कितनी गहराई पर मिलता है कच्चा तेल? जानें जमीन और समुद्र दोनों में कहां कम करनी पड़ती है ड्रिलिंग

दुनिया भर में तेल की कीमतों में आग लगी हुई है और इसकी वजह है पश्चिम एशिया का बढ़ता तनाव. ईरान के हमले के बाद ग्लोबल मार्केट हिल गया है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस तेल के लिए इतना संघर्ष हो रहा है, वो आखिर जमीन के कितने नीचे छिपा होता है?

कितने गहराई पर मिलता है कच्चा तेल Image Credit: AI

दुनिया भर में तेल की कीमतों में आग लगी हुई है और इसकी वजह है पश्चिम एशिया का बढ़ता तनाव. ईरान के हमले के बाद ग्लोबल मार्केट हिल गया है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस तेल के लिए इतना संघर्ष हो रहा है, वो आखिर जमीन के कितने नीचे छिपा होता है. आइए जानते हैं.

तेल निकालने में ऑनशोर और ऑफशोर ड्रिलिंग तकनीक क्या है?

ऑनशोर (Onshore) और ऑफशोर (Offshore) ड्रिलिंग तेल और गैस निकालने की दो मुख्य तकनीकें हैं. ऑनशोर ड्रिलिंग जमीन यानी धरती पर की जाती है, जो सस्ती और आसान होती है. वहीं, ऑफशोर ड्रिलिंग समुद्र या पानी के भीतर, तैरते हुए रिग्स (rigs) के जरिए होती है, जो बहुत जटिल और महंगी प्रक्रिया है.

कैसे बनता है जमीन के नीचे तेल?

तेल कोई एक-दो साल में नहीं बनता, बल्कि इसे बनने में करोड़ों साल लगते हैं. जब समुद्री जीव-जंतु और पौधे मिट्टी और चट्टानों के नीचे दब जाते हैं, तो समय के साथ उन पर गर्मी और दबाव का असर होता है. इसी प्रक्रिया में ये कच्चे तेल (Crude Oil) में बदल जाते हैं. यह तेल जमीन के नीचे “रिजर्वॉयर” यानी छिद्रयुक्त चट्टानों में जमा हो जाता है. इसके ऊपर एक कठोर परत होती है, जो तेल को बाहर निकलने से रोकती है. इसे ही ऑयल ट्रैप कहा जाता है.

जमीन के अंदर कितनी गहराई पर मिलता है तेल?

अमेरिका की BOP कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल की गहराई हर जगह अलग-अलग होती है, लेकिन आमतौर पर यह 1,000 से 20,000 फीट (लगभग 300 से 6,000 मीटर) की गहराई पर मिलता है. कुछ जगहों पर यह इससे भी ज्यादा गहराई में होता है. इसका मतलब यह है कि तेल निकालना आसान काम नहीं है. इसके लिए भारी मशीनें, आधुनिक तकनीक और लंबा समय लगता है.

समुद्र में कितनी गहराई पर मिलता है तेल ?

समुद्र में तेल निकालने की प्रक्रिया को ऑफशोर ड्रिलिंग (Offshore Drilling) कहा जाता है और यह जमीन की तुलना में कहीं ज्यादा मुश्किल और महंगी होती है. आसान भाषा में समझें तो समुद्र में तेल निकालने के लिए पहले पानी के अंदर जाना पड़ता है और उसके बाद समुद्र की तलहटी (seabed) के नीचे कई हजार फीट तक ड्रिलिंग की जाती है.

समुद्र में तेल की गहराई को आमतौर पर दो हिस्सों में समझा जाता है. पहला है कम गहराई वाला समुद्र). इसमें ड्रिलिंग करीब 10,000 से 15,000 फीट तक की जाती है. दूसरा है गहरा समुद्र. यहां तेल तक पहुंचने के लिए 20,000 फीट या उससे ज्यादा गहराई तक ड्रिलिंग करनी पड़ती है.

दुनिया के सबसे गहरे तेल के कुएं

दुनिया में कुछ तेल के कुएं ऐसे हैं, जो अपनी जबरदस्त गहराई की वजह से इंजीनियरिंग का बेहतरीन उदाहरण माने जाते हैं. ये कुएं बताते हैं कि इंसान अब जमीन के बेहद गहरे हिस्सों तक पहुंच चुका है.

रूस के सखालिन द्वीप के पास स्थित Z-44 Chayvo Well दुनिया के सबसे गहरे तेल कुओं में शामिल है. इसकी गहराई 40,000 फीट से भी ज्यादा है.

इसी तरह, गल्प ऑफ मैक्सिको में स्थित Tiber Oil Field भी बेहद गहरा है. यहां ड्रिलिंग 35,000 फीट से ज्यादा तक की गई है, जो समुद्र के नीचे तेल निकालने की चुनौती को दर्शाता है.

वहीं, अमेरिका का Bertha Rogers Well भी काफी समय तक सबसे गहरे कुओं में गिना जाता रहा. इसकी गहराई 31,441 फीट तक पहुंची थी. हालांकि, बेहद कठिन परिस्थितियों के कारण इस कुएं को पूरी तरह विकसित नहीं किया जा सका

तेल निकालना इतना मुश्किल क्यों है?

तेल की गहराई जितनी ज्यादा होती है, उतना ही काम मुश्किल और जोखिम भरा हो जाता है.

  • जमीन के अंदर बहुत ज्यादा दबाव होता है.
  • तापमान बहुत ऊंचा होता है.
  • चट्टानों की संरचना जटिल होती है.
  • ब्लोआउट (तेल का अचानक फूटना) का खतरा रहता है.
  • इसीलिए कंपनियां खास उपकरण जैसे Blowout Preventer का इस्तेमाल करती हैं.

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