मोदी सरकार का नया फोकस ‘अष्टलक्ष्मी’, जानें कैसे बन रहा है ग्रोथ का इंजन, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया रोड मैप
उत्तर-पूर्व 10–13% की तेज ग्रोथ के साथ भारत का नया 'ग्रोथ इंजन' बन रहा है, जिसे सरकार ने 'अष्टलक्ष्मी' का दर्जा दिया है. सड़क, रेल, एयरपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी में बड़े निवेश से क्षेत्र तेजी से मुख्यधारा और वैश्विक व्यापार से जुड़ रहा है. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस विकास को ऐतिहासिक बताया.
Jyotiraditya Scindia in WITT 2026: कभी देश के विकास मानचित्र में हाशिए पर माने जाने वाले उत्तर-पूर्वी राज्य आज तेजी से भारत के आर्थिक विकास का केंद्र बन रहे हैं. सड़क से लेकर एयरपोर्ट जैसी तमाम सुविधाओं के होने और साक्षारता दर बढ़ने से राज्य का तेजी से विकास हुआ है. यही वजह है कि केंद्र सरकार ने इस पूरे क्षेत्र को ‘अष्टलक्ष्मी’ का दर्जा दिया है. इसका मतलब समृद्धि और विकास के आठ स्तंभ से है. भारत में उत्तर पूर्व की इस महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में केंद्रीय संचार मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री (DoNER) ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नई दिल्ली में आयोजित TV9 नेटवर्क के WITT Summit 2026 में बताया.
तेज विकास दर ने चौंकाया
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य ने कहा कि पिछले एक दशक में उत्तर-पूर्व में जो बदलाव आया है, वह अभूतपूर्व है. जिन राज्यों को पहले कनेक्टिविटी, निवेश और बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता था, वहीं अब विकास की नई कहानी लिखी जा रही है. सबसे बड़ी बात यह है कि जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था 2 से 3 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है और भारत की औसत विकास दर 7 से 8 प्रतिशत है, वहीं उत्तर-पूर्व के कई राज्य 10 से 13 प्रतिशत की तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं. यही कारण है कि इस क्षेत्र को अब “भारत का ग्रोथ इंजन” कहा जा रहा है.
मुख्यधारा से जुड़े दूर-दराज के इलाके
टीवी9 नेटवर्क के कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. पिछले 12 वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्गों में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और करीब 10 हजार किलोमीटर नई सड़कें जोड़ी गई हैं. इसके साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लगभग 45 हजार किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया है, जिससे दूर-दराज के गांव भी मुख्यधारा से जुड़ने लगे हैं.
कनेक्टिविटी हुई बेहतर
- हवाई कनेक्टिविटी में भी क्रांतिकारी सुधार हुआ है. 2014 में जहां इस क्षेत्र में केवल 9 एयरपोर्ट थे, अब उनकी संख्या बढ़कर 17 हो चुकी है. अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे राज्य, जहां पहले एक भी एयरपोर्ट नहीं था, अब वहां कई हवाई अड्डे संचालित हो रहे हैं. कई एयरफोर्स के एडवांस लैंडिंग ग्राउंड को भी नागरिक उपयोग के लिए विकसित किया गया है.
- रेलवे नेटवर्क भी तेजी से विस्तार कर रहा है. पहले केवल एक राज्य की राजधानी रेल से जुड़ी थी, लेकिन अब चार राजधानियां कनेक्ट हो चुकी हैं. सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2027 तक सभी सातों राज्य की राजधानियों को रेल नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा. इसके लिए करीब 80 हजार करोड़ रुपये की लागत से 18 बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है. इसमें बोगीबील ब्रिज और भूपेन हजारिका ब्रिज जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शामिल हैं.
- उत्तर-पूर्व को केवल आंतरिक रूप से ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जोड़ने की योजना बनाई गई है. कालादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट प्रोजेक्ट और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय हाईवे के जरिए इस क्षेत्र को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ा जा रहा है. इसका उद्देश्य उत्तर-पूर्व को भारत के लिए ही नहीं, बल्कि एशिया और यूरोप के बीच एक अहम व्यापारिक गलियारा बनाना है.
युवा है असली ताकत
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि करीब 4.5 करोड़ की आबादी वाले इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत इसकी युवा जनसंख्या है. लगभग 70 प्रतिशत आबादी 30 वर्ष से कम उम्र की है और साक्षरता दर 90 से 93 प्रतिशत के बीच है. यह “डेमोग्राफिक डिविडेंड” उत्तर-पूर्व को आने वाले समय में आर्थिक शक्ति बनाने की क्षमता रखता है.
यह भी पढ़ें: पतंजलि बनेगी दुनिया की सबसे बड़ी FMCG ब्रांड, बाबा रामदेव का बड़ा दावा, स्वदेशी से भारत बनेगा आत्मनिर्भर
विपक्ष पर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस दौरान विपक्ष पर भी जमकर निशाना साधा. उन्होंने संसद की कार्यवाही में विपक्ष के बाधा डालने की बात कही. उन्होंने कहा संसद एक ऐसा मंच है जहां सरकार अपनी नीतियां और योजनाएं पेश करती है, और विपक्ष उन पर प्रतिक्रिया देता है, लेकिन अगर विपक्ष का उद्देश्य चर्चा करना न होकर केवल संसद की कार्यवाही को बाधित करना हो, तो सरकार के पास सीमित विकल्प रह जाते हैं. टीवी9 के प्रोग्राम में बोलते वक्त केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी को भी आड़े हाथों लिया. उन्होंने राहुल गांधी के उस दावे को खारिज किया जिसमें आरोप लगाया गया कि उन्हें बोलने का अवसर नहीं मिलता. इस पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संसद में समय पार्टी की संख्या के अनुसार दिया जाता है. कांग्रेस को उनके हिस्से से दोगुना समय दिया गया, फिर भी उन्होंने बोलना नहीं चुना. साथ ही पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस पार्टी से कई नेता बाहर गए हैं और बहुत कम लोग उसमें शामिल हुए हैं, जिससे पार्टी कमजोर हुई है. इसका कारण वे मानव संसाधन पर ध्यान न देना मानते हैं.
