1 करोड़ रुपये से ज्यादा इनकम है तो ITR भरते समय यह फॉर्म जरूर भरें, नहीं तो आ सकता है नोटिस

अगर वित्त वर्ष 2025 26 में आपकी कुल इनकम 1 करोड़ रुपये से अधिक है तो ITR दाखिल करते समय Schedule AL भरना अनिवार्य होगा. इसमें टैक्सपेयर्स को 31 मार्च 2026 तक की अपनी संपत्तियों और उनसे जुड़ी देनदारियों का पूरा डिटेल देना होगा. इसमें जमीन, मकान, वाहन, गहने, शेयर, नकदी और अन्य कीमती संपत्तियां शामिल हैं.

आपकी कुल इनकम 1 करोड़ रुपये से अधिक है तो ITR दाखिल करते समय Schedule AL भरना अनिवार्य होगा. Image Credit: freepik

ITR Filing 2026: अगर वित्त वर्ष 2025-26 में आपकी कुल इनकम 1 करोड़ रुपये से ज्यादा है तो ITR दाखिल करते समय आपको एक अतिरिक्त नियम का पालन करना होगा. ऐसे टैक्सपेयर के लिए केवल इनकम बताना ही काफी नहीं होगा. उन्हें अपनी संपत्तियों और देनदारियों की जानकारी भी देनी होगी. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने स्पष्ट किया है कि 1 करोड़ रुपये से अधिक आय वाले व्यक्ति और HUF को ITR में Schedule AL भरना अनिवार्य है. गलत या अधूरी जानकारी देने पर विभाग की ओर से नोटिस भी आ सकता है.

क्या है Schedule AL

Schedule AL का मतलब Assets and Liabilities यानी संपत्ति और देनदारियों का डिटेल है. यह उन व्यक्तिगत टैक्सपेयर और HUF पर लागू होता है जिनकी कुल इनकम 1 करोड़ रुपये से अधिक है. ITR 2 और ITR 3 भरने वाले ऐसे टैक्सपेयर को यह जानकारी देना जरूरी होगा. वहीं कंपनियों के लिए ITR 6 में अलग Schedule AL 1 और AL 2 का प्रावधान है.

किन संपत्तियों की देनी होगी जानकारी

Schedule AL में करदाता को 31 मार्च 2026 तक मौजूद अपनी सभी प्रमुख संपत्तियों का डिटेल देना होगा. इसमें जमीन और मकान जैसी अचल संपत्ति, वाहन, गहने, शेयर, सिक्योरिटीज, पुरातात्विक संग्रह, हाथ में मौजूद नकदी और अन्य कीमती संपत्तियां शामिल हैं. इसके साथ इन संपत्तियों से जुड़ी देनदारियों की जानकारी भी देनी होगी.

कैसे तय होगी संपत्ति की वैल्यू

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अनुसार संपत्तियों का वैल्यू उनकी खरीद लागत के आधार पर बताया जाएगा. यदि किसी संपत्ति पर बाद में सुधार का खर्च किया गया है तो उसे भी जोड़ा जा सकता है. अगर संपत्ति गिफ्ट, वसीयत या अन्य तरीके से मिली है तो पिछले मालिक की लागत और उस पर हुए सुधार की लागत के आधार पर मूल्य घोषित किया जाएगा. यदि लागत की जानकारी उपलब्ध नहीं है तो अनुमानित मूल्य भी बताया जा सकता है.

क्यों जरूरी है यह खुलासा

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का कहना है कि कई मामलों में टैक्सपेयर की घोषित इनकम और उनकी संपत्तियों में अंतर पाया गया है. इसी वजह से 1 करोड़ रुपये से अधिक आय वाले लोगों के लिए Schedule AL अनिवार्य किया गया है. इससे विभाग यह जांच कर सकता है कि करदाता की संपत्ति उसकी घोषित आय के अनुरूप है या नहीं. इसका उद्देश्य ट्रांसपेरेंसी बढ़ाना और कर चोरी पर रोक लगाना है.

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इन बातों का भी रखें ध्यान

31 मार्च 2026 तक की स्थिति के अनुसार संपत्तियों और देनदारियों का डिटेल देना होगा. अनिवासी और सामान्य रूप से निवासी नहीं माने जाने वाले ऐसे टैक्सपेयर को केवल भारत में मौजूद संपत्तियों की जानकारी देनी होगी. सभी जानकारियां सही और पूरी भरना जरूरी है ताकि बाद में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से किसी तरह की पूछताछ या नोटिस से बचा जा सके.