरकार ने 2.5 मिलियन टन गेहूं और 0.5 मिलियन टन प्रोसेस्ड गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी. यह फैसला देश में मजबूत स्टॉक और रिकॉर्ड उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए लिया गया. अब डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड द्वारा निर्यात कोटा आवंटित किए जाने की तैयारी अंतिम चरण में है. इसके बाद निर्यात प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं की सप्लाई बढ़ेगी.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की मजबूत पकड़
भारत का गेहूं वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के लिए भारतीय गेहूं की कीमत 275 से 280 डॉलर प्रति टन के बीच है, जो इसे अन्य देशों के मुकाबले आकर्षक बनाती है. एक्सपर्ट का मानना है कि यह स्थिति भारत को एक मजबूत निर्यातक के रूप में स्थापित कर सकती है. इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना भी बढ़ेगी और देश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
मौसम की मार से गुणवत्ता पर असर
हालांकि, इस सकारात्मक स्थिति के बीच कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं. हाल ही में हुई बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने 9 राज्यों के 152 जिलों में करीब 4.2 मिलियन हेक्टेयर गेहूं फसल को प्रभावित किया है. इससे 20 से 30 फीसद तक क्वालिटी में गिरावट देखी गई है. दानों का रंग बदलना, चमक कम होना और नमी बढ़ना प्रमुख समस्याएं हैं. साथ ही करीब 2 मिलियन टन उत्पादन का नुकसान होने का अनुमान है.
रिकॉर्ड उत्पादन और मजबूत स्टॉक
इन चुनौतियों के बावजूद देश में गेहूं उत्पादन मजबूत बना हुआ है. कृषि मंत्रालय ने 2025-26 फसल वर्ष के लिए रिकॉर्ड 120 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान जताया है, जो पिछले वर्ष के 117 मिलियन टन से अधिक है. वहीं फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के पास अप्रैल की शुरुआत में 22 मिलियन टन से ज्यादा गेहूं का स्टॉक मौजूद है, जो बफर स्टॉक से काफी अधिक है. यही कारण है कि खुदरा बाजार में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.
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