Quad 2026: पेट्रोल-एनर्जी के लिए बनेगा क्वॉड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम, क्रिटिकल मिनरल पर नई साझेदारी

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन और समुद्री व्यापार को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. नई दिल्ली में हुई Quad विदेश मंत्रियों की बैठक में होर्मुज स्ट्रेट समेत महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा, पर जोर दिया गया.

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया एकजुट! Image Credit: Money9 Live

Quad Meeting Statement India: वैश्विक स्तर पर गहराते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल व गैस बाजारों में जारी भारी उथल-पुथल के बीच ‘क्वाड’ (Quad) देशों ने एक बेहद अहम और बड़ा कदम उठाया है. भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने मिलकर इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और सप्लाई चेन को टूटने से बचाने के लिए एक मेगा प्लान का ऐलान किया है.

नई दिल्ली में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में यह साफ कर दिया गया कि अब ऊर्जा बाजार में किसी भी तरह की मनमानी या बाधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस पूरी कवायद को जमीन पर उतारने के लिए एक विशेष ‘क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम’ (Quad Fuel Security Forum) के गठन की घोषणा की गई है, जो सीधे तौर पर हाई-लेवल चर्चाओं और देशों के बीच तालमेल को संभालेगा.

इन 4 मोर्चों पर मिलकर काम करेंगे क्वाड देश

बैठक की अध्यक्षता कर रहे भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सीधे शब्दों में कहा कि वैश्विक स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग, संसाधनों के सेंट्रलाइजेशन और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को दूर करने के लिए यह साझेदारी बेहद जरूरी हो चुकी है. इस साझा विजन के तहत चारों देश मुख्य रूप से इन मोर्चों पर काम करेंगे:

  • सप्लाई चेन और व्यापार की सुरक्षा: कच्चे तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के साथ-साथ फर्टिलाइजर जैसे जरूरी सामानों की सप्लाई चेन को पूरी तरह सुरक्षित और लचीला बनाया जाएगा.
  • समुद्री रास्तों की आजादी: होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्गों में जहाजों की आवाजाही को बिना किसी रुकावट के जारी रखा जाएगा. कमर्शियल जहाजों को रोकने वाले किसी भी प्रतिबंधात्मक कदम का कड़ा विरोध किया जाएगा.
  • रणनीतिक पेट्रोलियम सिस्टम: चारों देश मिलकर अपनी रणनीतिक पेट्रोलियम प्रणालियों (Strategic Petroleum Systems) को मजबूत करेंगे और संकट के समय एक-दूसरे की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इमरजेंसी रिस्पॉन्स एक्सरसाइज करेंगे.
  • फ्यूल सिक्योरिटी फोरम का गठन: यह फोरम पूरी एनर्जी वैल्यू चेन में तकनीक, नीति और इंटरनेशनल मार्केट एनालिसिस को लेकर हाई-लेवल कोऑर्डिनेशन का काम करेगा.

छोटे और विकासशील देशों को मिलेगा सहारा

इस साझा बयान में क्वाड देशों ने माना कि वैश्विक बाजारों की उथल-पुथल का सबसे बुरा असर इंडो-पैसिफिक के छोटे और विकासशील द्वीपीय देशों पर पड़ता है. इसके लिए बड़े वित्तीय और रणनीतिक कदमों का एलान किया गया है:

  • ऑस्ट्रेलिया की बड़ी मदद: ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण-पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा के लिए 2 अरब डॉलर के ‘साउथ ईस्ट एशिया इन्वेस्टमेंट फाइनेंसिंग फैसिलिटी’ का ऐलान किया है. इसके अलावा, आसियान पावर ग्रिड (ASEAN Power Grid) को भी सपोर्ट दिया जाएगा.
  • फिजी को सीधे बजटीय सहायता: प्रशांत महासागरीय देशों की मदद की कड़ी में अकेले फिजी को 30 मिलियन (3 करोड़) ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) की सीधी बजटीय सहायता दी जा रही है.
  • क्षेत्रीय पहल: इसके तहत जापान के ‘पॉवर एशिया’ (POWERR Asia) प्रोजेक्ट और दक्षिण एशिया में भारत के ऊर्जा सुरक्षा प्रयासों को और तेज किया जाएगा ताकि बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के समय भी बिजली और ईंधन की कमी न हो.

क्रिटिकल मिनरल्स: चीन के एकाधिकार को तोड़ने की तैयारी

ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ इस बैठक में सबसे बड़ा फोकस ‘क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव’ (Quad Critical Minerals Initiative) पर रहा. चारों देशों ने इस फ्रेमवर्क को आधिकारिक तौर पर लॉन्च करते हुए चीन के निर्यात प्रतिबंधों और मार्केट पर उसके एकाधिकार को लेकर गहरी चिंता जताई.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ किया कि इस फ्रेमवर्क के तहत चारों देश अपनी आर्थिक नीतियों और निवेश का इस्तेमाल कर क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ तत्व) की माइनिंग, प्रोसेसिंग और उनके रिसाइक्लिंग की सप्लाई चेन को मजबूत करेंगे. जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने भी खनिज निर्यात पर लगने वाले एकतरफा प्रतिबंधों पर चिंता जताई.

इस पहल का सीधा मकसद भविष्य की क्लीन एनर्जी और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए जरूरी इन खनिजों की सप्लाई को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म किया जा सके.

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इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी शामिल हुए. क्वाड का यह नया कदम चीन के बढ़ते दबदबे और वैश्विक ऊर्जा संकट, दोनों के खिलाफ एक मजबूत और टिकाऊ आर्थिक सुरक्षा कवच तैयार करने जैसा है.