बीते वर्षों का ITR नहीं भरा? इन 2 कानूनी रास्तों से अब भी सुधार सकते हैं अपनी गलती
अगर आप पिछले वर्षों का ITR भरना भूल गए हैं, तो अब भी आपके पास कानूनी विकल्प मौजूद हैं. आयकर विभाग करदाताओं को ‘ITR-U’ और ‘Condonation of Delay’ जैसे दो अहम रास्ते देता है, जिनकी मदद से पुरानी गलती सुधारी जा सकती है या रिफंड का दावा किया जा सकता है. हालांकि दोनों विकल्प अलग परिस्थितियों में लागू होते हैं और इनके नियम भी अलग हैं.

ITR Filing 2026-27: अगर आप पिछले कुछ वित्तीय वर्षों का इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करना भूल गए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. आयकर अधिनियम (Income Tax Act) के तहत ऐसे करदाताओं के लिए अब भी कुछ कानूनी विकल्प मौजूद हैं. हालांकि, आप आगे क्या कदम उठाएंगे, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप रिफंड का दावा करना चाहते हैं, पुरानी गलती सुधारना चाहते हैं या फिर कोई छूटी हुई कमाई घोषित करना चाहते हैं. आयकर विभाग ऐसे मामलों से निपटने के लिए दो मुख्य रास्ते देता है, अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) और कंडोनेशन ऑफ डिले (देरी के लिए माफी). आइए जानते हैं कि आपके मामले में कौन सा विकल्प सही रहेगा.
दोनों में क्या अंतर है?
दोनों ही रास्ते अलग-अलग परिस्थितियों में इस्तेमाल किए जाते हैं:
कंडोनेशन ऑफ डिले: यह एक तरह की राहत प्रणाली है. इसमें करदाता को पुराना या छूटा हुआ रिटर्न दाखिल करने के लिए आयकर विभाग से विशेष अनुमति मांगनी पड़ती है. इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से तब होता है जब आपको टैक्स रिफंड का दावा करना हो या पिछले नुकसान को आगे बढ़ाना हो. इसके लिए विभाग की मंजूरी मिलना जरूरी है.
ITR-U: इसके तहत करदाता स्वेच्छा से अपनी पुरानी गलतियों को सुधार सकता है या अतिरिक्त आय की जानकारी देकर उस पर बनता टैक्स चुका सकता है. ध्यान रहे, इस विकल्प के जरिए आप रिफंड का दावा नहीं कर सकते और न ही अपनी टैक्स देनदारी को कम कर सकते हैं.
6 वर्षों तक की मिल सकती है राहत
अगर आप लंबी बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, परिवार में किसी की मृत्यु, प्राकृतिक आपदा या किसी अन्य गंभीर और वास्तविक कठिनाई के कारण समय पर आईटीआर नहीं भर पाए थे, तो आप ‘कंडोनेशन ऑफ डिले’ की अर्जी लगा सकते हैं. मुख्य नियम और जरूरी बातें:
- 6 साल की छूट: रिफंड या नुकसान को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित असेसमेंट ईयर (Assessment Year) खत्म होने के बाद 6 साल के भीतर यह आवेदन किया जा सकता है.
- किसके लिए है सुविधा: यह नियम सभी करदाताओं पर लागू होता है, चाहे वह नौकरीपेशा हों, वरिष्ठ नागरिक हों, एनआरआई (NRI) हों या फ्रीलांसर.
- अर्जी के लिए जरूरी दस्तावेज: अपनी परेशानी को साबित करने के लिए आपको मेडिकल रिकॉर्ड, मृत्यु प्रमाण पत्र, दुर्घटना या आपदा के सबूत, एनआरआई के मामले में पासपोर्ट/यात्रा दस्तावेज, रिफंड का सबूत और एक शपथ पत्र (Affidavit) या स्पष्टीकरण पत्र देना होगा. विभाग आपके दावों की प्रामाणिकता जांचने के बाद ही उन्हें स्वीकार या अस्वीकार करता है.
यह भी पढ़ें: ITR फाइल करने में हो गई गलती? जानें सुधारने का क्या है तरीका, रिफंड में देरी से बचना है तो चुनें सही फॉर्म
क्या पुराना रिटर्न छूटने पर इस साल का ITR भर सकते हैं?
भारतीय टैक्स कानून के तहत हर वित्तीय वर्ष स्वतंत्र होता है. अगर आपका पिछला कोई रिटर्न पेंडिंग है या आपने उसके लिए माफी की अर्जी दे रखी है, तो भी आप चालू वर्ष का आईटीआर समय पर भर सकते हैं. पिछला रिटर्न न भरने से मौजूदा साल के रिटर्न पर कोई रोक नहीं लगती. बल्कि, समय पर चालू रिटर्न भरना टैक्स विभाग के सामने आपकी ईमानदारी और सही आचरण को ही दिखाता है. जिन मामलों में टैक्स बकाया है, वहां ब्याज से बचने के लिए करदाताओं को जल्द से जल्द भुगतान कर देना चाहिए.