EPS 1995 vs EPS 2026: डिजिटल क्लेम से लेकर पेंशन तक, जानें क्या-क्या बदला; जानें नई स्कीम में क्या हुआ बदलाव
EPS 1995 की जगह अब EPS 2026 लागू हो गई है. नई पेंशन योजना में डिजिटल क्लेम प्रक्रिया, 20 दिनों में क्लेम निपटान, देरी होने पर 12 फीसदी सालाना ब्याज और ऑनलाइन सेवाओं जैसे कई बड़े बदलाव किए गए हैं. मौजूदा EPS सदस्यों को दोबारा पंजीकरण कराने की जरूरत भी नहीं होगी.
EPS 1995 vs EPS 2026: देश के करोड़ों संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में बड़ा बदलाव लागू हो गया है. 29 जून 2026 से एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) 2026 प्रभावी हो गई है, जिसने लगभग तीन दशक पुरानी EPS 1995 की जगह ले ली है. नई योजना को कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के अनुरूप तैयार किया गया है. नई योजना में डिजिटल सेवाएं, तय समय में क्लेम निपटान और देरी होने पर ब्याज जैसे कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं. खास बात यह है कि मौजूदा कर्मचारियों को दोबारा पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी. जो कर्मचारी पहले से EPS 1995 के सदस्य हैं, वे स्वतः ही EPS 2026 के सदस्य माने जाएंगे और उनके पुराने अधिकार एवं लाभ पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे.
सदस्यता में क्या बदला
नई EPS 2026 योजना के तहत उन सभी कर्मचारियों की सदस्यता जारी रहेगी, जो पहले से इस योजना का हिस्सा हैं. अब यह योजना कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के तहत आने वाले संस्थानों पर लागू होगी, जबकि EPS 1995, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड्स एंड मिसलेनियस प्रोविजन्स एक्ट, 1952 के तहत आने वाले प्रतिष्ठानों पर आधारित थी. इस बदलाव का कर्मचारियों की सदस्यता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. नई व्यवस्था के तहत रिकॉर्ड और सर्विस का डिजिटलीकरण किया जाएगा, जिससे प्रक्रियाएं पहले की तुलना में अधिक आसान होंगी.
नियोक्ता और सरकार का अंशदान
नई योजना में नियोक्ता का योगदान पहले की तरह पेंशन योग्य वेतन का 8.33 फीसदी ही रहेगा. हालांकि, जिन पात्र कर्मचारियों का वेतन 15,000 रुपये से अधिक है और जो 1 सितंबर 2014 से उच्च पेंशन के दायरे में आते हैं, उनके लिए 9.49 फीसदी तक बढ़े हुए योगदान का भी प्रावधान किया गया है. वहीं, केंद्र सरकार का योगदान भी पहले की तरह 1.16 फीसदी रहेगा. यानी सरकार की ओर से दिए जाने वाले अंशदान में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
न्यूनतम पेंशन और अन्य लाभ पहले जैसे
नई EPS 2026 योजना में कर्मचारियों को मिलने वाले सभी प्रमुख पेंशन लाभ बरकरार रखे गए हैं. इसमें सुपरएन्युएशन पेंशन, अर्ली पेंशन, डिसएबिलिटी पेंशन, विडो पेंशन और अन्य पारिवारिक पेंशन सुविधाएं पहले की तरह मिलती रहेंगी. इसी तरह न्यूनतम मासिक पेंशन की राशि भी 1,000 रुपये ही रखी गई है. यानी पेंशन की राशि में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है.
20 दिन में होगा क्लेम का निपटान
नई EPS 2026 का सबसे बड़ा बदलाव पेंशन क्लेम प्रक्रिया में किया गया है. अब पेंशन क्लेम का निपटान 20 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा. इसके लिए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है. नई व्यवस्था के तहत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, ऑनलाइन फाइलिंग, डिजिटल कंप्लायंस और क्लेम ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी. इससे कर्मचारियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी बनेगी.
देरी होने पर मिलेगा 12 फीसदी ब्याज
EPS 2026 में पहली बार क्लेम के निपटान में देरी होने पर कर्मचारियों के हित में विशेष प्रावधान जोड़ा गया है. यदि तय समय-सीमा के भीतर बिना उचित कारण के किसी कर्मचारी का पेंशन क्लेम नहीं निपटाया जाता, तो संबंधित राशि पर 12 फीसदी सालाना ब्याज देना होगा. EPS 1995 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था. ऐसे में यह बदलाव कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है और इससे समय पर क्लेम निपटान सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी.
पुराने अधिकार पूरी तरह सुरक्षित
नई योजना लागू होने के बावजूद कर्मचारियों की पहले की सेवाएं, जमा लाभ और पेंशन पात्रता पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी. सरकार ने स्पष्ट किया है कि EPS 2026 केवल प्रशासनिक और तकनीकी सुधारों पर केंद्रित है. इससे कर्मचारियों के पहले से अर्जित किसी भी अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
कुल मिलाकर, EPS 2026 का उद्देश्य पेंशन व्यवस्था को अधिक आधुनिक, डिजिटल और जवाबदेह बनाना है. तय समय में क्लेम निपटान, देरी पर ब्याज, ऑनलाइन सेवाएं और रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण जैसे बदलाव करोड़ों कर्मचारियों के लिए पेंशन प्रक्रिया को पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल और पारदर्शी बना सकते हैं.
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