5 रुपए की चिप्स के लिए PepsiCo को देना पड़ा ₹8000 का जुर्माना, कोर्ट ने ऐसे दिया ग्राहक के हक में फैसला
जयपुर के जिला उपभोक्ता आयोग ने 5 रुपये के लेज चिप्स के पैकेट में कम वजन मिलने की शिकायत पर PepsiCo India Holdings को 8000 रुपये मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है. ग्राहक का आरोप था कि 15 ग्राम के पैकेट में सिर्फ 4 ग्राम चिप्स मिले. कंपनी को पैकेट की कीमत 6 फीसदी सालाना ब्याज के साथ लौटाने का भी निर्देश दिया गया है.
Highlights
- 15 ग्राम के बताए गए लेज पैकेट में सिर्फ 4 ग्राम चिप्स मिलने का आरोप था.
- PepsiCo को 5000 रुपये मुआवजा और 3000 रुपये मुकदमे का खर्च देना होगा.
- पैकेट की 5 रुपये की कीमत भी 6 फीसदी सालाना ब्याज के साथ लौटानी होगी.
5 रुपये के लेज चिप्स के पैकेट में 15 ग्राम के बजाय सिर्फ 4 ग्राम चिप्स मिलने की शिकायत पर जयपुर के जिला उपभोक्ता आयोग ने PepsiCo India Holdings Pvt Ltd को ग्राहक को 8000 रुपये देने का आदेश दिया है. इसमें 5000 रुपये मानसिक परेशानी के मुआवजे और 3000 रुपये मुकदमे के खर्च के तौर पर देने होंगे. इसके अलावा कंपनी को पैकेट की कीमत 5 रुपये भी 6 फीसदी सालाना ब्याज के साथ लौटानी होगी.
इसकी शिकायत चांद्रमण जालान ने दर्ज कराई थी, जो Jalan Building and Hardware Store के मालिक हैं. आयोग ने कंपनी को आदेश का पालन करने के लिए एक महीने का समय दिया है.
5 रुपये के चिप्स के पैकेट में सिर्फ 4 ग्राम वजन मिलने की शिकायत
शिकायत के मुताबिक, चांद्रमण जालान ने 10 नवंबर 2020 को Metro Cash & Carry से कई तरह के खाने की चीजें खरीदे थे. उन्हें ये सामान अपने घर आए मेहमानों को खिलाना था. इसी खरीदारी में PepsiCo India Holdings का बनाया 5 रुपये का Lay’s चिप्स का पैकेट भी शामिल था. खरीदारी बिल नंबर 4504/102009356 में दर्ज थी.
जालान ने जब मेहमानों को चिप्स परोसने के लिए पैकेट खोला, तो उन्हें वह काफी हल्का लगा. इसके बाद उन्होंने पैकेट में रखे चिप्स का वजन किया. उनका आरोप था कि 15 ग्राम लिखे पैकेट में सिर्फ 4 ग्राम चिप्स निकले.
सबसे पहले उन्होंने इसकी शिकायत दुकानदार से की, लेकिन उनकी शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद 6 अप्रैल 2022 को उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया. शिकायत में उन्होंने सेवा में कमी और गलत व्यापारिक तरीके अपनाने का आरोप लगाया.
दुकानदार को क्यों मिली राहत?
मामले की सुनवाई के दौरान Metro Cash & Carry ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसने ग्राहक को सामान उसकी मूल पैकिंग में ही बेचा था. पैकेट में चिप्स की मात्रा कम होने की जिम्मेदारी उसकी नहीं, बल्कि निर्माता की है. आयोग ने खरीदारी के बिल, हलफनामों और दूसरे दस्तावेजों की जांच की. उसने पाया कि दुकानदार ने न तो चिप्स बनाए थे और न ही पैकेट की मूल पैकिंग के साथ छेड़छाड़ की थी.
आयोग ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर पाए, जिससे दुकानदार की ओर से सेवा में अलग से कोई कमी साबित हो सके. इसी आधार पर Metro Cash & Carry के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी गई. आयोग ने पैकेट में कथित तौर पर कम वजन मिलने की जिम्मेदारी निर्माता कंपनी पर तय की.
सुनवाई में पेश नहीं हुई PepsiCo
आयोग के आदेश के मुताबिक, नोटिस मिलने के बावजूद PepsiCo India Holdings सुनवाई के दौरान पेश नहीं हुई. इसके बाद 22 जुलाई 2022 को कंपनी के खिलाफ उसकी गैरमौजूदगी में कार्रवाई शुरू की गई. कंपनी ने 10 अक्टूबर 2023 को अपने वकील अंकित सेठी के जरिए इस कार्रवाई को कैंसिल करने की अर्जी दी. हालांकि, आयोग ने 8 नवंबर 2023 को उसकी अर्जी खारिज कर दी.
इसके बाद आयोग ने PepsiCo के खिलाफ शिकायत स्वीकार कर ली, जबकि Metro Cash & Carry के खिलाफ मामला खारिज कर दिया.
PepsiCo को कितना पैसा देना होगा?
जयपुर के जिला उपभोक्ता आयोग ने 17 सितंबर 2026 के आदेश में PepsiCo को ये पेमेंट करने का निर्देश दिया है:
5 रुपये: चिप्स के पैकेट की कीमत वापस करनी होगी.
5000 रुपये: ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी के मुआवजे के तौर पर देने होंगे.
3000 रुपये: मुकदमे के खर्च के तौर पर देने होंगे.
इसके अलावा आयोग ने पैकेट की कीमत के 5 रुपये पर 6 फीसदी सालाना ब्याज देने का भी आदेश दिया है. ब्याज की गणना 6 अप्रैल 2022 से पेमेंट होने तक की जाएगी. कंपनी को आदेश का पालन करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है. अगर वह तय समय में 8000 रुपये का मुआवजा और मुकदमे का खर्च नहीं देती है, तो इस रकम पर भी 17 सितंबर 2026 से भुगतान होने तक 6 फीसदी सालाना ब्याज देना होगा.
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