ड्रेस कोड पर घिरी Lenskart! बिंदी-कलावे पर रोक, लेकिन हिजाब को छूट से बवाल, CEO पीयूष बंसल को देनी पड़ी सफाई

Lenskart ड्रेस कोड विवाद में घिर गई, जहां बिंदी-तिलक और कलावा पर रोक तथा हिजाब को छूट के दावे से बवाल मच गया. पीयूष बंसल ने बवाल बढ़ता देख इस पर सफाई दी है. हालांकि कंपनी का बिजनेस तेजी से ग्रोथ कर रहा है.

Lenskart Founder Piyush Bansal Image Credit: Canva/ Money9

Lenskart Bindi-Hijab Dispute: पॉपुलर आईवियर कंपनी Lenskart इन दिनों एक बड़े विवाद में घिर गई है. सोशल मीडिया पर ड्रेस कोड को लेकर एक डॉक्यूमेंट वायरल हुआ है, जिसमें दावा किया गया कि कंपनी ने बिंदी, तिलक और कलावे जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाई है, जबकि हिजाब पर छूट दी गई है. इस खबर के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और लोगों ने कंपनी की नीतियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. हालांकि विवाद बढ़ता देख कंपनी के सीईओ को इस मामले पर सफाई देनी पड़ी.

क्‍या है मामला?

वायरल डॉक्यूमेंट में कहा गया कि अगर सिंदूर लगाया जाए तो वह बहुत हल्का होना चाहिए और माथे पर न गिरे. साथ ही बिंदी पहनने की अनुमति नहीं होने की बात कही गई थी. वहीं हिजाब को लेकर भी कुछ नियम बताए गए थे, जैसे उसका रंग काला होना चाहिए और वह कंपनी के लोगो को कवर नहीं करे. इसके अलावा कलावा जैसे धार्मिक धागों को हटाने की बात भी सामने आई. इस पर शेफाली वैद्य नाम की एक महिला, जो पेशे से एक लेखक हैं, उन्‍हें लेंसकार्ट के सीईओ से इस मसले पर जवाब मांगा. उन्‍होंने अपने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर लिखा, पीयूष बंसल जी, कृपया यह स्पष्ट करें कि यह पॉलिसी डॉक्यूमेंट आखिर किस तरह “गलत” है. मैंने एक स्क्रीनशॉट साझा किया है, जिसमें साफ लिखा है कि “हिजाब की अनुमति है, लेकिन बिंदी और कलावा नहीं”. यह स्पष्ट रूप से धार्मिक असमानता दिखाता है. कृपया आज की तारीख के अनुसार Lenskart की वर्तमान गाइडलाइंस सार्वजनिक करें, ताकि सभी को साफ पता चल सके कि कंपनी की असली पॉलिसी क्या है. आपका बयान फिलहाल सिर्फ कमजोर डैमेज कंट्रोल जैसा लग रहा है, जैसा किसी वकील की सलाह पर दिया गया हो. माफ कीजिए, लेकिन यह संतोषजनक नहीं है.

सीईओ ने क्‍या दी सफाई?

जैसे ही यह मामला बढ़ा, लेंसकार्ट के सीईओ Peyush Bansal ने खुद सफाई दी. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यह डॉक्यूमेंट कंपनी की वर्तमान पॉलिसी को नहीं दर्शाता है. उन्होंने साफ किया कि Lenskart में किसी भी तरह के धार्मिक प्रतीकों पर कोई रोक नहीं है और कर्मचारी अपनी आस्था और संस्कृति के अनुसार पहनावा रख सकते हैं.

बंसल ने यह भी कहा कि कंपनी समय-समय पर अपनी नीतियों को अपडेट करती रहती है और यह मामला गलतफहमी के कारण सामने आया है. उन्होंने इस पूरे विवाद के लिए खेद भी जताया और कहा कि कंपनी में हजारों कर्मचारी हैं, जो अपनी संस्कृति और परंपराओं के साथ काम करते हैं.

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कंपनी का कामकाज

Lenskart एक आईवियर कंपनी है, जिसका बिजनेस भी तेजी से बढ़ रहा है. कंपनी, जिसने 2019 में यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल किया था, अब IPO की तैयारी में है और इसकी वैल्यू करीब 5.6 अरब डॉलर आंकी जा रही है. हाल ही में कंपनी के मुनाफे में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. दिसंबर तिमाही में इसका नेट प्रॉफिट करीब 70 गुना बढ़कर ₹1.31 अरब हो गया, जबकि रेवेन्यू में भी करीब 39% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. Lenskart तेजी से ग्रोथ कर रही है, मगर ड्रेस कोड विवाद ने कंपनी की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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