भारत ने बढ़ाई रूस से तेल खरीद, मार्च में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है इंपोर्ट; जानें कौन है सबसे बड़ा खरीदार
भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात मार्च 2026 में तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच सकता है. Kpler के मुताबिक यह आंकड़ा करीब 1.61 मिलियन बैरल प्रति दिन तक जा सकता है. 18 मार्च तक भारत लगभग 29.9 मिलियन बैरल तेल आयात कर चुका है. यह फरवरी के मुकाबले 53 प्रतिशत अधिक हो सकता है. IOCL, Reliance, Nayara Energy और BPCL प्रमुख खरीदार हैं.
Russian Oil Imports: भारत ने मार्च 2026 में रूस से कच्चे तेल के इंपोर्ट में तेजी दिखाई है. शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक यह आयात तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच सकता है. समुद्री रास्ते से आने वाला रूसी तेल करीब 1.61 मिलियन बैरल प्रति दिन तक जा सकता है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित है, जिससे देरी भी हो रही है. इसके बावजूद भारत ने अपनी खरीद बढ़ाई है. यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
मार्च में आयात में तेज उछाल
Kpler के आंकड़ों के मुताबिक भारत का रूसी तेल आयात मार्च में तेजी से बढ़ा है. 18 मार्च तक करीब 29.9 मिलियन बैरल तेल भारत पहुंच चुका है. पूरे महीने के हिसाब से यह आंकड़ा 1.61 मिलियन बैरल प्रति दिन तक जा सकता है. अगर यही रफ्तार बनी रहती है तो फरवरी के मुकाबले इसमें 53 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है.
कौन हैं सबसे बड़े खरीदार
मार्च में भारत की प्रमुख तेल कंपनियां रूसी तेल की सबसे बड़ी खरीदार बनी हैं. इसमें IOCL ने करीब 8 मिलियन बैरल तेल खरीदा है. इसके बाद Reliance ने 6 मिलियन बैरल और Nayara Energy ने 5 मिलियन बैरल आयात किया है. BPCL ने भी करीब 4 मिलियन बैरल तेल खरीदा है. इन कंपनियों की भूमिका भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम है.
पिछले महीनों में कैसी रही स्थिति
साल 2026 की शुरुआत में रूस से तेल आयात में कमी देखी गई थी. दिसंबर 2025 में यह 1.21 मिलियन बैरल प्रति दिन था. जनवरी में यह घटकर 1.05 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया. फरवरी में भी यही स्तर बना रहा. ऐसे में मार्च का उछाल पिछले ट्रेंड के मुकाबले बड़ा बदलाव दिखाता है.
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क्या और बढ़ सकता है आयात
Kpler के अनुमान के मुताबिक मार्च में आयात 1.88 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुंच सकता है. हालांकि इसके लिए महीने के बाकी दिनों में डिलीवरी बढ़नी जरूरी है. यह भी संभव है कि कुछ देरी से आने वाले कार्गो एक साथ पहुंच रहे हों. महीने के अंत में ही साफ तस्वीर सामने आएगी.
वैश्विक दबाव और भारत का रुख
रूस यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस का प्रमुख तेल खरीदार बन गया है. पश्चिमी देशों ने रूस से खरीद कम कर दी है, जिससे भारत की भूमिका बढ़ी है. अमेरिका और यूरोप भारत पर निर्भरता कम करने का दबाव बना रहे हैं. इसके बावजूद भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अपनी खरीद जारी रखी है.
