मिडिल ईस्ट टेंशन का दिखा सीधा असर, डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड लो पर पहुंचा रुपया
मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय करेंसी पर साफ दिखाई दे रहा है. बुधवार के शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 92.18 प्रति डॉलर तक पहुंच गया. इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमत 83 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से रुपये पर अतिरिक्त दबाव बना है.
Rupee record low: मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय करेंसी पर साफ दिखने लगा है. बुधवार के शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूत मांग और हाई क्रूड ऑयल प्राइस के कारण निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है. इसके चलते रुपये में तेज गिरावट दर्ज की गई. बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है.
शुरुआती कारोबार में रिकॉर्ड गिरावट
इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में बुधवार को रुपया 92.05 के स्तर पर खुला और शुरुआती कारोबार में गिरकर 92.18 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया. यह पिछले बंद स्तर के मुकाबले 69 पैसे की गिरावट है. इससे पहले 2 मार्च को रुपया 91.49 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. मंगलवार को होली के कारण फॉरेन एक्सचेंज मार्केट बंद था, इसलिए बुधवार को बाजार खुलते ही करेंसी पर दबाव देखने को मिला.
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव
फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक रुपये पर दबाव की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है. इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर करीब 83 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. मिडिल ईस्ट में ईरान संकट के कारण एनर्जी मार्केट में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है. भारत अपनी एनर्जी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनता है.
विदेशी निवेश की निकासी भी वजह
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इक्विटी मार्केट से विदेशी पूंजी की लगातार निकासी भी रुपये की कमजोरी का कारण बन रही है. एक्सचेंज डेटा के मुताबिक 2 मार्च को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब 3295 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. साथ ही निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ी है और रुपये पर दबाव और बढ़ गया है.
शेयर बाजार पर भी असर
करेंसी मार्केट में कमजोरी का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला. कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 1122 पॉइंट्स यानी 1.40 फीसद गिरकर 79,116.10 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी 50 में भी बड़ी कमजोरी देखी गई और यह 385 पॉइंट्स यानी 1.55 फीसद टूटकर 24,480.50 पर बंद हुआ.
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 1671 अंक गिरकर 78567 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी में करीब 502 अंकों की गिरावट दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और जियोपॉलिटिकल टेंशन कम नहीं होता है, तो रुपये और शेयर बाजार दोनों में अस्थिरता बनी रह सकती है.
यह भी पढ़ें: इजरायल-ईरान युद्ध का असर, Waaree, NTPC और Suzlon के शेयर लुढ़के
