IDBI Bank Disinvestment: हिस्सेदारी बिक्री पर वित्त मंत्रालय की सफाई, कहा- ₹3917 करोड़ बढ़ी डील की वैल्यू
IDBI Bank की हिस्सेदारी बिक्री को लेकर वित्त मंत्रालय ने प्रक्रिया पर सफाई दी है. मंत्रालय के मुताबिक, बैंक की स्ट्रैटेजिक सेल्स में इस्तेमाल की गई पूरी वैल्यूएशन प्रक्रिया की समीक्षा डिसइनवेस्टमें पर सचिवों के मुख्य समूह यानी CGD ने की थी. सरकार ने कहा कि रिजर्व प्राइस में न तो कटौती की गई और न ही इसे बढ़ाया गया. Fairfax Financial Holdings को 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी मिली है.
Highlights
- Fairfax Financial Holdings को IDBI Bank की 60.72 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए मंजूरी मिली है.
- सौदे की कुल वैल्यू 52878 करोड़ रुपये है और Fairfax ने 81 रुपये प्रति शेयर की बोली लगाई.
- संभावित टैक्स देनदारी 627 करोड़ रुपये थी, जबकि बोली से डील की वैल्यू 3917 करोड़ रुपये बढ़ी.
IDBI Bank की हिस्सेदारी बिक्री को लेकर वित्त मंत्रालय ने प्रक्रिया पर उठने वाले सवालों के बीच सफाई दी है. मंत्रालय के कहा कि बैंक की स्ट्रैटेजिक सेल्स में इस्तेमाल की गई पूरी वैल्यूएशन प्रक्रिया की डिसइनवेस्टमेंट रिविव पर सचिवों के मुख्य समूह यानी CGD ने की थी. सरकार ने साफ किया कि रिजर्व प्राइस में न तो कोई कटौती की गई और न ही इसे बढ़ाया गया. इस सौदे के तहत Fairfax Financial Holdings को IDBI Bank की 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी दी गई है. इस डील की वैल्यू 52878 करोड़ रुपये आंकी गई है.
CGD ने तय की दूसरे दौर की प्रक्रिया
वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को IDBI Bank की स्ट्रैटेजिक सेल्स की प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण जारी किया. इसमें कहा गया कि आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति यानी CCEA ने CGD को डिसइनवेस्टमें से जुड़े सौदों को प्रभावी तरीके से पूरा करने के लिए जरूरी प्रक्रिया दिक्कतें दूर करने का अधिकार दिया था.
मंत्रालय के मुताबिक, इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए CGD ने दूसरे दौर में या बेस्ट ऑफर के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया खुद तय की. सरकार ने कहा कि शुरुआती बोलियों को मंजूरी नहीं मिलने के बाद पहला दौर समाप्त हो गया था. इसके बाद योग्य बिडर से उनके बेस्ट ऑफर वाली सीलबंद बोलियां मंगाई गईं.
शुरुआती बोलियां रिजर्व प्राइस से कम थीं
IDBI Bank की स्ट्रैटेजिक सेल्स के लिए शुरुआती बोलियां वित्त वर्ष 2025-26 में आमंत्रित की गई थीं. मंत्रालय के अनुसार, इन बोलियों की कीमत उस समय तय रिजर्व प्राइस से कम थी, इसलिए उन्हें मंजूरी नहीं दी गई.
इसके बाद वित्त वर्ष 2026-27 में योग्य बिडर से बेस्ट ऑफर मांगे गए. मंत्रालय ने बताया कि शुरुआती दौर में डिसइनवेस्टमें विभाग यानी DIPAM ने अपनी लंबे समय से चली आ रही आंतरिक प्रक्रियाओं के आधार पर काम किया था.
₹52878 करोड़ में 60.72 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री
सरकार ने इसी महीने IDBI Bank की स्ट्रैटेजिक सेल्स के लिए Fairfax Financial Holdings को खरीदार के रूप में मंजूरी दी थी. इस सौदे में कुल 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेची जानी है. इसमें केंद्र सरकार की 30.48 फीसदी और भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC की 30.24 फीसदी हिस्सेदारी शामिल है.
सरकार के मुताबिक, Fairfax ने प्रति शेयर 81 रुपये की बोली लगाई, जो बेंचमार्क प्राइस और दो इंडिपेंडेंट वैल्यूएशन एजेंसियों के उचित वैल्यू के अनुमानों से अधिक थी. 14 अक्टूबर को सरकार ने बताया था कि यह बोली निर्धारित मानकों से ऊपर रही.
संभावित देनदारी से ₹3917 करोड़ बढ़ी वैल्यू
मंत्रालय ने बताया कि वैल्यूएशन एजेंसी ने विवादित टैक्स मांगों को भी ध्यान में रखा था. योग्य बिडर की मांग पर इन टैक्स मांगों के लिए प्रोविजन ऑफ कंपनसेशन शामिल किया गया, ताकि बोली की पेशकश बेहतर हो सके. इसमें संभावित देनदारी केवल 627 करोड़ रुपये थी, जबकि इससे सौदे की बोली में 3,917 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई. मंत्रालय ने कहा कि यह एक कम संभावना वाली स्थिति है और इससे सरकार के राजस्व पर कोई शुद्ध असर नहीं पड़ेगा.
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