इस साल स्टील कंपनियों के IPO की भरमार! ₹4000 करोड़ जुटाने की तैयारी, Jindal Supreme से R.K. Steel तक कतार में
सरकारी नीति में हुए बदलाव के बाद एक साइक्लिकल सेक्टर में नई हलचल दिख रही है. बेहतर कीमत संकेत, फंडरेजिंग की वापसी और निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे मजबूत होता नजर आ रहा है. आने वाले महीनों में बाजार में कई बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं.
Steel company IPO: स्टील सेक्टर में लंबे समय बाद फिर से हलचल बढ़ती दिख रही है. आयात पर सरकार की सख्ती और कीमतों में बेहतर स्थिरता के संकेतों ने कंपनियों का भरोसा लौटाया है. इसी माहौल में स्टील और इससे जुड़ी कंपनियां अगले 12 से 18 महीनों में IPO के जरिए बाजार से बड़ी रकम जुटाने की तैयारी में हैं. अनुमान है कि यह कलेक्शन करीब 4,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जिससे सेक्टर में नई पूंजी और विस्तार की रफ्तार बढ़ेगी.
सरकार ने 21 अप्रैल 2025 से चुनिंदा फ्लैट स्टील आयात पर तीन साल के लिए सेफगार्ड ड्यूटी लागू की है. इस कदम से आयातित स्टील महंगा हुआ है और घरेलू उत्पादकों को कीमतों में अंडरकटिंग से राहत मिली है. नतीजतन, निकट अवधि में कीमतों की दृश्यता बेहतर हुई है, जिसे निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
क्यों फिर शुरू हुई IPO की तैयारी
पीटीआई ने इंडस्ट्री ऑफिशियल के हवाले से रिपोर्ट किया है कि 2025 में स्टील सेक्टर के लिए IPO बाजार सुस्त रहा. कुछ ही मेनबोर्ड इश्यू आए और कई लिस्टिंग के बाद टिक नहीं पाए. अब सेफगार्ड ड्यूटी के बाद आय, मार्जिन और कीमतों को लेकर भरोसा बढ़ा है. इसी वजह से वे कंपनियां, जिन्होंने कमजोर बाजार और आयात दबाव के कारण अपने फंडरेजिंग प्लान टाल दिए थे, दोबारा IPO की ओर देख रही हैं.
मेनबोर्ड और SME- दोनों में लंबी कतार
मर्चेंट बैंकरों के मुताबिक, मेनबोर्ड पर AOne Steels India Ltd, Jindal Supreme (India) Ltd, Steel Infra Solutions Co. Ltd, Rajputana Stainless Ltd, German Green Steel & Power Ltd, Renny Strips Ltd, R.K. Steel Manufacturing Co. Ltd और Karamtara Engineering Ltd जैसे नाम IPO की तैयारी में हैं.
SME सेगमेंट में R.P. Multimetals Ltd, Elec Steel Processing Industries Ltd और Kasturi Metal Composite Ltd को मंजूरी मिल चुकी है और सही समय का इंतजार है.
कंपनियां IPO से जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल क्षमता विस्तार, वैल्यू-एडेड स्टील सेगमेंट में एंट्री, इंटीग्रेशन मजबूत करने और कर्ज घटाने में करना चाहती हैं. कुछ इश्यू में ग्रीन स्टील पहलों के लिए भी फंड आवंटन की योजना है, ताकि ESG प्रोफाइल बेहतर हो और लंबी अवधि में वैल्यूएशन को सपोर्ट मिले.
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निवेशकों के लिए क्या मायने
कैपिटल मार्केट्स के नजरिए से सेफगार्ड ड्यूटी एक निकट अवधि का सहारा है. हालांकि, टिकाऊ वैल्यूएशन के लिए कमाई की निरंतरता, बैलेंस शीट की मजबूती और ड्यूटी अवधि के बाद की दृश्यता अहम रहेगी. ब्रोकरेज का मानना है कि FY26–28 में भारतीय स्टील कंपनियों की वॉल्यूम ग्रोथ 6–9 प्रतिशत CAGR रह सकती है, और ड्यूटी से घरेलू कीमतों को सपोर्ट मिलेगा.
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