Suzlon Energy पर SEBI का शिकंजा, कंपनी समेत 5 लोगों पर लगाया ₹28.95 करोड़ का जुर्माना; निवेशकों को गुमराह करने का आरोप
Sebi ने Suzlon Energy, उसके चेयरपर्सन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद आर तांती समेत पांच लोगों पर कुल 28.95 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. नियामक का आरोप है कि कंपनी ने कई वर्षों तक अपने वित्तीय प्रदर्शन और जोखिम प्रोफाइल को लेकर निवेशकों को भ्रामक जानकारी दी. Sebi की जांच वित्त वर्ष 2014-15 से 2020-21 की शुरुआती तिमाहियों तक चली.

Suzlon Energy Sebi Action: सेबी ने विंड एनर्जी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Suzlon Energy और उसके टॉप मैनेजमेंट के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है. Sebi ने कंपनी, उसके चेयरपर्सन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद आर तांती तथा अन्य अधिकारियों पर कुल 28.95 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. नियामक का आरोप है कि कंपनी ने कई वर्षों तक अपने वित्तीय प्रदर्शन को लेकर निवेशकों को गुमराह किया और वित्तीय विवरणों में वास्तविक स्थिति को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया.
सही तस्वीर पेश करने में रही विफल
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, Sebi ने अपने 96 पन्नों के आदेश में कहा कि Suzlon Energy के वित्तीय विवरण कंपनी की प्रोफिटेबिलिटी, नेटवर्थ, लीवरेज, फाइनेंशियल रिस्क और एक्सपोजर की सही तस्वीर पेश करने में विफल रहे. नियामक के मुताबिक, कंपनी के वित्तीय दस्तावेज निवेशकों को कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति का “ट्रू एंड फेयर व्यू” देने में असफल रहे.
किस पर कितना लगा जुर्माना
Sebi ने Suzlon Energy Ltd पर 15.95 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. इसके अलावा कंपनी के चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद आर तांती पर 5.75 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है. वहीं, कंपनी के प्रमोटर गिरीश आर तांती पर 5.45 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है. पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर कीर्ति जे वागड़िया पर 1.50 करोड़ रुपये और अमित अग्रवाल पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.
कैसे शुरू हुई जांच
यह मामला दिसंबर 2019 में Sebi को मिली एक गुमनाम शिकायत के बाद सामने आया था. शिकायत में Suzlon Energy और उसकी सहायक तथा संबद्ध कंपनियों के बीच हुए कुछ लेनदेन को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे. इसके बाद NSE ने मामले की प्रारंभिक जांच की.
बाद में एक फॉरेंसिक ऑडिट भी कराया गया, जिसमें इनवेस्टमेंट, लोन, एसेट इम्पेयरमेंट और रिलेटेड पार्टी डिस्क्लोजर से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई. इन निष्कर्षों के आधार पर Sebi ने विस्तृत जांच शुरू की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कंपनी के वित्तीय विवरणों में किसी प्रकार की गलत जानकारी या भ्रामक प्रस्तुति तो नहीं दी गई थी.
कई वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की हुई जांच
Sebi की जांच वित्त वर्ष 2014-15 से लेकर वित्त वर्ष 2019-20 तक और वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तीन तिमाहियों तक के रिकॉर्ड पर केंद्रित रही. जांच के दौरान नियामक ने कंपनी के वित्तीय दस्तावेजों, इनवेस्टमेंट, कर्ज लेनदेन और संबद्ध पक्षों से जुड़े खुलासों की गहन समीक्षा की. नियामक का मानना है कि इन वित्तीय विवरणों में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों को उचित तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे निवेशकों के निर्णय प्रभावित हो सकते थे.
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