रास लाफान में हुई तबाही को ठीक करने में लगेंगे 5 साल, इन देशों की LNG सप्लाई होगी प्रभावित, भारत ने उठाया यह बड़ा कदम
ईरान के हमले से कतर की LNG निर्यात क्षमता का 17% हिस्सा प्रभावित हो गया है. कतर एनर्जी के CEO के अनुसार रास लाफान में भारी नुकसान हुआ है जिसकी मरम्मत में 3-5 साल लग सकते हैं और इससे वैश्विक गैस सप्लाई पर लंबा असर पड़ेगा. वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है.
कतर में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लाई को लेकर बड़ा संकट सामने आया है जो अब कुछ हफ्तों या महीनों का नहीं बल्कि कई वर्षों तक चलने वाला है. कतर एनर्जी के CEO साद अल-काबी के मुताबिक, देश के विशाल रास लाफान कॉम्प्लेक्स में हुए नुकसान की मरम्मत में 3 से 5 साल तक का समय लग सकता है. इस अपडेट ने बाजार के सेंटीमेंट्स को पूरी तरह बदल दिया है जो संकट पहले युद्धकालीन अस्थायी व्यवधान माना जा रहा था, अब वह एक दीर्घकालिक सप्लाई संकट बन गया है. अब तक ट्रेडर्स इस बात पर फोकस कर रहे थे कि सप्लाई कब बहाल होगी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कब खुलेगा और फोर्स मेज्योर कब हटेगा लेकिन नए अपडेट ने साफ कर दिया है कि यह संकट अब लंबी अवधि तक चलेगा. आइये जानते हैं कि कैसे.
ईरान के हमले से ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसान
ईरान के हालिया हमलों से कतर की प्रमुख ऊर्जा सुविधाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है. रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमलों के कारण भारी नुकसान हुआ. कतर एनर्जी के CEO साद अल-काबी के अनुसार, इन हमलों के कारण देश की करीब 17% LNG निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है. रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि इस नुकसान की मरम्मत में 3 से 5 साल तक लग सकते हैं, जिससे वैश्विक LNG सप्लाई में लंबे समय तक बाधा बनी रह सकती है. साद अल-काबी ने कहा,
“मैंने अपने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि कतर और इस क्षेत्र पर इस तरह का हमला होगा, खासकर एक भाई मुस्लिम देश द्वारा रमजान के महीने में इस तरह का हमला.”
भारत की ऊर्जा सप्लाई पर खतरा
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, भारत के लगभग 90% ईंधन आयात पश्चिम एशिया से होते हैं और देश की LNG जरूरत का करीब आधा हिस्सा कतर से पूरा होता है. ऐसे में कतर में किसी भी तरह की सप्लाई बाधा का सीधा असर भारत पर पड़ सकता है. सरकार ने गुरुवार को कहा कि भारत अपने गैस आयात के स्रोतों को विविध (डाइवर्सिफाई) कर रहा है और अब अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया से LNG खरीद बढ़ा रहा है.
भारत को रोजाना लगभग 195 MMSCMD प्राकृतिक गैस की जरूरत होती है, जिसमें से आधा हिस्सा आयात किया जाता है.
आयातित गैस में से करीब 60 MMSCMD सप्लाई कतर से आती है.
यूरोप में गैस की कीमतों में 35% तक उछाल
इस खबर के बाद बाजार में तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिली. यूरोप में गैस की कीमतें 35% तक बढ़ गईं और कुछ समय के लिए युद्ध से पहले के स्तर के मुकाबले दोगुनी हो गईं. फॉरवर्ड मार्केट में भी कीमतें बढ़ गई हैं, जो इस बात का संकेत है कि यह केवल अल्पकालिक कमी नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में सप्लाई गैप का असर है. इस महीने की शुरुआत में कतर ने हमलों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण LNG निर्यात रोक दिया था. उस समय वैश्विक LNG सप्लाई का करीब 20% हिस्सा प्रभावित हुआ था लेकिन अब स्थिति और गंभीर हो गई है.
एशिया पर सबसे ज्यादा असर
जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देश कतर से LNG के बड़े खरीदार हैं और सबसे पहले इस संकट का असर इन्हीं पर पड़ेगा. वहीं यूरोप, जो सर्दियों के बाद पहले ही कम स्टोरेज के साथ जूझ रहा है, उसे अगली सर्दियों से पहले स्टॉक भरने के लिए स्पॉट मार्केट में ज्यादा कंपटीशन करना पड़ेगा.
LNG बाजार की उम्मीदों को झटका
इस साल LNG बाजार में सप्लाई बढ़ने की उम्मीद थी, खासकर अमेरिका से नई सप्लाई आने के कारण, लेकिन अब यह अनुमान पूरी तरह बदल गया है. वैश्विक LNG सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा कई वर्षों के लिए खत्म हो गया है, जबकि मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है.
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