₹10000 से ज्यादा की ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे का ब्रेक लगाने का प्रस्ताव, RBI ने 8 मई तक सुझाव मांगे, जानें पूरी डिटेल्स
भारत में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को देखते हुए Reserve Bank of India (RBI) नए सुरक्षा उपायों पर विचार कर रहा है. इसके तहत ₹10,000 से अधिक की ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे का ब्रेक लगाने का प्रस्ताव है. इस दौरान ग्राहक ट्रांजैक्शन को रोक भी सकेंगे. RBI ने इस प्रस्ताव पर 8 मई तक सुझाव मांगे हैं.
RBI UPI New Rule: भारत में बढ़ते डिजिटल पेमेंट फ्रॉड को रोकने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) नए नियमों पर विचार कर रहा है. इसके तहत ₹10,000 से ज्यादा की ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को तुरंत पूरा करने के बजाय एक घंटे तक रोका जा सकता है. इस दौरान ग्राहक चाहे तो ट्रांजैक्शन को कैंसिल भी कर सकेगा. यह कदम लोगों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए उठाया जा रहा है.
बड़े ट्रांजैक्शन पर लगेगा वेटिंग टाइम
RBI के प्रस्ताव के मुताबिक, ₹10,000 से अधिक की अकाउंट-टू-अकाउंट ट्रांसफर को 1 घंटे तक रोका जाएगा.
- इस दौरान ग्राहक को सोचने और जांचने का समय मिलेगा.
- अगर ट्रांजैक्शन संदिग्ध लगे तो बैंक दोबारा पुष्टि करेगा.
- ग्राहक चाहें तो कुछ भरोसेमंद लोगों (whitelist) को जोड़ सकते हैं, जिनके लिए यह नियम लागू नहीं होगा.
RBI का कहना है कि बड़ी रकम वाले ट्रांजैक्शन ही सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं, इसलिए यह कदम खासतौर पर जरूरी है.
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क्यों जरूरी है यह बदलाव?
आजकल ज्यादातर फ्रॉड तकनीकी नहीं बल्कि सोशल इंजीनियरिंग से होते हैं.
- ठग लोग बनकर डर या जल्दी का माहौल बनाते हैं.
- पीड़ित खुद पैसे ट्रांसफर कर देता है.
- UPI जैसे इंस्टेंट सिस्टम में पैसा वापस पाना मुश्किल होता है.
RBI का मानना है कि 1 घंटे की देरी से लोगों को सोचने का समय मिलेगा और ठगों का दबाव टूटेगा.
अन्य बड़े प्रस्ताव भी चर्चा में
RBI ने सिर्फ यही नहीं, बल्कि तीन और अहम सुझाव दिए हैं:
- सीनियर सिटिजन और दिव्यांगों के लिए सुरक्षा.
- ₹50,000 से ज्यादा ट्रांजैक्शन पर ट्रस्टेड पर्सन की मंजूरी जरूरी हो सकती है.
- ₹25 लाख सालाना लिमिट.
- इससे ज्यादा रकम आने पर पैसा होल्ड रहेगा जब तक जांच पूरी न हो जाए.
- किल स्विच फीचर.
- ग्राहक एक क्लिक में सभी डिजिटल पेमेंट बंद कर सकेंगे.
RBI ने इन प्रस्तावों पर लोगों और संस्थाओं से 8 मई 2026 तक सुझाव मांगे हैं. अंतिम नियम लागू होने से पहले इन पर चर्चा की जाएगी.
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