एनर्जी संकट के बीच भारत बना इस पड़ोसी देश का सहारा, किया 38000 मीट्रिक टन पेट्रोल-डीजल सप्लाई

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने श्रीलंका को 38,000 मीट्रिक टन पेट्रोलियम भेजकर बड़ी राहत दी है. इस आपात मदद से वहां की बिगड़ती ईंधन आपूर्ति को संभालने में मदद मिली है. इसी के साथ श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर भारत का धन्यवाद भी किया.

भारत ने की श्रीलंका की मदद! Image Credit: @Money9live

India Send Petroleum Product to Sri Lanka: पश्चिमी एशिया में जारी तनाव के कारण ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर पड़े असर के बीच भारत ने एक बार फिर पड़ोसी देश श्रीलंका की मदद के लिए तेजी से कदम उठाया है. भारत ने श्रीलंका को कुल 38,000 मीट्रिक टन पेट्रोलियम उत्पाद भेजे हैं, जिसमें 20,000 मीट्रिक टन डीजल और 18,000 मीट्रिक टन पेट्रोल शामिल है. यह खेप 28 मार्च को कोलंबो पहुंच चुकी है, जिससे वहां की ईंधन आपूर्ति को राहत मिली है.

पीएम मोदी से श्रीलंका ने की बातचीत

यह मदद भारत और श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व के बीच हाल ही में हुई बातचीत के बाद सामने आई. 24 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुर कुमार दिसानायके के बीच फोन पर चर्चा हुई थी, जिसके बाद भारत ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ईंधन भेजने की प्रक्रिया तेज की. इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अपने श्रीलंकाई समकक्ष से बातचीत कर स्थिति पर समन्वय बनाया था.

दरअसल, श्रीलंका को मार्च महीने के लिए ईंधन की आपूर्ति पश्चिमी एशिया और सिंगापुर से होनी थी, लेकिन वहां चल रहे संघर्ष के कारण सप्लायर्स ने सप्लाई में असमर्थता जताते हुए फोर्स मेज्योर लागू कर दिया. जहाजों की उपलब्धता में कमी और सप्लाई चेन बाधित होने से स्थिति और बिगड़ गई. ऐसे में श्रीलंका ने भारत से आपातकालीन मदद की गुहार लगाई.

श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने जताया आभार

भारत की ओर से यह सहायता इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की सहयोगी कंपनी लंका IOC के जरिए दी गई है. भारतीय उच्चायोग ने स्पष्ट किया कि यह कदम श्रीलंका में ईंधन आपूर्ति को बनाए रखने और संकट को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है. श्रीलंका के राष्ट्रपति ने भारत के इस त्वरित सहयोग के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया है.

उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि ऊर्जा संकट के इस दौर में भारत की मदद बेहद अहम साबित हुई है. वहीं, श्रीलंका के सांसद नमल राजपक्षे ने भी भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति की सराहना करते हुए इसे संकट के समय सच्ची साझेदारी का उदाहरण बताया.

श्रीलंका ने उठाए कई सख्त कदम

दूसरी ओर, श्रीलंका में ऊर्जा संकट का असर आम जीवन पर साफ दिखाई दे रहा है. ईंधन की बचत के लिए सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं, जिनमें चार दिन का वर्किंग वीक, सरकारी दफ्तरों में बिजली खपत कम करना और रिमोट वर्क को बढ़ावा देना शामिल है. स्कूल, यूनिवर्सिटी और कई सरकारी संस्थान सीमित समय के लिए ही खुल रहे हैं.

साथ ही वैकल्पिक सोर्स की तलाश भी जारी

सरकार ने बिजली खपत में 25 फीसदी तक कटौती का लक्ष्य रखा है, जिसके तहत स्ट्रीट लाइट बंद करने और एसी के बजाय पंखों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है. साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को रात के बजाय दिन में चार्जिंग करने की सलाह दी गई है, ताकि पावर ग्रिड पर दबाव कम हो सके. इस बीच, श्रीलंका वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में भी जुटा है. रूस के साथ तेल आपूर्ति को लेकर बातचीत शुरू हो चुकी है, जबकि ईरान से भी कच्चे तेल की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं.

ये भी पढ़ें- ‘मन की बात’ में बोले PM मोदी, जियोपॉलिटिकल टेंशन से बढ़ा खतरा! दुनिया में गहरा सकता है फ्यूल संकट; अफवाहों से रहें दूर