7.7 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू, फिर भी CFO को 2020 से नहीं मिली सैलरी! Rajesh Exports पर ED के नए खुलासे

Rajesh Exports Limited एक बार फिर जांच एजेंसियों के रडार पर है. ED ने FEMA जांच के दौरान दावा किया है कि कंपनी के CFO को वर्ष 2020 से कोई सैलरी नहीं मिली, जबकि मैनेजिंग डायरेक्टर का मासिक वेतन केवल 17,000 रुपये था. एजेंसी ने 600 करोड़ रुपये के कथित शेयर मैनिपुलेशन, 3,000 करोड़ रुपये के फॉरेन ट्रेड सेट-ऑफ, विदेशी लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की कमी को लेकर भी सवाल उठाए हैं.

राजेश मेहता Image Credit: Money9 Live

Rajesh Exports: गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Rajesh Exports Limited (REL) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. SEBI की कार्रवाई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में भी कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं. ED ने कंपनी और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ FEMA के तहत बेंगलुरु और मुंबई में 9 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है. जांच के दौरान एजेंसी ने कंपनी की सैलरी स्ट्रक्चर, विदेशी लेनदेन, स्टॉक रिकॉर्ड और शेयर कारोबार को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं.

सबसे हैरान करने वाली बात कंपनी के टॉप मैनेजमेंट को मिलने वाले वेतन को लेकर सामने आई है. ED के अनुसार, Rajesh Exports के Chief Financial Officer (CFO) को वर्ष 2020 से कोई सैलरी नहीं मिली है, जबकि कंपनी के Managing Director (MD) को केवल 17,000 रुपये प्रतिमाह का वेतन दिया जा रहा था. यह तब है, जब कंपनी ने लगभग 7.7 लाख करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू रिपोर्ट किया है.

सैलरी स्ट्रक्चर पर ED को क्यों हुआ शक

ED का कहना है कि इतनी बड़ी कंपनी में CFO का वर्षों तक बिना सैलरी काम करना और MD का बेहद कम वेतन लेना सामान्य व्यावसायिक प्रथाओं से मेल नहीं खाता. एजेंसी के मुताबिक, यह स्थिति कंपनी की ऑपरेशनल और वित्तीय गतिविधियों की वास्तविकता को लेकर सवाल खड़े करती है. जांच एजेंसी का मानना है कि किसी भी बड़े कॉर्पोरेट समूह में टॉप मैनेजमेंट को बाजार मानकों के अनुरूप वेतन दिया जाता है. ऐसे में Rajesh Exports की सैलरी स्ट्रक्चर असामान्य दिखाई देती है.

600 करोड़ रुपये के शेयर मैनिपुलेशन की आशंका

ED ने कंपनी के शेयरों में हुई कुछ संदिग्ध Block Deals की भी जांच शुरू की है. एजेंसी के अनुसार, इन सौदों में शामिल कुछ व्यक्तियों के नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) के डेटा लीक में भी सामने आए हैं. प्रारंभिक जांच में एजेंसी को कुछ संभावित Offshore Links के संकेत मिले हैं. ED का आरोप है कि NRI बेनामी खातों के जरिए शेयर मैनिपुलेशन कर 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भारत से बाहर भेजी गई हो सकती है. हालांकि, इस मामले की जांच अभी जारी है.

विदेशी लेनदेन के रिकॉर्ड नहीं मिले

ED ने यह भी दावा किया है कि कंपनी कई विदेशी लेनदेन से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सकी. इनमें आयात, निर्यात, विदेशी निवेश और फॉरेन ट्रेड रिसीवेबल्स तथा पेएबल्स से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं. एजेंसी के मुताबिक, अफ्रीकी खदानों में कथित तौर पर किए गए 1,035 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दौरान उपलब्ध नहीं कराए गए. इससे इन निवेशों की वास्तविकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

3,000 करोड़ रुपये के सेट-ऑफ पर सवाल

ED ने करीब 3,000 करोड़ रुपये के फॉरेन ट्रेड रिसीवेबल्स और पेएबल्स के बीच किए गए सेट-ऑफ को भी जांच के दायरे में लिया है. एजेंसी का कहना है कि यूएई समेत विभिन्न देशों में स्थित पक्षों के साथ हुए इन लेनदेन की पारदर्शिता की जांच की जा रही है.

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