Rajesh Exports पर ED का बड़ा एक्शन! 9 जगहों पर छापेमारी; FEMA जांच में 3000 करोड़ रुपये के सेट-ऑफ पर सवाल
Rajesh Exports Limited पर ED ने FEMA जांच के तहत बेंगलुरु और मुंबई में 9 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया है. जांच एजेंसी ने करीब 3,000 करोड़ रुपये के फॉरेन ट्रेड रिसीवेबल्स और देनदारियों के सेट-ऑफ, 40 फीसदी स्टॉक गड़बड़ी, 1,035 करोड़ रुपये के कथित विदेशी निवेश से जुड़े दस्तावेजों की कमी और संभावित शेयर मैनिपुलेशन जैसे गंभीर मुद्दों को चिन्हित किया है.
Rajesh Exports: गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Rajesh Exports Limited (REL) की मुश्किलें बढ़ गई हैं. ED ने कंपनी से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है. ED के अनुसार, यह कार्रवाई 23 जून 2026 को शुरू की गई थी. जांच के दौरान एजेंसी को कई ऐसे तथ्य मिले हैं, जो FEMA के संभावित उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं. सबसे बड़ी चिंता करीब 3,000 करोड़ रुपये के फॉरेन ट्रेड रिसीवेबल्स और देनदारियों के बीच किए गए सेट-ऑफ को लेकर जताई गई है.
9 जगहों पर तलाशी
CNBCTV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Foreign Exchange Management Act (FEMA), 1999 के तहत कंपनी और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बेंगलुरु और मुंबई स्थित 9 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया है. जांच एजेंसी ने कंपनी के फॉरेन ट्रांजैक्शंस, स्टॉक रिकॉर्ड और शेयर कारोबार से जुड़े कई गंभीर सवाल उठाए हैं.
3,000 करोड़ रुपये के सेट-ऑफ पर सवाल
ED ने करीब 3,000 करोड़ रुपये की फॉरेन ट्रेड रिसीवेबल्स और देनदारियों के सेट-ऑफ को लेकर सवाल उठाए हैं. जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी यूएई समेत अन्य देशों में स्थित पक्षों के साथ देनदारियों और प्राप्तियों का समायोजन कर रही थी. अब एजेंसी इन लेनदेन की पारदर्शिता और वैधता की जांच कर रही है. जांच एजेंसी के मुताबिक, कंपनी कई फॉरेन ट्रेड ट्रांजैक्शंस से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सकी.
इनमें आयात, निर्यात, विदेशी निवेश और फॉरेन ट्रेड पेमेंट्स एवं रिसीवेबल्स से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं. ऐसे में इन लेनदेन की वास्तविकता की पुष्टि करना मुश्किल हो रहा है. ED ने उदाहरण देते हुए कहा कि अफ्रीकी खदानों में कथित तौर पर किए गए 1,035 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े समकालीन दस्तावेज और रिकॉर्ड न तो तलाशी के दौरान मिले और न ही कंपनी अब तक उन्हें उपलब्ध करा सकी है.
स्टॉक में 40 फीसदी तक का अंतर
जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा स्टॉक रिकॉर्ड को लेकर हुआ है. ED के अनुसार, कंपनी के कारखाने में मौजूद वास्तविक स्टॉक और फैक्ट्री रजिस्टर में दर्ज स्टॉक के बीच करीब 40 फीसदी का अंतर पाया गया है. एजेंसी का कहना है कि फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान यह विसंगति सामने आई, जिससे कंपनी की इन्वेंट्री रिपोर्टिंग और रिकॉर्ड-कीपिंग पर सवाल खड़े हो गए हैं.
शेयर मैनिपुलेशन और फॉरेन कनेक्शन की जांच
ED ने कुछ संदिग्ध ब्लॉक डील्स और संभावित शेयर मैनिपुलेशन की भी जांच शुरू की है. एजेंसी के मुताबिक, कुछ संबंधित व्यक्तियों के नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) के लीक दस्तावेजों में भी सामने आए हैं. जांच एजेंसी को आशंका है कि एनआरआई बेनामी खातों के जरिए शेयर मैनिपुलेशन कर 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भारत से बाहर भेजी गई हो सकती है. हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है.
शेयर में लगातार दबाव
इन घटनाक्रमों का असर कंपनी के शेयर पर भी देखने को मिला है. बुधवार को Rajesh Exports का शेयर 5 फीसदी लोअर सर्किट के साथ 102.85 रुपये पर बंद हुआ. पिछले कुछ सप्ताह से कंपनी का शेयर नियामकीय जांच और बढ़ती अनिश्चितताओं के कारण दबाव में बना हुआ है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ED और SEBI की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक निवेशकों की नजर कंपनी से जुड़े हर नए घटनाक्रम पर बनी रहेगी.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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