Groww AMC बेच रही 23% हिस्सेदारी, ₹580 करोड़ में डील, जानें खरीदार कौन और क्या है कंपनी का प्लान
अमेरिकी एसेट मैनेजमेंट की दिग्गज कंपनी स्टेट स्ट्रीट इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट ने भारत के तेजी से बढ़ते निवेश बाजार में बड़ा दांव खेला है. कंपनी ने ग्रो एएमसी में 23% हिस्सेदारी खरीदने के लिए 580 करोड़ रुपये की डील की है। ये रेगुलेटरी मंजूरी के बाद पूरी होगी। ग्रो एएमसी, लोकप्रिय निवेश ऐप ग्रो की सब्सिडियरी है.
भारत के तेजी से बढ़ते निवेश बाजार में अमेरिकी एसेट मैनेजमेंट कंपनी स्टेट स्ट्रीट इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट ने बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने ग्रो एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड (Groww AMC) में 23% हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया है. यह डील 580 करोड़ रुपये की है. यह सौदा रेगुलेटरी मंजूरी मिलने के बाद पूरा होगा. ग्रो एएमसी, पॉपुलर इन्वेस्टमेंट ऐप ग्रो की पैरेंट कंपनी का हिस्सा है. यह पार्टनरशिप दोनों कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित होगी.
भारत में मजबूत पकड़ बनाने की योजना
स्टेट स्ट्रीट, दुनिया की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में से एक है. कंपनी का कहना है कि भारत में मिडिल क्लास बढ़ रहा है, युवा निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और डिजिटल निवेश बहुत पॉपुलर हो रहे हैं. इसलिए भारत का बाजार एक मौका है. स्टेट स्ट्रीट के सीईओ यी-ह्सिन हंग ने कहा, “ग्रो एएमसी लाखों लोगों को आसानी से निवेश करने का मौका दे रहा है. इस पार्टनरशिप से हम भारत के घरेलू बाजार में सीधे हिस्सा लेंगे और ग्लोबल क्लाइंट्स के लिए भारत फोकस्ड निवेश के ऑप्शन बढ़ाएंगे.”
ग्रो को मिलेगा ग्लोबल ज्ञान
ग्रो एएमसी के लिए यह डील अच्छी है. 580 करोड़ रुपये से कंपनी अपनी म्यूचुअल फंड बिजनेस को और बड़ा करेगी. ग्रो के को-फाउंडर और सीओओ हर्ष जैन ने कहा, “स्टेट स्ट्रीट के साथ पार्टनरशिप से हमें ग्लोबल प्रैक्टिस, बेहतर इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी और रिस्क मैनेजमेंट का फायदा मिलेगा. हम भारतीय निवेशकों के लिए और बेहतर प्रोडक्ट ला सकेंगे.” ग्रो एएमसी अब भी ग्रो की सब्सिडियरी रहेगी.
म्यूचुअल फंड बिजनेस को नई रफ्तार
ग्रो एएमसी तेजी से बढ़ रहा है. दिसंबर 2025 तक इसके म्यूचुअल फंड में 3,619.19 करोड़ रुपये से ज्यादा के एसेट्स थे. यह पैसा कंपनी नए प्रोडक्ट्स बनाने, इंडेक्स फंड्स और क्वांटिटेटिव स्ट्रैटेजी में इस्तेमाल करेगी. दोनों कंपनियां मिलकर प्रोडक्ट डेवलपमेंट, गवर्नेंस और रिस्क मैनेजमेंट पर काम करेंगी. इससे भारतीय निवेशकों को इंटरनेशनल लेवल के बेहतर ऑप्शन मिलेंगे. यह डील भारत के एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री में विदेशी कंपनियों के बढ़ती रुचि को दिखाती है.