SEBI ने इक्विटी म्यूचुअल फंड नियमों में किया बड़ा बदलाव, ओवरलैप पर होगी सख्त निगरानी
SEBI ने 26 फरवरी 2026 को इक्विटी म्यूचुअल फंड नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए नया सर्कुलर जारी किया है. संशोधित नियमों के तहत फोकस्ड, वैल्यू, कॉन्ट्रा और डिविडेंड यील्ड फंड्स में न्यूनतम 80 फीसदी निवेश इक्विटी में अनिवार्य किया गया है. सेक्टरल और थीमैटिक फंड्स के लिए भी सख्त ओवरलैप सीमा तय की गई है, जिसकी तिमाही समीक्षा होगी. इक्विटी स्कीमों की संख्या 11 से बढ़ाकर 13 कर दी गई है.
SEBI mutual fund rules: इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में अहम बदलाव किया गया है. मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया ने 26 फरवरी 2026 को “कैटेगराइजेशन एंड रेशनलाइजेशन ऑफ म्यूचुअल फंड स्कीम्स” पर नया सर्कुलर जारी किया है. इस सर्कुलर के तहत इक्विटी स्कीमों में न्यूनतम इक्विटी निवेश की सीमा बढ़ाई गई है और पोर्टफोलियो ओवरलैप को लेकर सख्त नियम लागू किए गए हैं. नए नियमों का मकसद पारदर्शिता बढ़ाना और स्कीमों की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करना है.
इक्विटी अलॉटमेंट की सीमा बढ़ी
संशोधित नियमों के तहत फोकस्ड, वैल्यू, कॉन्ट्रा और डिविडेंड यील्ड फंड्स में न्यूनतम 80 फीसदी निवेश इक्विटी और संबंधित इंस्ट्रूमेंट्स में अनिवार्य कर दिया गया है. पहले इन श्रेणियों के लिए यह सीमा 65 फीसदी थी. इससे इन स्कीमों की वास्तविक इक्विटी पहचान और मजबूत होगी. सेक्टरल और थीमैटिक फंड्स के लिए भी कम से कम 80 फीसदी निवेश संबंधित सेक्टर या थीम में करना जरूरी होगा. पहले सेक्टरल और थीमैटिक स्कीमों को एक साथ रखा गया था, लेकिन अब दोनों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है.
ओवरलैप नियम अब होंगे सख्त
SEBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि सेक्टरल और थीमैटिक इक्विटी स्कीमों के पोर्टफोलियो में 50 फीसदी से ज्यादा ओवरलैप नहीं होना चाहिए. यह गणना अब तिमाही आधार पर की जाएगी. मौजूदा स्कीमों को इन मानकों के अनुरूप ढलने के लिए 3 वर्ष का समय दिया गया है. अगर तय अवधि के बाद भी कोई स्कीम ओवरलैप मानदंड पूरा नहीं करती है, तो उसे अन्य स्कीम के साथ मर्ज करना अनिवार्य होगा.
वैल्यू और कॉन्ट्रा फंड दोनों की अनुमति
पहले किसी फंड हाउस को वैल्यू फंड या कॉन्ट्रा फंड में से केवल एक की पेशकश की अनुमति थी. नए नियमों के तहत अब एसेट मैनेजमेंट कंपनियां दोनों प्रकार की स्कीमें लॉन्च कर सकती हैं, बशर्ते दोनों के बीच पोर्टफोलियो ओवरलैप 50 फीसदी से अधिक न हो.
अब 13 प्रकार की इक्विटी स्कीमें
नए सर्कुलर के तहत इक्विटी ओरिएंटेड स्कीमों की संख्या 11 से बढ़ाकर 13 कर दी गई है. इनमें मल्टी कैप, लार्ज कैप, लार्ज एंड मिड कैप, मिड कैप, स्मॉल कैप, फ्लेक्सी कैप, डिविडेंड यील्ड, वैल्यू, कॉन्ट्रा, फोकस्ड, सेक्टरल, थीमैटिक और ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड शामिल हैं. ईएलएसएस का नाम भी संशोधित कर “ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड” किया गया है और इसमें भी न्यूनतम 80 फीसदी निवेश इक्विटी में अनिवार्य किया गया है.
लाइफ साइकिल फंड की नई श्रेणी
नए वर्गीकरण में “लाइफ साइकिल फंड” नाम से नई श्रेणी जोड़ी गई है. ये स्कीमें ग्लाइड पाथ रणनीति अपनाते हुए इक्विटी, डेट, इनविट्स, ईटीसीडी और गोल्ड व सिल्वर ईटीएफ जैसी विभिन्न एसेट क्लास में निवेश करेंगी. इससे निवेशकों को लक्ष्य आधारित और आयु आधारित निवेश विकल्प मिल सकेंगे.
नामकरण और पारदर्शिता पर जोर
SEBI ने स्कीमों के नामकरण को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अब स्कीम के नाम में रिटर्न को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने वाले शब्दों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी. इंडस्ट्री बॉडी के साथ मिलकर इन नियमों के कार्यान्वयन के लिए एक समान नीति बनाई जाएगी. नए नियमों को जटिलता कम करने, पारदर्शिता बढ़ाने और निवेशकों के लिए स्कीमों की तुलना आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
यह भी पढ़ें: Gold-Silver Price Today 27-02-2026: लगातार दूसरे दिन टूटी चांदी, लेकिन सोना हुआ महंगा; जानें ताजा भाव
