SEBI ने IPO साइज में बदलाव की छूट 6 महीने बढ़ाई, कंपनियों को बाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए मिला अधिक समय
पहले के नियमों के तहत, अगर इश्यू साइज में 20% से ज्यादा का बदलाव होता था, तो कंपनियों को नए ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट्स फाइल करने पड़ते थे. यह समय-सीमा तब बढ़ाई गई है जब बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है.
Highlights
- ज्यादा कंप्लायंस लागत उठाए बिना बाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने में मदद मिलेगी.
- DRH प्रॉस्पेक्टस के संबंधित सेक्शन को अपडेट करना होगा.
- इस कदम से कैपिटल जुटाने की प्रक्रिया में तेजी आएगी.
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने मंगलवार को लिस्टिंग कराने वाली कंपनियों को दी गई उस छूट को छह महीने और बढ़ा दिया, जिसके तहत वे बिना नई रेगुलेटरी मंजूरी के अपने इश्यू का साइज घटा या बढ़ा सकती हैं. इससे ऐसी कंपनियों को लिस्टिंग से जुड़ी ज्यादा कंप्लायंस लागत उठाए बिना बाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने में मदद मिलेगी.
यह छूट 31 मार्च, 2027 या उससे पहले खुलने वाले इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) पर लागू होगी. पहले, यह छूट 30 सितंबर, 2026 तक फाइल किए गए प्रॉस्पेक्टस के लिए उपलब्ध थी.
अपडेटेड ऑफर डॉक्यूमेंट
संशोधित नियमों के तहत, लीड मैनेजर इश्यू के साइज में बदलाव दिखाते हुए एक अपडेटेड ऑफर डॉक्यूमेंट फाइल कर सकते हैं, बशर्ते इश्यू का मुख्य मकसद वही रहे. DRH प्रॉस्पेक्टस के संबंधित सेक्शन को अपडेट करना होगा और एक ऐडेंडम (पूरक जानकारी) सार्वजनिक करना होगा.
उन्हें सेबी के नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा, जरूरी जांच-पड़ताल (ड्यू डिलिजेंस) करनी होगी और बदलाव के लिए कारण भी बताना होगा.
फंड जुटाने की प्रक्रिया में आएगी तेजी
AIBI ने एक बयान में कहा कि यह छूट सेबी के सामने उनकी उन दलीलों के बाद दी गई है, जिनमें इश्यूअर और मर्चेंट बैंकरों को नए इश्यू साइज में बदलाव की जरूरत पड़ने पर आने वाली चुनौतियों का जिक्र किया गया था. इस कदम से कैपिटल जुटाने की प्रक्रिया में तेजी आएगी और कंपनियां बदलती बिजनेस जरूरतों और बाजार की स्थितियों के हिसाब से काम कर पाएंगी.
पहले करना होता था अधिक बदलाव
पहले के नियमों के तहत, अगर इश्यू साइज में 20% से ज्यादा का बदलाव होता था, तो कंपनियों को नए ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट्स फाइल करने पड़ते थे. यह छूट इसलिए दी गई थी ताकि कंपनियां रेगुलेटरी फाइलिंग की प्रक्रिया को दोबारा शुरू किए बिना बाजार की बदलती स्थितियों के हिसाब से बदलाव कर सकें.
बाजार में उतार-चढ़ाव
यह समय-सीमा तब बढ़ाई गई है जब बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. यह उतार-चढ़ाव निवेशकों की दिलचस्पी और कंपनियों द्वारा पब्लिक इश्यू के जरिए जुटाई जाने वाली पूंजी की मात्रा पर असर डाल सकता है. जो कंपनियां इस छूट का फायदा उठा रही हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि IPO का मुख्य मकसद न बदले.
उन्हें इश्यू के साइज में बदलाव करने की वजह भी बतानी होगी, और बुक-रनिंग लीड मैनेजर्स (BRLMs) को यह सर्टिफाई करना होगा कि सभी जरूरी रेगुलेटरी नियमों का पालन किया गया है.
Latest Stories
Jio IPO की धूम! 20 अरब डॉलर से अधिक की बोलियां मिलने की उम्मीद, कतार में निवेशक; बनेगा सबसे बड़ा पब्लिक ऑफर
Jio IPO: लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में मचा तहलका, ₹180 तक पहुंचा GMP,16% लिस्टिंग गेन का संकेत
Jio Platforms IPO: कंपनी में किसकी कितनी हिस्सेदारी, Reliance के अलावा Meta-Google भी बड़े हिस्सेदार
