Reliance Jio के मौजूदा शेयरहोल्डर्स बेच सकते हैं अपनी 8 फीसदी हिस्सेदारी, जानें- क्या है IPO का OFS प्लान
यह बातचीत टेलीकॉम से लेकर AI तक के क्षेत्र में काम करने वाली इस कंपनी की मुंबई में होने वाली आगामी लिस्टिंग के दौरान, निवेशकों को 8 फीसदी तक की व्यक्तिगत हिस्सेदारी बेचने के संबंध में हुई है. IPO प्रक्रिया से जुड़े दो सूत्रों में से एक ने बताया, 'यह हिस्सेदारी बिक्री हर किसी के लिए लगभग 8 फीसदी होगी.'
भारतीय अरबपति मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स ने 13 बड़े विदेशी निवेशकों के साथ बातचीत की है. यह बातचीत टेलीकॉम से लेकर AI तक के क्षेत्र में काम करने वाली इस कंपनी की मुंबई में होने वाली आगामी लिस्टिंग के दौरान, निवेशकों को 8 फीसदी तक की व्यक्तिगत हिस्सेदारी बेचने के संबंध में हुई है. न्यूज एजेंसी रायटर्स ने सूत्रों के हवाले से इस संबंध में जानकारी दी. अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स इस सप्ताह की शुरुआत में ही मुंबई में अपने IPO की मंजूरी के लिए आवेदन करने वाली है.
किसकी कितनी हिस्सेदारी?
इस सूची में शामिल बड़े निवेशकों में मेटा (9.99% हिस्सेदारी के साथ) और गूगल (7.73% हिस्सेदारी के साथ) प्रमुख हैं, जिनके बाद विस्टा इक्विटी पार्टनर्स और KKR का स्थान आता है. तीन खाड़ी देशों के सॉवरेन फंड- पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड, मुबाडाला और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी भी इसमें निवेशक हैं.
कितनी हिस्सेदारी बेचनी होगी?
IPO प्रक्रिया से जुड़े दो सूत्रों में से एक ने बताया, ‘यह हिस्सेदारी बिक्री हर किसी के लिए लगभग 8 फीसदी होगी. उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी, क्योंकि ये चर्चाएं गोपनीय थीं. KKR ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जबकि रिलायंस और अन्य निवेशकों ने रॉयटर्स द्वारा टिप्पणी के लिए किए गए अनुरोधों का तत्काल कोई जवाब नहीं दिया.
रॉयटर्स के अनुसार, हर इन्वेस्टर द्वारा अपनी होल्डिंग का 8 फीसदी हिस्सा बेचना, असल में रिलायंस जियो के कुल बकाया शेयरों का लगभग 2.5 फीसदी हिस्सा लिस्टिंग में ऑफर करने जैसा है, जैसा कि उसने प्लान किया है.
उदाहरण के लिए, मेटा द्वारा अपनी 9.99 फीसदी होल्डिंग का 8 फीसदी हिस्सा बेचना, यानी इस अमेरिकी टेक दिग्गज द्वारा 0.8% हिस्सेदारी बेचने जैसा होगा. हालांकि, बातचीत हर इन्वेस्टर द्वारा अपनी होल्डिंग का 8% हिस्सा बेचने पर केंद्रित रही है, फिर भी आखिरी आंकड़े बदल सकते हैं.
ऑफर-फॉर-सेल
रिलायंस जियो का IPO ‘ऑफर-फॉर-सेल’ के तौर पर तैयार किया जा रहा है. यह भारत में एक आम रणनीति है, जिसमें कंपनियां कोई नया फंड नहीं जुटातीं, बल्कि मौजूदा शेयरहोल्डर अपनी हिस्सेदारी बेचते हैं, जिसे आम जनता और दूसरे इन्वेस्टर खरीदते हैं.
IPO की योजनाओं से परिचित दूसरे सूत्र ने कहा, ‘कुल हिस्सेदारी बिक्री 2.5% से 3% के बीच होगी. रिलायंस रिटेल इन्वेस्टर के लिए कुछ मुनाफा छोड़ना चाहती है और कंपनी की वैल्यूएशन पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है.’
जियो की अनुमानित वैल्यूएशन
साल 2020 में जियो प्लेटफॉर्म्स ने विदेशी इन्वेस्टर को हिस्सेदारी बेचकर 20.5 अरब डॉलर से ज्यादा जुटाए थे. नवंबर में, इन्वेस्टमेंट बैंक जेफरीज ने रिलायंस जियो की वैल्यूएशन 180 अरब डॉलर आंकी थी. सूत्रों ने जनवरी में रॉयटर्स को बताया कि IPO की वैल्यू 4 अरब डॉलर तक की हो सकती है, हालांकि आखिरी आंकड़े बाद में ही तय होंगे. रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स ने मुंबई स्टॉक लिस्टिंग को मैनेज करने के लिए 17 बैंकों को हायर किया है.
