Reliance Jio IPO खुलने में होगी देरी! जानें क्यों टला 37,500 करोड़ रुपये का प्लान, क्या नई तारीख हुई तय?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Reliance Industries के Jio Platforms IPO में देरी की आशंका जताई गई है. CreditSights के मुताबिक, करीब $4 billion के इस IPO को अब FY27 के दूसरे हाफ तक टाला जा सकता है, जबकि कंपनी का फोकस capex, debt reduction और telecom growth पर बना हुआ है.

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रिलायंस इंडस्ट्रीज के निवेशकों और Jio की एंट्री का इंतजार थोड़ा लंबा हो सकता है. फिच ग्रुप की कंपनी ‘क्रेडिटसाइट्स’ (CreditSights) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते रिलायंस जियो (Jio Platforms) की लिस्टिंग अब वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही तक खिसक सकती है. पहले चर्चा थी कि यह मेगा आईपीओ इसी साल मई तक दस्तक दे सकता है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों ने समीकरण बदल दिए हैं.

IPO से ₹37,500 करोड़ जुटाने की तैयारी

बाजार में चर्चा है कि रिलायंस अपनी डिजिटल इकाई ‘जियो’ में 2.5 से 3 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर लगभग 4 अरब डॉलर (करीब 37,500 करोड़ रुपये) जुटाने की योजना बना रही है. वर्तमान में रिलायंस की जियो में 67 फीसदी हिस्सेदारी है. इस आईपीओ से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और भविष्य के बड़े प्रोजेक्ट्स (Capex) के लिए किया जाएगा, जिससे भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के खिलाफ जियो की स्थिति और मजबूत होगी.

FY27 में निवेश और विस्तार का रोडमैप

क्रेडिटसाइट्स के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज वित्त वर्ष 2027 में अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) को बढ़ाकर 1.5 से 1.6 लाख करोड़ रुपये कर सकती है, जो पिछले साल 1.3 लाख करोड़ रुपये था. यह भारी-भरकम निवेश मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में होगा:

  • रिन्यूएबल एनर्जी और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग: कच्छ में 150 गीगावाट के सौर और ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है.
  • डेटा सेंटर्स: अगले कुछ तिमाहियों में डेटा सेंटर बिजनेस को लेकर बड़े खुलासे हो सकते हैं.
  • पेट्रोकेमिकल्स विस्तार: अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए कंपनी लगातार निवेश कर रही है.

ट्रम्प के ‘300 अरब डॉलर’ के डील का सच

रिपोर्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा बताए गए 300 अरब डॉलर के “ऐतिहासिक सौदे” पर भी स्थिति स्पष्ट की गई है. क्रेडिटसाइट्स का कहना है कि यह रिलायंस द्वारा अगले 20 वर्षों में अमेरिकी शेल ऑयल और रिफाइंड उत्पादों की खरीद की कुल वैल्यू है. रिलायंस का वास्तविक निवेश (Capex) इसमें काफी कम, यानी 1 अरब डॉलर (करीब 9,400 करोड़ रुपये) से भी कम रहने का अनुमान है.

O2C और टेलीकॉम सेक्टर में ग्रोथ की उम्मीद

कठिन वैश्विक हालातों के बावजूद रिलायंस का प्रदर्शन दमदार रहने की उम्मीद है:

  • ऑयल-टू-केमिकल (O2C): पश्चिम एशिया संकट के कारण ट्रांसपोर्ट फ्यूल मार्जिन बढ़ने से रिलायंस को फायदा मिल सकता है, खासकर एक्सपोर्ट मार्केट में.
  • टेलीकॉम: वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में टैरिफ (Mobile Plan) की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है. इसके बिना भी कंपनी को 4-5% की ऑर्गेनिक ग्रोथ (ARPU) की उम्मीद है.
  • रिटेल: नए स्टोर खुलने और पुराने स्टोर्स की कार्यक्षमता बढ़ने से रिटेल सेक्टर में भी अच्छी तेजी का अनुमान है.

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रिलायंस इंडस्ट्रीज एक मजबूत बैलेंस शीट के साथ नए वित्त वर्ष में प्रवेश कर रही है. भले ही जियो का आईपीओ कुछ महीनों के लिए टल जाए, लेकिन न्यू एनर्जी और डेटा सेंटर जैसे सेक्टर कंपनी के भविष्य की ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए तैयार हैं.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.