सीजफायर के ऐलान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, 15% तक लुढ़की, ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के आया नीचे
Brent Crude और WTI Crude Oil की कीमतों में अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद बड़ी गिरावट आई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने से सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी, जिससे ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया. गिरती कीमतों से वैश्विक बाजार और तेल आयात करने वाले देशों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है.
Crude oil price drop: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते वैश्विक एनर्जी बाजार में हलचल मची हुई थी. कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं. मगर अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर समझौते के ऐलान से वैश्विक बाजार में बड़ी राहत मिली है. सीजफायर के ऐलान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 15 फीसदी तक की बड़ी गिरावट देखने को मिली है. तनाव के बाद ब्रेंट कूड 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया है.
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के लिए हुए इस समझौते के बाद 8 अप्रैल को Brent Crude करीब 15.19% टूटकर 92.67 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि WTI Crude Oil भी 15.02% गिरकर 96.03 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. हालांकि बाद में इसमें हल्की बढ़ोतरी हुई.

दोबारा खुलेगा होर्मुज
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज Strait of Hormuz को दोबारा खोले जाने का फैसला है. यह जलमार्ग दुनिया के करीब 20% तेल और LNG सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है. ईरान ने अस्थायी रूप से इसे खोलने पर सहमति दी है, जिससे तेल सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है.
क्या बनी सहमति?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि वह दो हफ्तों के लिए ईरान पर हमले को रोकेंगे. वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने बताया कि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी, हालांकि कुछ तकनीकी सीमाओं का ध्यान रखा जाएगा. इस सीजफायर में पाकिस्तान की अहम भूमिका रही, जिसने इस समझौते में मध्यस्थता की. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह समझौता लेबनान में इजराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच जारी तनाव को भी प्रभावित कर सकता है.
ऊर्जा बाजार में लौटेगी स्थिरता
अमेरिका-ईरान तनाव के चलते फरवरी के अंत से तेल बाजार में भारी उथल-पुथल थी. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने की आशंका से सप्लाई प्रभावित हो रही थी और कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं. अनुमान है कि अप्रैल में करीब 9 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादन प्रभावित हो सकता था. मगर सीजफायर और सप्लाई बहाल होने की उम्मीद से तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई है, जिससे वैश्विक बाजारों और तेल आयात करने वाले देशों को बड़ी राहत मिल सकती है. आने वाले दिनों में अगर यह समझौता कायम रहता है, तो ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौट सकती है.
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