दुनिया के समंदर पर ‘अडानी’ का राज! ब्रिटेन से ऑस्ट्रेलिया तक…कितना विशाल है पोर्ट कारोबार
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Associated British Ports (ABP) में करीब 63.9 फीसदी कंट्रोलिंग हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध है. यह हिस्सेदारी फिलहाल दो कनाडाई पेंशन फंड्स के पास है. अगर APSEZ इस हिस्सेदारी का अधिग्रहण करती है तो उसे एक साथ इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स के 21 रणनीतिक बंदरगाहों का संचालन मिल सकता है.

अडानी समूह एक बार फिर वैश्विक पोर्ट कारोबार को लेकर चर्चा में है. खबर है कि समूह की कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) ब्रिटेन की सबसे बड़ी पोर्ट ऑपरेटर कंपनी Associated British Ports (ABP) में हिस्सेदारी खरीदने पर विचार कर रही है. अगर यह डील होता है तो यह अडानी समूह के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहणों में शामिल होगा और यूरोप में उसकी मौजूदगी कई गुना मजबूत हो जाएगी. यह कदम सिर्फ एक और अधिग्रहण नहीं होगा, बल्कि अडानी पोर्ट्स की उस ग्लोबल स्ट्रैटेजी का हिस्सा है जिसके तहत कंपनी ने 2031 तक दुनिया की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट यूटिलिटी कंपनी बनने का लक्ष्य रखा है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अडानी का पोर्ट कारोबार आज दुनिया में कहां-कहां फैला है? कंपनी कितनी बड़ी है और इसकी ग्लोबल स्ट्रैटेजी क्या है?
ब्रिटेन में क्यों अहम है ABP का अधिग्रहण?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Associated British Ports (ABP) में करीब 63.9 फीसदी कंट्रोलिंग हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध है. यह हिस्सेदारी फिलहाल दो कनाडाई पेंशन फंड्स के पास है. अगर APSEZ इस हिस्सेदारी का अधिग्रहण करती है तो उसे एक साथ इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स के 21 रणनीतिक बंदरगाहों का संचालन मिल सकता है.
इनमें शामिल हैं-
- इमिंगम (Immingham) – टनेज के हिसाब से ब्रिटेन का सबसे बड़ा पोर्ट.
- साउथैम्पटन (Southampton) – ब्रिटेन का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट पोर्ट
ABP ऑफशोर विंड एनर्जी सेक्टर में भी बड़ी भूमिका निभाती है और इस उद्योग के आधे से ज्यादा ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस कार्यों से जुड़ी है. अगर यह डील पूरी होती है तो अडानी समूह की मौजूदगी सीधे यूरोप के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार नेटवर्क में हो जाएगी.
भारत में सबसे बड़ा निजी पोर्ट नेटवर्क
भारत में APSEZ पहले से ही सबसे बड़ी निजी पोर्ट ऑपरेटर कंपनी है. आज कंपनी के पास देशभर में 15 रणनीतिक बंदरगाह और टर्मिनल हैं. भारत के कुल पोर्ट कार्गो का लगभग 27 फीसदी और कंटेनर कार्गो का करीब 45.5 फीसदी हिस्सा APSEZ के नेटवर्क से होकर गुजरता है. यानी देश में आने-जाने वाले हर चार कंटेनरों में लगभग दो कंटेनर अडानी पोर्ट्स के नेटवर्क से जुड़े होते हैं.
मुंद्रा से विजिनजम तक मजबूत पकड़
अडानी पोर्ट्स का सबसे बड़ा केंद्र मुंद्रा पोर्ट (गुजरात) है, जिसे भारत का सबसे बड़ा व्यावसायिक बंदरगाह माना जाता है. इसके अलावा कंपनी के प्रमुख भारतीय पोर्ट मुंद्रा, धामरा, हजीरा, कट्टुपल्ली, कृष्णापट्टनम, गंगावरम, दहेज, मुरमुगाओ, एन्नोर कंटेनर टर्मिनल, विजिनजम ट्रांसशिपमेंट पोर्ट शामिल हैं. दिसंबर 2024 में शुरू हुआ विजिनजम पोर्ट भारत का पहला पूर्ण रूप से ऑटोमेटेड ट्रांसशिपमेंट पोर्ट है, जिसे भविष्य का ग्लोबल कंटेनर हब माना जा रहा है.
भारत से बाहर कहां-कहां मौजूद है अडानी पोर्ट?
पिछले कुछ वर्षों में APSEZ ने तेजी से अंतरराष्ट्रीय विस्तार किया है.
इजरायल
कंपनी ने हैफा पोर्ट में हिस्सेदारी खरीदकर भूमध्यसागर क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाई. यह पोर्ट इजरायल के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्रों में शामिल है.
श्रीलंका
अडानी समूह कोलंबो पोर्ट के वेस्ट कंटेनर टर्मिनल के विकास में साझेदार है. यह हिंद महासागर के सबसे व्यस्त कंटेनर ट्रांजिट हब में से एक है.
ऑस्ट्रेलिया
कंपनी ने North Queensland Export Terminal (NQXT) का अधिग्रहण किया. इससे APSEZ को ऑस्ट्रेलिया के संसाधन और कमोडिटी निर्यात बाजार में मजबूत प्रवेश मिला.
अफ्रीका और मध्य पूर्व
कंपनी लगातार अफ्रीका और मध्य पूर्व के कई देशों में बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स से जुड़े अवसरों की तलाश कर रही है. वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी मौजूदगी बढ़ाना इसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है.
अब नजर ब्रिटेन पर
अगर ABP का अधिग्रहण सफल रहता है तो ब्रिटेन APSEZ का सबसे बड़ा यूरोपीय कंट्रोल सेंटर बन सकता है.
सिर्फ पोर्ट नहीं, पूरी लॉजिस्टिक्स चेन
APSEZ खुद को सिर्फ पोर्ट ऑपरेटर नहीं मानती. कंपनी का बिजनेस मॉडल “Shore to Door” है. यानी जहाज से माल उतरने से लेकर ग्राहक तक उसकी डिलीवरी की पूरी जिम्मेदारी कंपनी संभालती है.
इसके तहत कंपनी के पास:
- 132 मालगाड़ी ट्रेनें
- करीब 690 किलोमीटर निजी रेलवे ट्रैक
- 12 मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क
- 3.1 मिलियन वर्ग फुट से ज्यादा वेयरहाउस क्षमता
- 129 जहाजों का मरीन बेड़ा
यही इंटीग्रेटेड मॉडल APSEZ को दुनिया की कई पारंपरिक पोर्ट कंपनियों से अलग बनाता है.
AI और ऑटोमेशन पर बड़ा दांव
अडानी पोर्ट्स अब अपने संचालन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल ट्रैकिंग और ऑटोमेशन का तेजी से इस्तेमाल कर रही है. गुजरात के वीरोचननगर में कंपनी ने भारत का पहला जीरो-टच टर्मिनल विकसित किया है, जहां अधिकतर संचालन डिजिटल सिस्टम के जरिए होता है. AI की मदद से जहाजों की आवाजाही, कंटेनर ट्रैकिंग, ट्रक मूवमेंट और ईंधन की खपत को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा रहा है.
वित्तीय प्रदर्शन भी मजबूत
वित्त वर्ष 2024-25 कंपनी के लिए काफी मजबूत रहा.
- टोटल ऑपरेशनल रेवेन्यू: 31,079 करोड़ रुपये
- EBITDA: 19,025 करोड़ रुपये
- नेट प्रॉफिट: 11,061 करोड़ रुपये
वहीं FY26 की तीसरी तिमाही में
- घरेलू पोर्ट कारोबार से आय: 6,701 करोड़ रुपये
- अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कारोबार: 1,067 करोड़ रुपये
- लॉजिस्टिक्स कारोबार: 1,121 करोड़ रुपये
- मरीन बिजनेस: 773 करोड़ रुपये
लॉजिस्टिक्स में 62 फीसदी और मरीन कारोबार में 91 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई.
2031 का बड़ा लक्ष्य
अडानी पोर्ट्स ने 2031 तक दुनिया की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट यूटिलिटी कंपनी बनने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए कंपनी तीन मोर्चों पर तेजी से काम कर रही है:
- भारत में नए पोर्ट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार
- विदेशों में रणनीतिक बंदरगाहों का अधिग्रहण
- सप्लाई चेन और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स कारोबार को मजबूत करना
- ABP का संभावित अधिग्रहण इसी रणनीति की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है.
शेयरों का हाल
बुधवार के कारोबार में अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) का शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहा था.
- पिछले 1 सप्ताह में 6.08 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है.
- पिछले 3 महीनों में 5.9 फीसदी की तेजी रही है.
- पिछले 1 वर्ष में 26.03 फीसदी का रिटर्न दिया है.
- 52 सप्ताह के निचले स्तर से अब तक 34.38 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है.
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