क्या टाटा संस से चंद्रशेखरन की होगी कड़वाहट भरी विदाई, AGM से पहले चेयरमैनशिप छोड़ने की चर्चा तेज

AGM में अब एक हफ्ते से भी कम समय बचा है, लेकिन कई अहम सवालों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या बैठक हो भी पाएगी या नहीं. . यह बैठक चंद्रशेखरन के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि भले ही चेयरमैन के तौर पर उनका कार्यकाल फरवरी 2027 तक है.

टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन. Image Credit: Canva/ Money9

Highlights

  • नोएल टाटा, चंद्रशेखरन के बने रहने के खिलाफ दिख रहे हैं.
  • चेयरमैन के तौर पर चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2027 तक है.
  • यह बैठक अनिश्चित और संभावित रूप से विवादित हो सकती है.

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने करीबी सहयोगियों के साथ 18 अगस्त को होने वाली सालाना आम बैठक (AGM) से पहले पद छोड़ने की संभावना पर चर्चा की है. यह बैठक अनिश्चित और संभावित रूप से विवादित हो सकती है. इकोनॉमिक टाइम्स की बुधवार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रशेखरन संभावित रूप से विवादित नतीजों का सामना करने के बजाय पद छोड़ना बेहतर समझ रहे हैं.

कब तक है चंद्रशेखरन का कार्यकाल?

AGM में अब एक हफ्ते से भी कम समय बचा है, लेकिन कई अहम सवालों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या बैठक हो भी पाएगी या नहीं. यह बैठक चंद्रशेखरन के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि भले ही चेयरमैन के तौर पर उनका कार्यकाल फरवरी 2027 तक है, लेकिन तब तक बने रहने के लिए उन्हें टाटा संस के बोर्ड में डायरेक्टर के तौर पर फिर से नियुक्त होना होगा.

चंद्रशेखरन के खिलाफ दिख रहे नोएल टाटा

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, चंद्रशेखरन के बने रहने के खिलाफ दिख रहे हैं. साथ ही इस गुरुवार को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में AGM में वोटिंग को लेकर क्या फैसला होगा, इस पर भी कोई स्पष्टता नहीं है. इसके अलावा, सर रतन टाटा ट्रस्ट का भविष्य भी अनिश्चित है. ऐसे में AGM के नतीजे तय करने वाले कई फैक्टर्स हैं जो लगातार बदल रहे हैं और किसी एक संस्था के नियंत्रण से बाहर हैं.

नेतृत्व में अचानक बदलाव

महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) को फिलहाल सभी फैसले लेने से रोक दिया है. अगर 18 अगस्त को होने वाली मीटिंग का नतीजा चंद्रशेखरन के पक्ष में नहीं रहा, तो उनकी चेयरमैनशिप का अचानक और कड़वाहट भरा अंत हो सकता है. इससे भारत के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप में अचानक और बिना किसी योजना के लीडरशिप बदलने की स्थिति पैदा हो सकती है.

कॉरपोरेट कानून

कानून के तहत अगर कोई कंपनी अपनी AGM (सालाना आम बैठक) नहीं कर पाती है, तो वह इसे छह महीने तक टालने की इजाजत मांग सकती है. लेकिन कई कॉरपोरेट कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, जिस डायरेक्टर को शेयरहोल्डर्स से दोबारा नियुक्त किया जाना है, क्या वह इस बीच अपने पद पर बना रह सकता है. यह ‘रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज’ के फैसले और कंपनी के ‘आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन’ (AoA) के नियमों पर निर्भर करता है.

महाराष्ट्र चैरिटेबल ट्रस्ट्स एक्ट के कथित उल्लंघन की जांच पूरी होने तक चैरिटी कमिश्नर ने SRTT पर अहम फैसले लेने से रोक लगा दी है. इसी वजह से AGM करने की कानूनी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं.

किसके पास वोट देने का अधिकार?

टाटा संस के AoA के मुताबिक, SRTT और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (जो मिलकर टाटा संस के ज्यादातर मालिक हैं) द्वारा संयुक्त रूप से नॉमिनेट किए गए ट्रस्टी AGM में वोट देने के लिए अधिकृत हैं. चूंकि SRTT सस्पेंडेड है, इसलिए यह साफ नहीं है कि क्या वह चैरिटी कमिश्नर की साफ मंजूरी के बिना AGM के लिए ट्रस्टियों को नॉमिनेट कर सकता है.

अगर AGM होती है और चंद्रशेखरन दोबारा नियुक्त नहीं हो पाते हैं, तो उनकी चेयरमैनशिप अचानक खत्म हो सकती है, जिससे टाटा ग्रुप में बिना किसी योजना के लीडरशिप में बदलाव हो सकता है.

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