संपत्ति पर फिर से टैक्स लगाने की चर्चा, जानें क्या होता है Wealth Tax
क्या ज्यादा संपत्ति पर टैक्स लगाना चाहिए? लेकिन भारत में लगने वाले वेल्थ टैक्स या संपत्ति कर को पहले ही खत्म कर दिया है फिर वापस इसकी चर्चा क्यों हो रही है? भारत में कितना लगता था वेल्थ टैक्स और दुनिया के किन देशों में लगाया जाता है, यहां जानें सबकुछ...
संपत्ति कर या Wealth Tax ये कोई नई चीज नहीं है लेकिन भारत में अब इस तरह का कोई टैक्स वसूला नहीं जाता. लेकिन वेल्थ टैक्स फिर भी चर्चा का विषय बन जाता है. हाल ही में वर्ल्ड इनइक्वालिटी लैब ने एक पेपर जारी किया जिसमें कहा गया कि भारत को 2 फीसदी का वेल्थ टैक्स लगा देना चाहिए जिसकी संपत्ति 10 करोड़ से ज्यादा ताकि देश में असमानता को कम किया जा सके. अब बजट 2025 करीब है इसलिए वेल्थ टैक्स फिर चर्चा का विषय बना हुआ है. लेकिन क्या है वेल्थ टैक्स, भारत में कब लगा और कब खत्म हो गया, चलिए सब समझते हैं.
वेल्थ टैक्स क्या है?
वेल्थ टैक्स के नाम से ही समझ आ रहा है कि किसी की संपत्ति माने वेल्थ पर लगने वाला टैक्स है. भारत में वेल्थ टैक्स लोगों और कंपनियों की संपत्तियों पर लगने वाला एक टैक्स था. इसे केंद्र सरकार और कुछ मामलों में राज्य सरकारें भी लागू करती थीं. इस टैक्स का उद्देश्य देश की में असमानता को कम करना था.
हालांकि, वेल्थ टैक्स 2015 के बजट में खत्म कर दिया गया था, क्योंकि जितना वेल्थ टैक्स वसूला जाता था उससे ज्यादा खर्च इसे वसूलने में लगता था इसलिए मोदी सरकार ने इसे खत्म कर दिया. हालांकि इसकी जगह वित्त मंत्री ने सरचार्ज पेश कर दिया था, जो अब 2% से 12% तक लागू होता है.
वेल्थ टैक्स से जुड़ी खास बातें
- वेल्थ टैक्स किन पर लागू होता था?
- लोगों पर (Individuals)
- हिंदू अविभाजित परिवार (HUF)
- कंपनियां
- पार्टनरशिप फर्म पर सीधा वेल्थ टैक्स लागू नहीं होता था, लेकिन फर्म की संपत्तियों का मूल्य पार्टनर्स के हिस्से में जोड़कर टैक्स लगाया जाता था.
- वेल्थ टैक्स की दर और गणना
वेल्थ टैक्स 30 लाख रुपये से ज्यादा की नेट वेल्थ पर लगाया जाता था.
यह 31 मार्च को कुल संपत्ति पर 1% की दर से लगाया जाता था.
- वेल्थ टैक्स से छूट
अगर 500 वर्ग मीटर से छोटे घर या प्लॉट हो तो टैक्स नहीं लगता था.
बिजनेस/प्रोफेशन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली संपत्तियों पर नहीं लगता था.
300 दिनों से अधिक समय तक किराए पर दी गई आवासीय संपत्तियां भी छूट के दायरे में थीं.
किराए पर चलने वाले वाहन पर भी छूट थी.
इन्वेंट्री पर भी वेल्थ टैक्स नहीं वसूला जाता था.
- किन पर नहीं लगता था वेल्थ टैक्स?
सहकारी समितियां (Cooperative Societies)
राजनीतिक दल
सामाजिक क्लब
म्यूचुअल फंड (Section 10(23D) के तहत)
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)
वेल्थ टैक्स क्यों हटाया गया?
वेल्थ टैक्स की गणना और फिर उसे लागू करना आसान नहीं था. इसे सरल बनाने के लिए इसे खत्म कर दिया गया. वेल्थ टैक्स की जगह पर लगाए गए सरचार्ज ने सरकार को अधिक रेवेन्यू दिया. संपत्तियों की मूल्यांकन प्रक्रिया (जैसे गहनों की वैल्यूएशन) और विशेषज्ञों की आवश्यकता इसे बोझिल बनाती थी. वेल्थ टैक्स के बारे में कम लोगों को जानकारी थी, जिससे बड़ी संख्या में लोग इसे फाइल नहीं कर पाते थे.
आज की क्या स्थिति है?
वेल्थ टैक्स की जगह सरचार्ज ने ले ली है, जो अमीर लोगों और कंपनियों पर लगाया जाता है. 1 करोड़ रुपये से अधिक आय वाले लोगों और 10 करोड़ रुपये से अधिक आय वाली कंपनियों पर यह लागू होता है.
बता दें की दुनिया के कई देशों में वेल्थ टैक्स वसूला जाता है, जैसे यूरोप का देश नॉरवे जहां 1 फीसदी से कम का वेल्थ टैक्स वसूला जाता है, स्विट्जरलैंड, आदि.
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