ईरान का बड़ा ऑफर 7 दिन में खोल देंगे होर्मुज! अमेरिका के सामने रखी ये शर्त; क्या अब थमेगा युद्ध?

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए अमेरिका के सामने शर्त रखी है. अमेरिका अगर ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाता है और सैन्य दबाव कम करता है तो ईरान एक हफ्ते में रास्ता खोल सकता है. यह बयान दोनों देशों के बीच जारी तनाव और होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर दबाव के बीच आया है.

होर्मुज स्ट्रेट Image Credit: Freepik

Highlights

  • ईरान ने अमेरिका के सामने रखा बड़ा ऑफर.
  • 7 दिन में युद्ध खत्म करने की कही बात.
  • अमेरिका के सामने रखी कुछ शर्त.

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने को लेकर अमेरिका के सामने एक शर्त रखी है. जापान की समाचार एजेंसी क्योदो (Kyod) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाता है और होर्मुज के आसपास सैन्य दबाव कम करता है, तो एक हफ्ते के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जा सकता है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि यह जानकारी ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से है. अधिकारी के बयान से संकेत मिलता है कि ईरान होर्मुज के रास्ते सामान्य जहाजों की आवाजाही शुरू करने को अमेरिका की सैन्य गतिविधियों और ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियों में कमी से जोड़ रहा है.

ईरान ने अमेरिका को दी नई चेतावनी

यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक दिन पहले चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने ईरान पर और हमले किए तो वह नए ठिकानों को निशाना बनाएगा और नए हथियारों का इस्तेमाल करेगा. करीब सात महीने से चल रहे युद्ध में ईरान और अमेरिका के बीच गतिरोध बना हुआ है. हालांकि, दोनों पक्षों में से कोई भी दोबारा पूरी तरह युद्ध की स्थिति में लौटता हुआ नजर नहीं आ रहा है.

होर्मुज में अभी भी तनाव

शनिवार को ईरान की सेना की केंद्रीय कमान ने कहा था कि अमेरिका तेहरान के खिलाफ नई कार्रवाई की तैयारी कर रहा है. ईरान के सरकारी टेलीविजन ने यह जानकारी दी थी, हालांकि इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई. पिछले महीने के आखिरी में तनाव बढ़ने के बाद हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई कुछ कम हुई है. हालांकि, ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेटमें वाणिज्यिक जहाजों पर रुक-रुककर हमले जारी हैं. दोनों पक्ष इस जलमार्ग में एक-दूसरे पर दबाव बनाने के लिए अलग-अलग तरह की नाकाबंदी कर रहे हैं.

यमन तक पहुंचा युद्ध

इस युद्ध का असर यमन तक भी पहुंच गया है. ईरान समर्थित हूती समूह ने सऊदी अरब समर्थित सरकार से और इलाकों पर कब्जा किया है. समूह ने सऊदी अरब के ठिकानों पर भी हमले किए हैं, जिसमें राजधानी रियाद भी शामिल है.

युद्ध से ईरान की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर

ईरान की ओर से होर्मुज को लेकर यह पेशकश ऐसे समय आई है जब मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर उसकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है. मार्च के आखिरी से जून के आखिरी के बीच देश की जीडीपी में सालाना आधार पर 10.1 फीसदी की गिरावट आई. यह अवधि ईरान के फारसी कैलेंडर के पहले तिमाही के तौर पर जानी जाती है. मध्य पूर्व में युद्ध की शुरुआत फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल के हमलों के साथ हुई थी. इस दौरान ईरान की अर्थव्यवस्था 10 फीसदी से ज्यादा सिकुड़ गई है.

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