1,84,484 रुपये टूट चुकी है चांदी, 44000 लुढ़का है सोना भी…देखिए अपने हाई से फिसल कर कहां आ गई कीमत
वैश्विक बाजारों में बढ़ते तनाव और महंगाई की चिंताओं के बीच बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. MCX से लेकर COMEX तक बुलियन बाजार दबाव में दिखा, जबकि कच्चा तेल $111 प्रति बैरल के पार बना हुआ है. अमेरिका-ईरान तनाव और फेड रिजर्व की सख्त नीति ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.

वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के चलते बुधवार (20 मई) को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की आशंका से निवेशक सतर्क हैं, जिसका सीधा असर बुलियन मार्केट पर दिख रहा है.
MCX पर फिसले दाम
भारतीय वायदा बाजार (MCX) में आज शुरुआती कारोबार के दौरान सोने और चांदी दोनों के भाव लाल निशान में नजर आए:
- सोना: 0.41% की गिरावट के साथ ₹1.58 लाख प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. यह ₹1.60 लाख के स्तर से नीचे फिसल गया है. यह आंकड़ा इसके ऑल टाइम हाई 2,02,984 रुपये से 44,000 नीचे आ गई है.
- चांदी: 0.79% टूटकर ₹2.67 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गई. सिल्वर अपने ऑल टाइम हाई (4,57,328) से 1,84,484 रुपये लुढ़क चुका है.
COMEX पर भी भारी बिकवाली
अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) में पिछले सत्र की भारी गिरावट के बाद बुधवार को भी दबाव जारी रहा. महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चिंताओं ने निवेशकों का सेंटिमेंट बिगाड़ा है:
- स्पॉट गोल्ड: शुरुआती कारोबार में 0.71% गिरकर $4,479.10 प्रति औंस पर आ गया.
- स्पॉट सिल्वर: 1.40% की कमजोरी के साथ $71.11 प्रति औंस पर ट्रेंड कर रही थी.
भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल का असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव बाजार की चिंताएं बढ़ा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि बातचीत विफल रही, तो वाशिंगटन कुछ ही दिनों में ईरान पर दोबारा हमले शुरू कर सकता है.
इस लंबे समय से चल रहे विवाद के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली शिपिंग प्रभावित हुई है. नतीजतन, कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई हैं, जो वैश्विक महंगाई को और हवा दे रही हैं:
- ब्रेंट क्रूड: $111 प्रति बैरल पर बना हुआ है.
- WTI क्रूड: मामूली गिरावट के बावजूद $104 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है.
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
महंगे तेल और लगातार बनी हुई महंगाई के कारण अब ट्रेडर्स अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें छोड़ रहे हैं. बाजार के कुछ जानकारों का तो यहां तक मानना है कि फेड रिजर्व दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है. विश्लेषकों के मुताबिक, जब तक पश्चिम एशिया के हालात और फेड रिजर्व का रुख साफ नहीं होता, तब तक सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव (Volatility) जारी रहेगा.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.