IPO में अप्‍लाई करने पर बढ़ जाएगा शेयर मिलने का चांस! भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां

अगर आप भी आईपीओ का अलॉटमेंट चाहते हैं. बार-बार कोशिश करने के बाद भी नहीं मिल पा रहा है, तो कहीं आप ये गलतियां तो नहीं कर रहे हैं. इन 5 गलतियों से अगर आप बच गए. तो आपके अलॉटमेंट का चान्स बढ़ जाएगा. आइए जानते हैं किन गलतियों को करने से आपको बचना है.

आईपीओ Image Credit: GettyImages

सितंबर महीने में आईपीओ का नया रिकॉर्ड बना है. बजाज हाउसिंग फाइनेंस के आईपीओ को अब तक के इतिहास में सबसे ज्यादा सब्सक्राइब किया गया. काफी सारे IPOs को हाई लिस्टिंग गेन मिला है. इन सबके बाद अगर आप ये सोचते हैं कि इतनी बार अप्लाई करने के बाद भी  मुझे अलॉटमेंट नहीं मिला. तो आप ठीक जगह हैं. हालांकि, आईपीओ किसे अलॉट होगा ये कहीं न कहीं किस्मत के ऊपर होता है, लेकिन कुछ बेसिक गलतियां ऐसी होती हैं, जिन्हें आप करते हैं तो फिर आईपीओ अलॉटमेंट की संभावना बहुत कम हो जाती है. हम आपको ऐसी 5 गलतियों के बारे में बताएंगे, जिनसे आपको बचना है.

एक पैन कार्ड से एक बार ही अप्लाई करें

अक्सर होता है कि आईपीओ आने से पहले मार्केट में एक माहौल सा बन जाता है. सारे IPOs के साथ ऐसा नहीं होता है. लेकिन, कई बार ऐसी स्थितियां बनती हैं कि आप ये सोचने लगते हैं कि इस आईपीओ में तो निवेश करना ही है. उसी उत्साह में आप एक पैन कार्ड से कई बार अप्लाई कर देते हैं. ऐसा करने से आपके अलॉटमेंट की संभावना कम हो जाती है. तो इससे आपको बचना है.

हायर प्राइस पर बिट करें

अगर आप इश्यू प्राइस के लोअर बैंड से सब्सक्रिप्शन की कोशिश करते हैं तो आपके अलॉटमेंट की संभावना कम हो जाती है, इसलिए हमेशा कोशिश करें की हायर प्राइस पर ही बिट करें.

इनवैलिड डिटेल भरने से बचे
 

कई बार जल्दबाजी में आप अप्लाई करते समय गलत पैन नंबर और यूपीआई आई डाल देते हैं. जिसकी वजह से आपका एप्लीकेशन कैंसिल हो जाता हैं. तो जब भी आईपीओ के लिए अप्लाई करें तो उसके पहले अच्छी तरह से एक जांच करने के बाद ही जमा करें.

यूपीआई मैंडेट समय से पहले क्लीयर करें

कई बार होता है कि यूपीआई मैंडेट क्लीयर नहीं होने की  वजह से आपका अलॉटमेंट रुक जाता है.
जैसे कि मान लीजिए आपने 20000 रुपये इश्यू के लिए अप्लाई किया है. और बैंक सर्वर में कोई दिक्कत हो गई और मैंडेट क्लीयर न हो पाया तो आपको अलॉटमेंट नहीं मिलेगा.

एप्लीकेशन आधा भर दिया

कई बार लापरवाही में  हम आईपीओ क्लोज होने वाला रहता है, तब अप्लाई करते हैं. आखिरी में जल्दबाजी में अप्लाई करते समय कुछ गलतियां हो जाती हैं, जिनकी वजह से एप्लीकेशन अधूरा रह जाता है. बाद में अप्लाई करने से ये भी होता है कि कई बार आईपीओ ज्यादा सब्सक्राइब हो जाता है. उस स्थिति में भी अलॉटमेंट के चांसेस कम हो जाते हैं.

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