भारत ने फिर शुरू किए दुनिया के सबसे पुराने परमाणु रिएक्टर, 10 साल और चलेंगे तारापुर के न्यूक्लियर रिएक्टर; जानें डिटेल
भारत के सबसे पुराने और दुनिया के सबसे पुराने चालू न्यूक्लियर रिएक्टरों में शामिल तारापुर न्यूक्लियर एनर्जी स्टेशन की यूनिट 1 और 2 फिर से राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़ गई हैं. वर्ष 1969 में शुरू हुए इन रिएक्टरों का व्यापक आधुनिकीकरण और सिक्योरिटी अपग्रेड किया गया है.
Tarapur Atomic Power Station: भारत के न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम को एक बड़ी सफलता मिली है. महाराष्ट्र के तारापुर न्यूक्लियर एनर्जी स्टेशन की यूनिट 1 और यूनिट 2 को लंबे समय बाद फिर से नेशनल इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड से जोड़ दिया गया है. ये दोनों रिएक्टर दुनिया के सबसे पुराने चालू न्यूक्लियर रिएक्टरों में गिने जाते हैं. वर्ष 1969 में शुरू हुए ये प्लांट भारत के पहले कमर्शियल न्यूक्लियर इलेक्ट्रिसिटी स्टेशन थे. कई साल तक चले आधुनिकीकरण और सुरक्षा सुधार कार्यों के बाद अब दोनों यूनिट्स फिर से इलेक्ट्रिसिटी प्रोडक्शन कर रही हैं.
तारापुर भारत का पहला कमर्शियल न्यूक्लियर बिजलीघर
तारापुर न्यूक्लियर एनर्जी स्टेशन महाराष्ट्र में स्थित है. इसकी यूनिट 1 और यूनिट 2 को वर्ष 1969 में शुरू किया गया था. इन्हें अमेरिकी कंपनी जीई ने टर्नकी कॉन्ट्रैक्ट के तहत बनाया था. शुरुआत में इनकी क्षमता 200 मेगावाट थी, जिसे बाद में घटाकर 160 मेगावाट कर दिया गया. यह भारत का पहला कमर्शियल न्यूक्लियर बिजलीघर माना जाता है .
फिर शुरू हुआ आपरेशन
तारापुर की दोनों इकाइयां वर्ष 2020 से बड़े रिनिवल और मरम्मत कार्यों के लिए बंद थीं. इस दौरान प्लांट के कई महत्वपूर्ण हिस्सों को बदला गया और उनकी जांच की गई. यूनिट 1 को दिसंबर 2025 में दोबारा शुरू करने की अनुमति मिली थी, जबकि यूनिट 2 को मई 2026 में मंजूरी दी गई. अब दोनों इकाइयां फिर से ग्रिड से जुड़कर बिजली उत्पादन कर रही हैं.
सुरक्षा के लिए किए गए बड़े सुधार
एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड ने बताया कि यूनिट 2 में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा सुधार किए गए हैं. रिएक्टर की कूलिंग पाइपलाइन को पूरी तरह बदला गया है और अधिक जंगरोधी स्टेनलेस स्टील का यूज किया गया है. इसके अलावा कंटेनमेंट फिल्टर्ड वेंटिंग सिस्टम और वैकल्पिक कूलिंग वॉटर सिस्टम भी स्थापित किए गए हैं. इन सुधारों का उद्देश्य प्लांट की सुरक्षा और विश्वसनीयता को और बेहतर बनाना है.
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10 साल और ऑपरेशन की मिली मंजूरी
रेगुलेटरी बोर्ड ने सभी तकनीकी जांच और मूल्यांकन के बाद यूनिट 2 को अगले 10 वर्षों तक ऑपरेशन की अनुमति दे दी है. निरीक्षण के दौरान रिएक्टर के महत्वपूर्ण हिस्सों जैसे प्रेशर वेसल वेल्डिंग की गहन जांच की गई. बोर्ड का कहना है कि नियमित रखरखाव और निगरानी के साथ यह रिएक्टर सुरक्षित रूप से आगे भी काम कर सकता है.
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