Jet Fuel Price Surge: जेट फ्यूल महंगा होने से बढ़ सकते हैं फ्लाइट टिकट के दाम, गर्मियों की यात्रा पड़ सकती है महंगी

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक तेल सप्लाई में रुकावट के वजह से जेट फ्यूल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. इसका सीधा असर एयरलाइंस की लागत पर पड़ रहा है, जिससे आने वाले समय में फ्लाइट टिकट महंगे हो सकते हैं. खासतौर पर लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है, क्योंकि इनमें ईंधन की खपत अधिक होती है.

जेट फ्यूल कीमत बढ़ी Image Credit: FreePik

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब सिर्फ तेल बाजार या गैस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर हवाई यात्रा पर भी दिखने लगा है. वैश्विक तेल सप्लाई में बाधा आने से जेट फ्यूल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, और इसका सीधा असर एयरलाइंस की लागत पर पड़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईंधन महंगा होता रहा तो आने वाले समय में यात्रियों को फ्लाइट टिकट के लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं. खासतौर पर गर्मियों की छुट्टियों के दौरान, जब हवाई यात्रा की मांग बढ़ जाती है, तब इसका असर और ज्यादा महसूस हो सकता है.

क्यों महंगा हो रहा है जेट फ्यूल

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से तेल की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो रही है. फारस की खाड़ी में जहाजों पर हमले और तेल ढांचों को निशाना बनाए जाने से कई देशों की तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है.

इस तनाव का सबसे बड़ा असर Strait of Hormuz पर पड़ा है. यह दुनिया का एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के करीब एक-पांचवां हिस्सा कच्चे तेल की सप्लाई गुजरती है. यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है.

तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर जेट फ्यूल पर भी पड़ा है. आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में जेट फ्यूल की औसत कीमत करीब 3.99 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जो युद्ध शुरू होने से पहले लगभग 2.50 डॉलर प्रति गैलन थी.

फ्लाइट टिकट क्यों हो सकते हैं महंगे

जेट फ्यूल एयरलाइंस के खर्च का बड़ा हिस्सा होता है. उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी एयरलाइन की कुल लागत में 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा ईंधन का होता है. इसलिए अगर जेट फ्यूल महंगा होता है तो एयरलाइंस के लिए ऑपरेशन चलाना भी महंगा हो जाता है. इसी वजह से विशेषज्ञ मानते हैं कि एयरलाइंस आखिरकार इस बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा यात्रियों पर डाल सकती हैं. इसका मतलब है कि आने वाले समय में हवाई टिकट के दाम बढ़ सकते हैं.

किन उड़ानों पर पड़ेगा ज्यादा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि जेट फ्यूल की कीमत बढ़ने का असर सबसे ज्यादा लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ सकता है. इसकी वजह यह है कि इन उड़ानों में ईंधन की खपत ज्यादा होती है. इसके अलावा पश्चिम एशिया के कई इलाकों में एयरस्पेस बंद होने से एयरलाइंस को कई बार लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है. इससे उड़ान का समय और ईंधन खर्च दोनों बढ़ जाते हैं.

यात्रियों के लिए क्या है सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप आने वाले महीनों में यात्रा की योजना बना रहे हैं तो टिकट जल्दी बुक करना बेहतर हो सकता है. जल्दी बुकिंग करने से यात्रियों को कम कीमत में टिकट मिल सकता है, क्योंकि बाद में एयरलाइंस कीमतें बढ़ा सकती हैं. इसके अलावा यात्रियों को तारीख और एयरपोर्ट के मामले में थोड़ा लचीला रहना चाहिए और किराये पर नजर रखने के लिए फेयर अलर्ट का इस्तेमाल करना चाहिए.

यह भी पढ़ें: पैनिक बाइंग की जरूरत नहीं! 40,000 टन LPG लेकर Shivalik टैंकर होर्मुज स्ट्रेट के पार, दो दिन में भारत पहुंचेगा जहाज

कई एयरलाइंस ने लगाया फ्यूल सरचार्ज

दुनिया की कई एयरलाइंस ने बढ़ती लागत को देखते हुए टिकट पर फ्यूल सरचार्ज लगाना शुरू कर दिया है.

हांगकांग की एयरलाइन कैथे पैसिफिक ने जेट फ्यूल की कीमत बढ़ने के बाद फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने की घोषणा की है. वहीं एयर फ्रांस-केएलएम ने कहा है कि लंबी दूरी की उड़ानों में टिकट की कीमत करीब 50 यूरो तक बढ़ सकती है. इसी तरह एयर इंडिया ने भी कुछ अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर फ्यूल सरचार्ज लागू किया है, जो यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जाने वाली फ्लाइट्स में 50 डॉलर तक बढ़ सकता है.

Latest Stories