अमेरिका-चीन से लेकर 95 देशों में बढ़ीं पेट्रोल-डीजल की कीमतें, लेकिन भारत अभी अछूता, जानें कब तक संभाल पाएगा प्रेशर

जैसे-जैसे अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, दुनिया के सबसे अहम एनर्जी रूट्स में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली तेल की सप्लाई पर खतरा बढ़ गया. अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें लगभग 20 फीसदी बढ़ गई हैं. लेकिन भारत में अभी फ्यूल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.

पेट्रोल-डीजल. Image Credit: Getty image

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर एनर्जी की सप्लाई पर पड़ा. क्रूड ऑयल से लेकर गैस तक की सप्लाई चरमरा गई है, जिसके चलते दुनिया भर में पेट्रोल की कीमतें बढ़ रही हैं. जैसे-जैसे अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, दुनिया के सबसे अहम एनर्जी रूट्स में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली तेल की सप्लाई पर खतरा बढ़ गया, जिससे कच्चे तेल की कीमतें ऊपर चली गईं. इसके तुरंत बाद, रिटेल फ्यूल की कीमतें भी बढ़ गईं.

अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में इजाफा

अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें लगभग 20 फीसदी बढ़ गई हैं. फरवरी में यह 2.94 डॉलर प्रति गैलन थी, जो अब बढ़कर 3.58 डॉलर प्रति गैलन हो गई है. कई राज्यों में कीमतें 4 डॉलर के पार चली गई हैं और कैलिफोर्निया में तो कीमतें 5 डॉलर का आंकड़ा भी पार कर गई हैं. लेकिन भारत में अभी फ्यूल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.

तेल की कीमतों में उछाल ने चौंकाया

वैश्विक स्तर पर, यह उछाल और भी अधिक चौंकाने वाला रहा है. पश्चिम एशिया युद्ध में हालिया तनाव के दौरान, जब तेल और गैस के अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली सप्लाई पर खतरा बढ़ गया, तो तीन हफ्तों से भी कम समय में कम से कम 95 देशों में पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं. कुछ बाजारों में तो कीमतों में लगभग 70 फीसदी तक का उछाल देखा गया, लेकिन भारत में अभी कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.

इन देशों में एक ही पैटर्न पर महंगा हुआ तेल

5 देशों में एक ही पैटर्न पर कीमतें बढ़ी हैं. Global Petrol Prices के डेटा से पता चलता है कि 23 फरवरी से 11 मार्च के बीच कम से कम 95 देशों में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई. सबसे ज्यादा बढ़ोतरी उन अर्थव्यवस्थाओं में हुई है जो आयात पर निर्भर हैं.

  • कंबोडिया: +67.8 प्रतिशत
  • वियतनाम: +49.7 प्रतिशत
  • नाइजीरिया: +35 प्रतिशत
  • लाओस: +32.9 प्रतिशत
  • कनाडा: +28.4 प्रतिशत

यहां तक कि विकसित अर्थव्यवस्थाएं भी इससे अछूती नहीं रही हैं.

  • संयुक्त राज्य अमेरिका: +16.5 प्रतिशत
  • जर्मनी: +13.3 प्रतिशत
  • फ्रांस: +6.4 प्रतिशत

दुनिया भर में पेट्रोल की बढ़ती कीमतें

नोट: 23 फरवरी से 11 मार्च के बीच 95 देशों में पेट्रोल की कीमतों में तेजी आई. कुछ देशों में यह बढ़ोतरी 50% से भी अधिक रही, जिसका एक कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल आपूर्ति में बाधा है.

देश/क्षेत्र23 फरवरी ($)11 मार्च ($)कीमत में वृद्धि (%)
कंबोडिया1.111.3268%
वियतनाम0.751.1350%
नाइजीरिया0.590.835%
लाओस1.341.7833%
कनाडा1.161.328%
पाकिस्तान0.921.1524%
मालदीव0.871.0419%
ऑस्ट्रेलिया1.111.3118%
अमेरिका0.871.0117%
सिंगापुर2.162.516%
प्यूर्टो रिको0.91.0214%
जर्मनी2.082.3613%
ग्वाटेमाला1.041.1713%
सेशेल्स1.341.5213%
सिएरा लियोन1.451.6312%
लेबनान0.911.0212%
स्पेन1.731.9412%
ऑस्ट्रिया1.781.9812%
स्वीडन1.731.9211%
चीन1.081.1910%
स्रोत: Global Petrol Prices; AAA Fuel Prices (US डेटा) Datawrapper के साथ बनाया गया

कुछ देश फ्यूल की कीमतों को हर महीने अपडेट करते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि अप्रैल में कीमतों में और बढ़ोतरी होने की संभावना है.

एशिया को अधिक झुलसा रही तेल की खौलती कीमतों की आंच

एशिया को इसका असर सबसे पहले और सबसे अधिक महसूस होता है. खाड़ी देशों के तेल पर एशिया की निर्भरता ने इस जोखिम को तुरंत तनाव में बदल दिया है. जापान अपने तेल का लगभग 95 फीसदी हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है. दक्षिण कोरिया अपनी जरूरत का लगभग 70 फीसदी हिस्सा इसी पर निर्भर रहता है.

दोनों ने पहले ही दखल दिया है. जापान अपने रणनीतिक भंडार से तेल जारी करने की तैयारी कर रहा है. वहीं, दक्षिण कोरिया ने 30 वर्षों में पहली बार ईंधन की कीमतों पर अपर लिमिट तय की है. दक्षिण एशिया में प्रतिक्रिया अधिक उथल-पुथल वाली रही है.

पाकिस्तान: हफ्ते में चार दिन काम, स्कूल बंद, घर से काम करने के आदेश.
बांग्लादेश: ऊर्जा बचाने के लिए विश्वविद्यालय बंद.

भारत में कीमतें स्थिर

इस उथल-पुथल के बीच भारत में अभी तक फ्यूल की कीमतों पर किसी भी तरह का असर नहीं दिखा है. जहां एक ओर वैश्विक कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, वहीं भारत में पेट्रोल पंप पर कीमतों में कोई बदलाव नहीं देखा गया है. दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में, 28 फरवरी से 19 मार्च के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतें जस की तस बनी हुई हैं.

दिल्ली पेट्रोल: ₹94.77 से ₹94.77
मुंबई पेट्रोल: ₹103.50 से ₹103.50

भारत में कीमतें स्थिर क्यों हैं?

तेजी से बदलते वैश्विक माहौल के बीच यह स्थिरता सबसे अलग नजर आती है. दरअसल, भारत में ईंधन की कीमतें पूरी तरह से बाजार से जुड़ी हुई नहीं हैं. प्रशासनिक नियंत्रण और टैक्स के स्ट्रक्चर सरकार और तेल मार्केटिंग कंपनियों को कीमतों में होने वाले छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव को खुद ही झेल लेने की सहूलियत देते हैं, जिससे वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ने में कुछ देरी हो जाती है.

इससे वैश्विक तेल बाजारों और घरेलू पेट्रोल पंप की कीमतों के बीच एक अस्थायी अंतर पैदा हो जाता है. लेकिन यह अंतर हमेशा बना नहीं रहेगा. भारत की इस स्थिति की अपनी कुछ सीमाएं भी हैं.

  • 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात किया जाता है.
  • लंबे समय तक कीमतें अधिक रहने से तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) के मुनाफे पर दबाव पड़ता है.
  • सरकार पर टैक्स कम करने या सब्सिडी बढ़ाने का दबाव पड़ सकता है.

तेल की कीमतें बढ़ीं, तो फिर सताएगी महंगाई

अगर कच्चे तेल की कीमतें अधिक बनी रहती हैं, तो आखिरकार कीमतों में बदलाव करना ही पड़ेगा, चाहे वह कीमतें बढ़ाकर किया जाए या फिर सरकारी खजाने पर बोझ डालकर. ईंधन की कीमतें बढ़ना तो इस झटके की बस पहली कड़ी है. इसका असर सिर्फ पेट्रोल तक ही सीमित नहीं रहता. तेल की कीमतों का असर कई चीजों पर भी पड़ता है.

  • परिवहन- लॉजिस्टिक्स की लागत में बढ़ोतरी.
  • उर्वरक- खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतें.
  • मैन्युफैक्चरिंग- सामान का महंगा होना.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा स्तर पर तेल की कीमतें कंपनियों के के दबाव झेलने की लिमिट से ऊपर निकल चुकी हैं. अगर कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहता है, तो सेक्टर का कैलकुलेशन बिगड़ने लगता है. ऐसे में OMCs की पेट्रोल और डीजल पर मार्केटिंग मार्जिन 6.3 रुपये प्रति लीटर तक घट सकती है, जबकि LPG पर नुकसान 10.2 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ सकता है. इससे सालाना 32,800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त LPG अंडर-रिकवरी हो सकती है.

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