फ्यूल ड्यूटी में बड़े बदलाव के बाद बढ़ी अनिश्चितता, रिलायंस SEZ एक्सपोर्ट पर टैक्स को लेकर बाजार में सस्पेंस

भारत में फ्यूल ड्यूटी स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव के बाद डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी लागू कर दी गई है, जिससे ऑयल सेक्टर में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है. खासतौर पर रिलायंस की SEZ रिफाइनरी पर टैक्स लागू होगा या नहीं, इस पर बाजार की नजर टिकी है. इस फैसले से जहां ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को राहत मिली है, वहीं रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव की आशंका है.

फ्यूल ड्यूटी Image Credit: AI/canva

Reliance SEZ Refinery: भारत में फ्यूल ड्यूटी स्ट्रक्चर में हालिया बदलाव के बाद अब सबसे बड़ी अनिश्चितता रिलायंस के SEZ रिफाइनरी से होने वाले एक्सपोर्ट पर लगने वाले टैक्स को लेकर बनी हुई है. सरकार ने 26 मार्च से डीजल और ATF पर भारी एक्सपोर्ट ड्यूटी लागू की है, जिससे रिफाइनिंग सेक्टर और सरकारी रेवेन्यू दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि SEZ यूनिट को पहले की तरह छूट मिलेगी या नहीं, और यही आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करेगा.

क्या है नया टैक्स स्ट्रक्चर

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 29.50 रुपये प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई है, जबकि पेट्रोल को इस दायरे से बाहर रखा गया है. इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाई गई है, जिससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को राहत मिली है.

रिलायंस के लिए क्यों अहम है फैसला

रिलायंस के जामनगर में दो रिफाइनरी हैं, जिनमें से एक घरेलू बाजार के लिए और दूसरी पूरी तरह एक्सपोर्ट के लिए SEZ यूनिट है. अगर SEZ एक्सपोर्ट को छूट मिलती है, तो कंपनी के मार्जिन पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. लेकिन अगर इस पर भी टैक्स लागू होता है, तो डीजल और ATF एक्सपोर्ट से मिलने वाला मुनाफा काफी घट सकता है.

ओएमसी को कितना फायदा

नए बदलाव से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को सीधा फायदा मिला है. पेट्रोल और डीजल पर होने वाले मार्केटिंग लॉस में बड़ी कमी आई है. पहले जहां यह नुकसान 35-40 रुपये प्रति लीटर तक था, अब यह घटकर 19-23 रुपये प्रति लीटर रह गया है. इससे कंपनियों की बैलेंस शीट बेहतर होगी और क्रूड प्राइस के हिसाब से उनका ब्रेकईवन लेवल भी बढ़ा है.

सरकार के रेवेन्यू पर असर

इन बदलावों का असर सरकारी खजाने पर भी पड़ेगा. अनुमान है कि बिना छूट के सरकार को करीब 80,000 करोड़ रुपये का असर होगा, जबकि अगर SEZ को छूट मिलती है तो यह असर बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. ऐसे में सरकार को आगे और पॉलिसी एडजस्टमेंट करना पड़ सकता है.

आगे क्या देखना होगा

आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि SEZ एक्सपोर्ट को टैक्स से छूट मिलेगी या नहीं. इसके अलावा, राज्य चुनावों के बाद रिटेल फ्यूल प्राइस में बदलाव और क्रूड ऑयल की वैश्विक कीमतें भी सेक्टर की दिशा तय करेंगी. फिलहाल मजबूत ग्लोबल मार्जिन के कारण एक्सपोर्ट अभी भी फायदे में हैं, लेकिन पॉलिसी क्लैरिटी के बिना अनिश्चितता बनी रहेगी.

यह भी पढ़ें: हर शेयर पर ₹86 का डिविडेंड देने जा रही ये कंपनी, 2 अप्रैल है रिकॉर्ड डेट; 5 साल में 362% चढ़ चुका है भाव