खाड़ी युद्ध के बाद एक और संकट, अलनीनो बिगाड़ेगा खेती-किसानी, मानसून पर IMD की बड़ी चेतावनी
मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो इस साल अल नीनो (El Nino) की वापसी मानसून को कमजोर कर सकती है. इसका सीधा असर खेती-किसानी, खाद्यान्न उत्पादन और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है. भारत की खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है. देश के कई इलाकों में आज भी सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. ऐसे में अगर बारिश सामान्य से कम रहती है तो फसलों की बुवाई, उत्पादन और किसानों की आय पर असर पड़ सकता है.

Monsoon Forcast: खाड़ी क्षेत्र में जारी जंग ने पहले ही दुनिया भर में तेल, महंगाई और सप्लाई चेन को लेकर चिंता बढ़ा दी है. लेकिन अब भारत के सामने एक और बड़ा खतरा खड़ा होता दिखाई दे रहा है. मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो इस साल अल नीनो (El Nino) की वापसी मानसून को कमजोर कर सकती है. इसका सीधा असर खेती-किसानी, खाद्यान्न उत्पादन और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है.
भारत की खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है. देश के कई इलाकों में आज भी सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. ऐसे में अगर बारिश सामान्य से कम रहती है तो फसलों की बुवाई, उत्पादन और किसानों की आय पर असर पड़ सकता है. इसका सीधा असर आम लोगों की रसोई तक पहुंच सकता है, क्योंकि कम उत्पादन से खाद्यान्न और सब्जियों की कीमतें बढ़ने का खतरा रहता है.
IMD ने क्या कहा
- मौसम विभाग के अनुसार 2026 में मानसून की बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) का करीब 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है.
- वहीं जून महीने में बारिश सामान्य से थोड़ी कम यानी 92 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है.
- IMD का कहना है कि प्रशांत महासागर में मौजूद मौजूदा परिस्थितियां धीरे-धीरे अल नीनो की तरफ बढ़ रही हैं.
- मौसम विभाग ने 92 प्रतिशत संभावना जताई है कि मानसून सीजन के दौरान अल नीनो की स्थिति बनी रह सकती है.
अल नीनो क्यों बढ़ा रहा चिंता
अल नीनो एक मौसमीय स्थिति है, जिसका भारत में अक्सर कमजोर मानसून से संबंध माना जाता है. इसके कारण तापमान बढ़ सकता है और कई इलाकों में बारिश का वितरण असमान हो सकता है. IMD के मुताबिक जून में अल नीनो का असर हल्का रह सकता है, लेकिन जुलाई और अगस्त में यह और मजबूत हो सकता है. सितंबर तक इसके मध्यम से मजबूत स्तर तक पहुंचने की संभावना है.
| पैरामीटर | अनुमान |
|---|---|
| 2026 मानसून वर्षा | LPA का 90% |
| जून 2026 वर्षा | LPA का 92% |
| एल नीनो बनने की संभावना | 92% |
| पूर्वोत्तर भारत में वर्षा | LPA का 94%-106% (सामान्य) |
| उत्तर-पश्चिम भारत | LPA के 92% से कम |
| मानसून सीजन | जून से सितंबर |
| भारत की सालाना बारिश में मानसून का योगदान | लगभग 70% |
किन इलाकों में कम हो सकती है बारिश
- मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि देश के कई कृषि प्रधान क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है.
- उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश औसत से कम रहने का अनुमान है.
- सबसे ज्यादा चिंता उन क्षेत्रों को लेकर है जहां खेती मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर है.
- इन इलाकों में कम बारिश का असर सीधे फसल उत्पादन पर पड़ सकता है.
- हालांकि पूर्वोत्तर भारत के लिए राहत की खबर है. मौसम विभाग का अनुमान है कि यहां सामान्य स्तर की बारिश हो सकती है.
महंगाई बढ़ने का भी खतरा
कमजोर मानसून का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहता. यदि फसल उत्पादन घटता है तो खाद्यान्न, दाल, फल और सब्जियों की कीमतें बढ़ सकती हैं. पहले से बढ़ती महंगाई और वैश्विक तनाव के बीच कमजोर मानसून सरकार के लिए नई चुनौती बन सकता है. मानसून का सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई, जलाशयों के भराव और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. इसलिए इस साल मानसून पर पूरे देश की नजर बनी हुई है.
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