तेल मार्केट में बड़ा उलटफेर! 3 महीने में पहली बार 100 डॉलर से नीचे फिसला इंडियन ऑयल बास्केट

करीब 3 महीने बाद इंडियन ऑयल बास्केट की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है. शुक्रवार को यह घटकर 97.52 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जबकि ब्रेंट क्रूड 91.12 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गया. अमेरिका-ईरान समझौते की संभावनाओं और होर्मुज स्ट्रेट के सामान्य होने की उम्मीद से वैश्विक तेल बाजार में नरमी देखने को मिली है.

इंडियन ऑयल बास्केट Image Credit: ai/canva

Indian Oil Basket: भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. करीब तीन महीने बाद पहली बार इंडियन ऑयल बास्केट की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है. शुक्रवार को भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत घटकर 97.52 डॉलर प्रति बैरल रह गई. इससे पहले 6 मार्च 2026 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब इंडियन ऑयल बास्केट 100 डॉलर के नीचे फिसला है. वहीं, वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी गिरकर 91.12 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. कच्चे तेल की कीमतों में आई यह गिरावट भारत के लिए राहत लेकर आ सकती है, क्योंकि हाल के महीनों में तेल की ऊंची कीमतों ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी पर भारी दबाव बना दिया था.

अमेरिका-ईरान समझौते की खबरों से टूटा तेल बाजार

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों को माना जा रहा है. इसके अलावा, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट के जल्द सामान्य रूप से खुलने की उम्मीद ने भी बाजार की चिंताओं को कम किया है.

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान इस समुद्री मार्ग पर दबाव बढ़ गया था, जिससे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं. अब हालात में सुधार की उम्मीद के चलते निवेशकों का भरोसा लौटता दिख रहा है.

मार्च से मई तक तेल में जबरदस्त उछाल

पिछले कुछ महीनों में तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. फरवरी में इंडियन ऑयल बास्केट का औसत मूल्य करीब 69 डॉलर प्रति बैरल था, जो अप्रैल में बढ़कर 114.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. मई में भी इसका औसत मूल्य 106.83 डॉलर प्रति बैरल रहा.

वहीं, ब्रेंट क्रूड ने अप्रैल के अंत में कारोबार के दौरान लगभग 126 डॉलर प्रति बैरल का स्तर छू लिया था. बाद में कीमतों में कुछ नरमी आई और पिछले सप्ताह यह 103.54 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. अब इसमें और गिरावट दर्ज की गई है.

पेट्रोल-डीजल कंपनियों को मिल सकती है राहत

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव पड़ा था. बढ़ती लागत की भरपाई के लिए कंपनियों ने 15 मई के बाद चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव किया था. इस दौरान ईंधन कीमतों में कुल मिलाकर करीब 7.8 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी.

कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट से रिफाइनरियों की लागत कम होगी और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को कुछ राहत मिलेगी. हालांकि, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी पर होने वाली अंडर-रिकवरी अभी भी लगभग 550 करोड़ रुपये प्रतिदिन आंकी जा रही है. ऐसे में नुकसान की पूरी भरपाई होने में समय लग सकता है.

रुपये की कमजोरी कम कर सकती है फायदा

तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद भारत के लिए एक बड़ी चुनौती रुपये की कमजोरी बनी हुई है. चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है और उसका भुगतान डॉलर में होता है, इसलिए रुपये में गिरावट इम्पोर्ट लागत को बढ़ा देती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रुपया कमजोर बना रहता है, तो सस्ते कच्चे तेल का पूरा फायदा भारतीय कंपनियों और उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाएगा. इससे लागत में होने वाली बचत का एक हिस्सा खत्म हो सकता है.

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