कभी Raymond का बादशाह, आखिरी दिनों में संघर्ष से जूझे, पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का 87 साल की उम्र में निधन
Vijaypat Singhania ने साल 1980 में Raymond Group की कमान संभाली. उस समय कंपनी अच्छी थी, लेकिन उतनी बड़ी नहीं थी. उन्होंने आते ही कंपनी को तेजी से आगे बढ़ाया. उन्होंने सिर्फ ऊनी कपड़ों तक सीमित रहने के बजाय सिंथेटिक फैब्रिक, डेनिम और इंजीनियरिंग जैसे नए क्षेत्रों में भी कदम रखा.
Raymond Vijaypat Singhania Died: भारतीय उद्योग जगत का एक बड़ा नाम अब इतिहास बन गया है. Vijaypat Singhania अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनका बनाया हुआ ब्रांड Raymond Group आज भी करोड़ों लोगों की जिंदगी का हिस्सा है. उन्होंने Raymond को सिर्फ एक कपड़ा कंपनी नहीं रहने दिया, बल्कि उसे एक बड़ा और भरोसेमंद नाम बना दिया. एक समय था जब Raymond का नाम आते ही Complete Man की छवि सामने आती थी, और इसके पीछे सबसे बड़ा हाथ विजयपत सिंघानिया का ही था. उन्होंने कंपनी को नई सोच, नई दिशा और नया विस्तार दिया.
Raymond को नई ऊंचाई देने वाले विजयपत सिंघानिया
Vijaypat Singhania ने साल 1980 में Raymond Group की कमान संभाली. उस समय कंपनी अच्छी थी, लेकिन उतनी बड़ी नहीं थी. उन्होंने आते ही कंपनी को तेजी से आगे बढ़ाया. उन्होंने सिर्फ ऊनी कपड़ों तक सीमित रहने के बजाय सिंथेटिक फैब्रिक, डेनिम और इंजीनियरिंग जैसे नए क्षेत्रों में भी कदम रखा. उनकी सोच की वजह से Raymond एक बड़ी और मजबूत कंपनी बन गई. साल 1990 के दशक में Complete Man कैंपेन ने Raymond को हर घर तक पहुंचा दिया. यह एक बड़ा ब्रांड बन गया और लोगों के बीच इसकी खास पहचान बन गई.
आसमान में भी बनाई पहचान
विजयपत सिंघानिया सिर्फ एक उद्योगपति नहीं थे, बल्कि एक साहसी इंसान भी थे. उन्हें उड़ान भरने का बहुत शौक था. साल 1988 में उन्होंने अकेले एक छोटे विमान से लंदन से अहमदाबाद तक करीब 9,000 किलोमीटर की उड़ान भरी. यह एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड था. इसके बाद साल 2005 में, 67 साल की उम्र में उन्होंने हॉट एयर बैलून से करीब 69,852 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरी. यह एक विश्व रिकॉर्ड था. उनकी इन उपलब्धियों के लिए उन्हें Padma Bhushan से सम्मानित किया गया.
जिंदगी के आखिरी सालों में मुश्किलें
जिंदगी के आखिरी साल उनके लिए आसान नहीं रहे. साल 2015 में उन्होंने अपनी Raymond कंपनी की बड़ी हिस्सेदारी अपने बेटे Gautam Singhania को दे दी. बाद में यही फैसला उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुआ. पिता और बेटे के बीच विवाद शुरू हो गया, जो काफी समय तक चला. हालात इतने खराब हो गए कि उन्हें अपने ही बनाए घर के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी. एक समय आसमान छूने वाले विजयपत सिंघानिया ने अपने आखिरी साल काफी संघर्ष में बिताए. उनकी जिंदगी सफलता और संघर्ष दोनों की कहानी रही.
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