ईरान युद्ध से 80% तक उछले डीजल के दाम, फिर भी इन देशों पर नहीं पड़ा असर; स्थिर रही कीमतें

ईरान युद्ध के चलते दुनियाभर में डीजल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है, लेकिन भारत सहित कई दूसरे देश ऐसे भी बनकर उभरे जहां पर डीजल की कीमतें काफी हद तक स्थिर रहीं. वहीं, दूसरी ओर फिलीपींस, मलेशिया सहित अमेरिका और यूरोप में कीमतों में बड़ी उछाल दर्ज की गई है.

80 फीसदी तक बढ़े डीजल के भाव Image Credit: @Money9live

West Asia War and Stable Diesel Price: पश्चिम एशिया में भड़के संघर्ष ने वैश्विक ईंधन बाजार को झकझोर कर रख दिया है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद शुरू हुआ यह युद्ध अब चौथे हफ्ते में पहुंच चुका है और इसका सीधा असर दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दिख रहा है. कई देशों में डीजल के दाम 80 फीसदी तक उछल गए हैं, जिससे आम लोगों से लेकर इंडस्ट्री तक पर भारी दबाव बन गया है. लेकिन डीजल की कीमतों में 80 फीसदी तक आए उछाल से कुछ देश अछूते भी रह गए. आइए विस्तार में बताते हैं.

क्यों बढ़ रहे डीजल के भाव?

इस उथल-पुथल की जड़ है कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल. ब्रेंट क्रूड, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार का प्रमुख बेंचमार्क है, कुछ ही हफ्तों में करीब 73 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गया. चूंकि पेट्रोल और डीजल इसी कच्चे तेल से बनते हैं, इसलिए इसकी कीमत बढ़ते ही दुनियाभर में ईंधन महंगा होना तय है.

सबसे ज्यादा असर किन देशों पर?

सबसे ज्यादा असर एशियाई देशों पर देखने को मिला है, जहां एनर्जी के लिए आयात पर भारी निर्भरता है. फिलीपींस में डीजल की कीमतों में सबसे बड़ी छलांग देखने को मिली, जहां दाम 80 फीसदी से ज्यादा बढ़ गए. मलेशिया और वियतनाम भी इस लिस्ट में ऊपर रहे, जहां कीमतों में क्रमश: करीब 58 फीसदी और 46 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया. सिंगापुर, चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों में भी डीजल महंगा हुआ, जिससे वहां ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्री की लागत बढ़ गई.

यूएस, यूरोप भी लिस्ट में

पश्चिमी देशों की बात करें तो अमेरिका, कनाडा और यूरोप भी इससे अछूते नहीं रहे. अमेरिका में डीजल के दाम 40 फीसदी से ज्यादा बढ़े, जबकि कनाडा में करीब 37 फीसदी का उछाल देखा गया. जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और इटली जैसे यूरोपीय देशों में भी कीमतों में दो अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ गया है. वहीं, विकासशील देशों के लिए यह झटका और भी बड़ा साबित हुआ है. नाइजीरिया में डीजल की कीमतें 78 फीसदी तक चढ़ गई, जबकि श्रीलंका में भी 37 फीसदी की बढ़ोतरी ने पहले से दबाव में चल रही अर्थव्यवस्था को और मुश्किल में डाल दिया.

इन देशों में स्थिर रही कीमतें

हालांकि, इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच कुछ देश ऐसे भी हैं, जहां इसका असर बेहद सीमित रहा. भारत, सऊदी अरब और रूस जैसे देशों में डीजल की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं. इसके पीछे सरकार की नीतियां, सब्सिडी, घरेलू उत्पादन और प्राइस कंट्रोल जैसे कदम अहम भूमिका निभा रहे हैं. खाड़ी देशों- कतर और यूएई में भी बढ़ोतरी सीमित रही, जहां दाम अपेक्षाकृत कम बढ़े. अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर टिक सकती हैं. इसका सीधा असर वैश्विक महंगाई, ट्रांसपोर्ट लागत और औद्योगिक उत्पादन पर पड़ेगा.

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