बीमार होना जेब पर पड़ेगा भारी! पेनकिलर, एंटीबायोटिक समेत 900 दवाएं होंगी महंगी; जानें कितने बढ़ेंगे दाम  

देश में जरूरी दवाओं के दाम बढ़ने जा रहे हैं क्योंकि नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने 0.64% तक MRP बढ़ाने की अनुमति दी है. WPI बढ़ोतरी के आधार पर यह फैसला लिया गया है. इससे करीब 900 दवाएं प्रभावित होंगी, जिससे आम लोगों, खासकर मध्यम वर्ग पर खर्च का बोझ बढ़ सकता है.

दवाओं के दाम बढ़ेंगे Image Credit: Freepik

Essential Medicines Price Hike: आम आदमी के लिए इलाज अब और महंगा होने वाला है क्यों रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं के दाम बढ़ने की राह साफ हो गई है. नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने दवा कंपनियों को नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स में शामिल दवाओं के मैक्सिमम रिटेल प्राइस में 0.64 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की अनुमति दे दी हैं. ऐसे में पेनकिलर, एंटीबायोटिक्स और अन्य जरूरी दवाएं खरीदना अब पहले से ज्यादा महंगा पड़ सकता है.

होलसेल प्राइस इंडेक्स के आधार पर बढ़ेगी कीमत

नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी के मुताबिक, डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री ट्रेड (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) के आंकड़ों के अनुसार 2025 में होलसेल प्राइस इंडेक्स में 0.64956 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इसी आधार पर दवा कंपनियों को मैक्सिमम रिटेल प्राइस बढ़ाने की छूट दी गई है.

सरकारी मंजूरी के बिना बढ़ सकेंगे दाम

नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी के मुताबिक, ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के तहत कंपनियां अब बिना किसी पूर्व सरकारी मंजूरी के मैक्सिमम रिटेल प्राइस यानी MRP में बढ़ोतरी कर सक सकती हैं. शेड्यूल्ड फॉर्मुलेशन्स में वे दवाएं शामिल होती हैं जो नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स सूची में आती हैं, चाहे वे ब्रांडेड हों या जेनेरिक.

900 जरूरी दवाएं होंगी प्रभावित

इस फैसले का असर नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स में शामिल करीब 900 दवाओं पर पड़ेगा. इनमें पेनकिलर, एंटीबायोटिक्स और क्रॉनिक बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं. बढ़ती लागत और पश्चिम एशिया संकट के बीच यह फैसला दवा कंपनियों के लिए राहत, लेकिन आम जनता के लिए महंगाई बढ़ाने वाला साबित हो सकता है. दवाओं की कीमतों में यह बढ़ोतरी आम लोगों की जेब पर असर डालेगी. भारत में लाखों लोग रोजाना जरूरी दवाओं का इस्तेमाल करते हैं, ऐसे में गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है. हालांकि बढ़ोतरी सिर्फ 0.64 प्रतिशत है, जो पहली नजर में कम लगती है, लेकिन बड़ी संख्या में दवाओं पर लागू होने से कुल खर्च बढ़ सकता है.

यह बदलाव सिर्फ नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स में शामिल दवाओं पर लागू होगा. गैर-जरूरी या ब्रांडेड दवाओं की कीमतें बाजार के हिसाब से तय होती रहेंगी. कंपनियां बिना किसी सरकारी मंजूरी के नई कीमतें लागू कर सकेंगी.

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