Uber में बड़े पैमाने पर छंटनी, 3300 कर्मचारियों की जाएगी नौकरी; 2020 के बाद सबसे बड़ा जॉब कट
Uber Technologies ने करीब 3,300 कर्मचारियों की छंटनी का फैसला किया है, जो 2020 के बाद कंपनी की सबसे बड़ी जॉब कट है. कंपनी मैनेजरों की संख्या में करीब 20 फीसदी की कमी करेगी और संगठनात्मक ढांचे को सरल बनाएगी. CEO Dara Khosrowshahi के मुताबिक, रिस्ट्रक्चरिंग से होने वाली बचत को ग्रोथ, इनोवेशन और ऑटोनॉमस फ्यूचर से जुड़ी टेक्नोलॉजी में निवेश किया जाएगा.
Highlights
- Uber करीब 3,300 कर्मचारियों की छंटनी करेगी, जो 2020 के बाद कंपनी की सबसे बड़ी जॉब कट है.
- कंपनी मैनेजरों की संख्या में करीब 20 फीसदी की कमी करेगी और संगठनात्मक ढांचे को सरल बनाएगी.
- Waymo जैसी ऑटोनॉमस राइड-हेलिंग कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच Uber ग्रोथ और ऑटोनॉमस फ्यूचर पर फोकस बढ़ाएगी.
Uber Layoffs: ऐप-कैब कंपनी Uber Technologies ने करीब 3,300 कर्मचारियों की छंटनी करने का फैसला किया है. कंपनी के कुल कर्मचारियों में यह संख्या लगभग 10 फीसदी है. Uber ने यह कदम संगठनात्मक ढांचे को सरल बनाने, मैनेजमेंट की अतिरिक्त परतों को कम करने और लागत घटाने के लिए उठाया है. यह 2020 के बाद कंपनी में होने वाली सबसे बड़ी कर्मचारी कटौती है. कंपनी में पिछले साल के अंत तक दुनियाभर में करीब 34,000 कर्मचारी थे.
20 फीसदी कम होगी मैनेजरों की संख्या
Uber के पुनर्गठन का सबसे ज्यादा असर मैनेजमेंट स्तर पर पड़ेगा. कंपनी मैनेजरों की संख्या में करीब 20 फीसदी की कमी करेगी. हालांकि, Uber ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि कितने मैनेजरों को सीधे नौकरी से हटाया जाएगा. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि कुछ मैनेजरों को मैनेजर पद से हटाकर इंडिविजुअल कंट्रीब्यूटर की भूमिका में भेजा जा सकता है. छंटनी का असर नॉन-मैनेजर कर्मचारियों पर भी पड़ेगा.
संगठन को सरल बनाना चाहती है कंपनी
Uber के CEO Dara Khosrowshahi ने कर्मचारियों को भेजे ईमेल में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कंपनी के तेजी से विस्तार के कारण संगठन में कई अतिरिक्त स्तर और कोऑर्डिनेशन से जुड़ी भूमिकाएं बन गई हैं. इससे फैसले लेने की प्रक्रिया धीमी और जटिल हुई है. अब कंपनी संगठन को ज्यादा सरल और तेज बनाना चाहती है.
इसके लिए Uber उन टीमों की संख्या कम करेगी, जिनमें केवल एक या दो कर्मचारी हैं. साथ ही, CEO से सात या उससे अधिक स्तर नीचे काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी घटाई जाएगी. कंपनी अपने इंजीनियरिंग, साइंस और डिलीवरी ग्रुप्स को भी सुव्यवस्थित करेगी. इसके तहत रेस्टोरेंट, रिटेल और व्हाइट-लेबल डिलीवरी से जुड़ी तीन ऑपरेशंस टीमों को मिलाने की योजना है.
ऑटोनॉमस कंपनियों से बढ़ी चुनौती
Uber का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कंपनी को ऑटोनॉमस राइड-हेलिंग सर्विसेज से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है. अमेरिका में Waymo जैसी कंपनियों की प्रगति ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है. बाजार में यह आशंका है कि ड्राइवरलेस टैक्सी सर्विसेज भविष्य में Uber के पारंपरिक कारोबार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं.
Uber के शेयर्स का प्रदर्शन भी पिछले एक साल में दबाव में रहा है. कंपनी के शेयर में करीब 8 फीसदी की गिरावट आई है और इस दौरान उसने S&P 500 से कमजोर प्रदर्शन किया है.
बचत को ग्रोथ और ऑटोनॉमस कारोबार में लगाएगी Uber
CEO Dara Khosrowshahi के मुताबिक, रिस्ट्रक्चरिंग से होने वाली बचत को कंपनी ग्रोथ, इनोवेशन और भविष्य की महत्वपूर्ण क्षमताओं में दोबारा निवेश करेगी. Uber ड्राइवर्स, कूरियर्स और मर्चेंट्स के लिए भी निवेश बढ़ाने की योजना बना रही है. इसके अलावा कंपनी अपने मुख्य कारोबार को मजबूत करने और ऑटोनॉमस फ्यूचर के लिए टेक्नोलॉजी विकसित करने पर ध्यान देगी.
हालांकि, Khosrowshahi ने कर्मचारियों को भेजे संदेश में AI को सीधे छंटनी का कारण नहीं बताया है, लेकिन कंपनी रोजमर्रा के ऑपरेशंस में टेक्नोलॉजी और AI के ज्यादा इस्तेमाल की दिशा में भी बढ़ रही है. नई छंटनी अमेरिका समेत अन्य देशों में Uber के कर्मचारियों को प्रभावित करेगी.
2020 में 6,700 कर्मचारियों को हटाया था
यह 2020 के बाद Uber की सबसे बड़ी छंटनी है. महामारी के दौरान 2020 में कंपनी ने करीब 6,700 कर्मचारियों को नौकरी से हटाया था, क्योंकि लॉकडाउन के कारण ट्रैवल डिमांड में भारी गिरावट आई थी. इस बार कंपनी का फोकस लागत घटाने के साथ संगठन को ज्यादा कुशल बनाने और ऑटोनॉमस राइड-हेलिंग के दौर के लिए खुद को तैयार करने पर है.
यह भी पढ़ें: Stock to Watch: स्विगी, अडानी पोर्ट्स, IDFC फर्स्ट बैंक पर रखें आज नजर, शेयरों में दिख सकती है हलचल
Latest Stories
पूरी दुनिया को बताया अमीर होने का नुस्खा, अब खुद कर्ज में फंसे ‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी
विदेश में रहने वाले भारतीयों ने देश में जमकर कराई FD, बैंकों में डिपॉजिट किए 127.22 अरब डॉलर; समझें इसके मायने
रुपये पर बढ़ा दबाव, 94.97 पर बंद हुआ भाव; कच्चा तेल और मजबूत डॉलर बने वजह
